khabarbhadas.com

.
Previous Next
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
  • 6
  • 7
  • 8
  • 9
  • 10
  • 11
  • 12
जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला   देश की सुरक्षा की दृष्टी से बनी कंपनी मेटल मेटल कॉरपोरेशन ऑफ  इण्डिया (हिदुस्तान जिंक) के विनिवेश के मामले में सीबीआई कार्यालय जोधप... Read more
सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो   चित्तौडग़ढ़। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पेंशन योजनाओं में जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है या नहीं यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर ... Read more
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक गुजरात में ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्य करते हुए, साथ में सहसंयोजक श्री गनी कुरैशी जी भी है। Read more
 ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें? ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें?     मनमोहन सिंह क्यों मौन रहे चीन के सामनें?   पिछले दिनों हमारें प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने डरबन में ब्रिक्स शिखर... Read more
सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं  लद्दाख में चीन की जन मुक्ति सेना की घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र के बीस किलोमीटर ( पहले सूचना यह थी कि दस किलोमीटर के अन्दर) अन्दर आकर अपनी चौकिय... Read more
अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी   4 से 7 अप्रैल तक उज्जैन की कालिदास वीथिका में उज्जैनवासी देख सकेंगे माता-पिता, बुज़ुर्गों पर केन्द्रित मार्मिक कविता पोस्टर प्... Read more
एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप... Read more
 नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें   वर्तमान में चल रहे लोकसभा चुनाव पिछले सभी आम चुनावों से कई दृष्टियों से भिन्न भी हैं Read more
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ओडीशा में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की साज़िश भारत सरकार का एक अल्पसंख्यक आयोग है । भारत सरकार का मानना है कि इस देश में अल्पसंख्यक सदा ख़तरे से घिरे रहते हैं । इस देश के लोग अल्पसंख्यकों को नष... Read more
जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जून और जुलाई का महीना भारत के राष्ट्रवादी आन्दोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । २३ जून १९५३ को डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर की ज... Read more
 रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान का पवित्र महीना शुरु हो गया है । यह महीना हिजरी सम्वत का नौवाँ मास है और ईस्वी सम्वत के हिसाब से नौ जुलाई को शुरु हुआ है । इस महीने में मुसल... Read more
भारतीय भाषाओं का मोर्चा:गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा १०५ और १०७ के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले २२५ दिनों से स... Read more
खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले मुंबई। आठ वर्षों से रोजी रोटी के संकट से झुझ रही बार बालाओं के 'डांस बारÓ को लेकर उच्चन्यायालय के फैसले ने बार बालाओं की चमक लौटा दी ... Read more
पिता के बाद पुत्र का कारनामा पिता के बाद पुत्र का कारनामा पीडि़त महिला फरियाद लेकर पहुंची पुलिस की शरण में इंदौर। आसाराम के बाद अब उनका लड़का नारायण सांई के खिलाफ भी एक परिवाद पेश किया जा रहा है। यह पर... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ जिसने सहयोग किया उसी की पीठ पर छूरा घोपा संजय ने नकली बाबा के कारनामों से लोगों में भारी रोष औंकारेश्वर। मां नर्मदा बने एक आश्रम में बने चौ... Read more
आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी राधेश्याम सोलंकी,भरत ठाकुर, जयंत जोशी,अशोक पाटीदार,हेमंत चतुर्वेदी,मनीष जैन कर रहे हैं एसटीएफ को  गुमराह भोपाल। ईवमिरेकल ज्वेलर्स कंपनी... Read more
क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास  क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास जगदीश जोशी 'प्रचंड  ' नई दिल्ली। काला धन स्वीस बैंक में जमा होने व नेताओं को घेरने की बात पर आंदोलन खड़ा कर 'आप ' के सर्वेसर... Read more
दो लाख करोड़ का खनन घोटाला दो लाख करोड़ का खनन घोटाला देवास जिले में रेत माफिया का राज भोपाल। शिवराज के राज में माइनिंग माफिया ने बेल्लारी की लूट के रिकार्ड भी तोड़ दिए हैं। बीते 10 साल में मप्र... Read more
कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में भोपाल। इस बार के चुनाव में मध्यप्रदेश पर कांग्रेस आलाकमान की विशेष निगाह है Read more
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। Read more
जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा   पीडि़त सुरतानसिंह राजेस पयासी (वकील) यदि ऐसा मा... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 करोड़ों की जमीन से आया रुपया ब्याजखोरी में लगाया औंकारेश्वर। लाखों रुपया एठने वाले औंकारेश्वर के कथित Read more
देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल ठगौरों का महानगर बनते जा रहे इंदौर में प्रशासन कोई खास कार्यवाही नहीं कर पाया अलबत्ता Read more
देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर आखिर यह भरत ठाकुर,बाबूलाल जयंत,मनीष कौन है? राधेश्याम सोलंकी,         Read more
मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... उत्कृष्ट को सजा और... निकृष्ट को  आशीर्वाद की छाया   -सेवानिवृत को भी बना  दिया संकुल प्रभारी  ... Read more
हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी अमिताभ,मुलायमसिंह और सोनिया के पास है क़्वींटल सोना! आप पार्टी के सर्वे सर्वा अरविन्द केजरीवाल व योग गुरु बाबा रामदेव पर अपनी-अपनी दुकान चमकाने... Read more
सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार निर्धारित किराए से अधिक वसूली होती है निजी बसों में (रतलाम कार्यालय) रतलाम । एक दशक पहले प्रदेश में सड़क परिवहन निगम की बसें बंद होने के बाद ... Read more
सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना राधेश्याम सोलंकी, भरत, जयंत जोशी  मनीष जैन एसटीएफ के निशाने पर..   जगदीश जोशी 'प्रचंड ' भोपाल। आम आदमी को फटाफट अम... Read more
मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत युवक से अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर ले रहा था पांच हजार की रिश्वत, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त भी संदेह के घेरे ... Read more
कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार  कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार बड़े नेताओं का अभाव दूसरा पंक्ति में नेताओं की कतार रतलाम से अनिल पांचाल विधानसभा चुनाव सिर पर है... Read more
पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण जम्मू कश्मीर में पुँछ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच और छह अगस्त की मध्य रात्रि को नियंत्रण रेखा के भीतर गश्त लगा रही भारतीय सैनिक टुकड़ी पर... Read more
कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश रतलाम से अनिल कुमार रतलाम। हाल ही में जनता को लम्बे समय के बाद दर्शन देकर लौटे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लगभग शहर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बि... Read more
आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी 67 वां स्वाधीनता दिवस स्वतंत्रता दिवस की क्रमवार गिनती में एक और वर्ष का इजाफा,सबकुछ भुलकर जश्न मनाने का एक और भारतीय दिन...लेकिन क्या सही म... Read more
तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन कभी समाप्त नहीं हुआ। कभी प्रत्यक्ष और कभी प्रच्छन्न उसकी तपश बीजिंग तक पहुंचती ही रही। 2009 में स्वतंत्रता के लिए सं... Read more
तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली स्थित दीन दयाल शोंध संस्थान में आयोजित हुई जिसमें 19 प्रांतों क... Read more
तिब्बतःएक अवलोकन तिब्बतःएक अवलोकन क्षेत्रफल : २५ लाख वर्ग कि० मी० जो वर्तमान चीन के कुल क्षेत्रफल का २६.०४ प्रतिशत हैं। राजधानी : ल्हासा जनसंख्या : ६० ला... Read more
आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं    'आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं' भोपाल। आरएसएस अथवा किसी ऐसे दलको अयोध्या में भगवान राम का... Read more
चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव नई दिल्ली । आगामी लोकसभा चुनाव में सत्त्ता सुख भोगने का सपना सजाए बैठी भाजपा की राह में रोडे अटकाने वालों की कमी नहीं है। भाजपा का अंतरकलह पार... Read more
पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब वर्तमान में पत्रकारिता हाशिये पर है और मीडिया शब्द चलन में है.पत्रकारिता के गूढ़ अर्थ और मीडिया की व्यापकता को रेखांकित करता मध्यप्रदेश क... Read more
राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में देखने, सुनने और बतियाने के बाद किसी भी एंगल से वे राजनेता नहीं लगते। कपाल पर बड़ा सा सिंदूरी टीका, सिर और दाड़ी के रंगे हुए सुनहरी काले गहरे ब... Read more
कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना धार :बगैरअनुमति कालोनी विकास करने वालों कालोनाईजरों पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की गाज लगातार गिर रही है। इसी कड़ी में धार शहर में बगैर विक... Read more
जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! नई दिल्ली: धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देना आज के समय में काफी आसान है, क्योंकि हम देशवासी दिमाग से नहीं बल्कि दिल से धर्म को जोड़कर रखते है... Read more
ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है   इंदौर।मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया प्रदेष कांग्रेस में जान फंकने में लगे है लेकिन प्रदेष के कई पदाधिकारियों... Read more
अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसलाएत पंचमी के दिन धार जिले की भोजशाला में हंगामे और उपद्रव के बीच पूजा के साथ नमाज अता फरमाने की रस्म पूरी हो जाने पर म... Read more
बोले तो आसाराम बोले तो आसाराम 90 के दशक में धर्मप्रेमी जनता के लिए आशा की किरण बन कर उभरे आसाराम बापू एक दशक बाद ही बदनामी के दाग अपनी आभा पर लगवा चुके हैं। आश्रम में बच्चो... Read more
बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज मंदसौर।(धर्मवीर रत्नावत) जिस तरह देश में मंदसौर अफीम उत्पादन, तस्करी के लिए मशहूर है, उसी तरह नीमच, मंदसौर, रतलाम के कुछ खास इलाके भी बाछ... Read more

किसी एक देश से दूसरे देश में आकर शरण माँगने वाले व्यक्ति को शरणार्थी कहा जाता है लेकिन अपने ही देश में किन्हीं कारणों से किसी को अपनी जन्म भूमि छोडऩी पड़े तो वह विस्थापित कहलाता   है । यह इन शब्दों का तकनीकी अन्तर कहा जा सकता है। जहाँ तक दोनों के दुख दर्द का सवाल है , उसमें तो क्या अन्तर रहता होगा । लेकिन दुख दर्द की चर्चा साहित्य के क्षेत्र का मामला है । उसके लिये , जाके पैर न फटी विआई सो क्या जाने पीर पराई , का उद्धरण देना होगा । राजनीति साहित्य से नहीं चलती । वह यथार्थ के ठोस धरातल पर नमूदार होती है । वह किसी का दुख दर्द उसके पैरों की फटी विआईयां देख कर नहीं मापती । वह किसी की फटी विआईयों में से रिस रहे ख़ून का मोल अपने नफ़े नुक़सान के आधार पर लगाती है ।  जम्मू में इन्हीं शरणार्थियों और विस्थापितों की फटी विआईयों से खून पिछले सात दशकों से रिस रहा है लेकिन उनके भीतर की पीर  पहचानने की कोई भी कोशिश नहीं हो रही । क्योंकि न यह पीर और न ही ख़ून जम्मू कश्मीर में विधान सभी में सीटें उगाने में मददगार हो सकता है।


1 पश्चिमी पंजाब से आने वाले शरणार्थी--  जम्मू में इन का इतिहास 1947 से शुरु होता है । 1947 में विभाजित स्वतंत्रता ने मुसलमानों को उनको होमलैंड भी दे दिया था । उस होमलैंड में बाक़ी प्रान्तों के अलावा आधे से भी ज़्यादा पंजाब समा गया था । मुसलमानों के होमलैंड में समा गये पश्चिमी पंजाब से हिन्दु सिक्खों का पलायन शुरु हुआ । लेकिन यह पलायन गान्धी जी की शान्ति यात्रा नहीं थी । शरणार्थियों के इन क़ाफि़लों को इस्लाम की तलवार की धार के नीचे से निकल कर आना था । उस धार से बच कर कितने लोग सही सलामत पहुँच पाये यह अलग कथा है । पश्चिमी पंजाब के रावलपिंडी, गुजराँवाला और स्यालकोट इत्यादि इलाक़ों से आने वाले शरणार्थियों को सबसे नज़दीक़ जम्मू ही पड़ता था ।

 

इसलिये किसी भी प्रकार से बच कर आये ये लोग जम्मू पहुँच गये । पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से आने वाले जो शरणार्थी अन्य प्रान्तों में पहुँचे ,उन के लिये भारत सरकार ने , उनके पुनर्वास की जो नीति अपनाई , उसे जम्मू कश्मीर में लागू नहीं किया गया । मसलन दूसरे प्रान्तों में जाने वाले शरणार्थियों को , पाकिस्तान में छोड़ी गई सम्पत्ति के आकलन के बाद मुआवज़ा दिया गया । खेती के लिये किसानों को ज़मीन मुहैया करवाई गई । इधर से हिजरत करके जाने वाले मुसलमानों के खाली हुये घर उनके नाम आवंटित कर दिये गये ।   लेकिन इसके विपरीत जो शरणार्थी जम्मू कश्मीर में आ गये थे , उनके दुर्भाग्य ने आज 63 साल बाद भी उनका पीछा नहीं   छोड़ा।

 

इनकी संख्या दो लाख से भी ज्यादा है । राज्य सरकार इनके पुनर्वास के लिये कोई नीति बनाना तो दूर , इन को राज्य का हिस्सा मानने को भी तैयार नहीं है। इस के लिये सरकार ने 1927 के एक ऐसे क़ानून को ढाल की तरह इस्तेमाल किया है , जिसमें राज्य के स्थायी निवासी को पारिभाषित किया गया है। यह क़ानून उसी प्रकार का है , जिस प्रकार के क़ानून या नियम अन्य राज्यों में स्टेट डोमिसायल या राज्य के निवासी को पारिभाषित करने के लिये बने हुये हैं। अन्तर केवल इतना ही है कि अन्य राज्यों में निवासी की परिभाषा गतिमान रहती है , लेकिन जम्मू कश्मीर में यह जड़ता को प्राप्त हो गई है । अन्य राज्यों में एक निश्चित अवधि तक उस राज्य में रहने वाले व्यक्ति को उस राज्य का निवासी मान लिया जाता है । लेकिन जम्मू कश्मीर में स्थायी निवासी वह है जिसे 1954 में उस प्रान्त में रहते हुये दस साल हो गये हों । ज़ाहिर है इस परिभाषा की जडें भूतकाल में हैं , जबकि ये भविष्य काल या वर्तमान काल में होनी चाहियें। इस क़ानून के कारण शरणार्थियों को सरकारी कागज़़ों में राज्य के स्थायी निवासी नहीं माना जा सकता।


 यह तो शुरुआत भर है , असली ड्रामा तो उसके बाद ही शुरु होता है। पश्चिमी पंजाब से जम्मू कश्मीर में आने के बाद इन शरणार्थियों ने उन मकानों में रहना शुरु कर दिया , जिन्हें मुसलमान छोड़ कर पाकिस्तान हिजरत कर गये थे । इसे देख कर जम्मू कश्मीर सरकार ने एक नई तरकीब निकाली । सरकार ने पुनर्वास विधेयक का क़ानून बना कर उन सभी मुसलमानों या उन के उत्तराधिकारियों को राज्य में वापिस आ जाने का निमंत्रण दिया । फिर सरकार ने कल्पना की कि एक न एक दिन वे मुसलमान वापिस लौट आयेंगे , इसलिये ज़रुरी है कि उनके घरबार हिफाज़त से रखे जायें , ताकि असली मालिकों के आते ही उन्हें सही सलामत लौटा दिया जाये । इसलिये कस्टोडियन विभाग की स्थापना की गई और पाकिस्तान को हिजरत कर गये मुसलमानों के मकान दुकान , ज़मीन जायदाद इस विभाग के हवाले कर दी गई ।

 

कस्टोडियन विभाग ने इन शरणार्थियों को मकान ख़ाली कर देने के लिये कहा और खेती की ज़मीनें छोड़ देने के आदेश जारी किये। दानिशमंदों ने कहा कि सरकार अपने शेखचिल्लीपन की यह नीति छोड़े और शरणार्थियों को स्थायी रुप से बसाने की व्यवस्था करे। जम्मू कश्मीर सरकार  को भी इस बात का इलम था कि पाकिस्तान गया हुआ कोई प्राणी वापिस यहाँ बसने नहीं आयेगा , लेकिन उसकी यह सारी मैनेजमैंट राज्य से शरणार्थियों को भगाने के लिये ही थी। सरकार ने कहा , इन मकानों व ज़मीनों के मालिक तो वही मुसलमान रहेंगे जो पाकिस्तान को चले गये हैं , लेकिन मानवीय आधार पर शरणार्थियों को इनमें किरायेदार के नाते रहने की अनुमति दी जा सकती है। इस प्रकार सभी शरणार्थी एक निश्चित किराये पर किरायेदार घोषित हुये। वे अभी भी इन मकानों और ज़मीनों का किराया दे रहे हैं जो बाकायदा कसटोडियन विभाग में उस मुसलमान मालिक के नाम जमा करवाना पडता है जो सात दशक पहले पाकिस्तान में जाकर बस ही नहीं गया , हो सकता है वहां की सेना में भर्ती होकर भारतीय सेना से लडा भी हो , और रसीदें संभाल कर रखनी पड़तीं हैं , ताकि वक़्त बेवक्त काम आयें।

 


 लेकिन अब इनमें से कुछ शरणार्थी अपने परिश्रम के बलबूते काफ़ी समृद्ध हो गये हैं और वे कस्टोडियन विभाग का किराये का नरक छोड़ कर अपना स्वयं का मकान बना लेना चाहते हैं । इसके लिये वे सरकार से कोई सहायता नहीं चाहते। जो ज़मीन जायदाद वे पीछे छोड़ आये थे , उसे वे भुला चुके हैं और नये सिरे से अपना आशियाना बनाना चाहते हैं । लेकिन वे ऐसा नहीं कर सकते। वही 1927 का राज्य के स्थायी निवासी वाला क़ानून। इस कानून के अनुसार जम्मू कश्मीर में सम्पत्ति वही खऱीद सकता है जो राज्य का स्थायी निवासी हो। ये शरणार्थी राज्य के स्थायी निवासी नहीं हैं । यह अलग बात है कि इनको यहाँ रहते हुये सात दशक हो चुके हैं । जिन मकानों में वे रह रहे हैं उनके मालिक नहीं बन सकते और अपनी इच्छा से ख़ुद के पैसों से अपने लिये नया घर बना नहीं सकते । ताक़तवर मारे भी और रोने भी न दे । लेकिन यह इन शरणार्थियों की कथा की भूमिका मात्र है । असली कहानी आगे शुरु होती है । अब इन शरणार्थियों के बच्चे जवान हो गये हैं । इनके बच्चे क्या, आगे उनके बच्चे भी जवान हो गये हैं । मामला तीसरी पीढी तक आ पहुंचा ह। लेकिन इन बच्चों को और आगे की पीढिय़ों में होने वाले उनके बच्चों को   भी राज्य के मैडीकल , आभियान्त्रिकी महाविद्यालयों में प्रवेश नहीं मिल     सकता। राज्य के बाक़ी सभी बच्चे स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षा नि:शुल्क प्राप्त करते हैं , लेकिन इन बच्चों के लिये यह स्वप्न है। गऱीबी या योग्यता के आधार पर शेष बच्चे राज्य सरकार से छात्रवृत्तियाँ ग्रहण करते हैं , लेकिन इन बच्चों के लिये शिक्षा के ये सारे दरवाज़े बन्द हैं ।

 

यह कथा का एक हिस्सा है । अब दूसरा हिस्सा । बहुत से बच्चे इतनी बाधाओं के बाबजूद अन्य प्रान्तों से उच्च शिक्षा प्राप्त करके आ जाते हैं । लेकिन अब उन के लिये राज्य में सरकारी नौकरी के दरवाज़े बन्द हैं । लेकिन जम्मू कश्मीर के इन दलित शरणार्थियों को इसका किंचित मात्र लाभ नहीं मिल पाता । आज लोकतंत्र का युग है । जिसके पास वोट बैंक है , नेता उनके पास दौड़े आते हैं । इन शरणार्थियों की जनसंख्या तो दो लाख को भी पार कर चुकी है । इन के वोट की शक्ति को कोई भी भला कैसे नकार सकता है ? नई व्यवस्था की गई । राज्य विधान सभा के चुनाव में वही मतदान कर सकता है जो राज्य का स्थायी निवासी होगा । वही 1927 वाला क़ानून । इस क़ानून की आड़ में राज्य सरकार ने इन दो लाख शरणार्थियों को केवल राज्य विधान सभा के लिये ही नहीं बल्कि पंचायत व नगरपालिका के चुनावों में भी मतदान के अधिकार से बंचित कर दिया है । तू डाल डाल मैं पात पात । ये शरणार्थी 1947 से अभी तक राज्य सरकार की डाल पर लटक रहे हैं ।


 इन की भी आगे दो श्रेणियाँ हैं ।
(क) पाक अनधिकृत जम्मू कश्मीर के विस्थापित-- 1947 में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर आक्रमण करके उसके एक तिहाई हिस्से पर अनधिकृत रुप से क़ब्ज़ा कर लिया था । इसमें बल्तीस्तान , गिलगित,मुज्जफराबाद , मीरपुर , कोटली और पुँछ का अधिकांश इलाक़ा शामिल था । पाक अनधिकृत क्षेत्रों में मची मार काट से बचकर हिन्दु और सिक्ख  राज्य के उन इलाक़ों में चले आये , जिन पर या तो पाकिस्तानी सेना क़ब्ज़ा नहीं कर सकी थी या फिर उनको सेना ने पाकिस्तानी आक्रमणकारियों से मुक्त करवा लिया था। तकनीकी शब्दावली में ये लोग विस्थापित कहलाये , क्योंकि ये अपने राज्य के ही एक भाग से दूसरे भाग में आये थे । शुरु में ऐसा लगता था कि सेना जल्दी ही पाक अनधिकृत क्षेत्र को मुक्त करवा लेगी और ये विस्थापित अपने घरों को वापिस लौट जायेंगे। लेकिन जब एक जनवरी 1949 को भारत सरकार ने मुक्ति अभियान के बीच ही युद्ध विराम की घोषणा कर दी तो इन विस्थापितों के वापिस लौटने की सभी आशाएँ धूमिल हो गईं।   सबसे पहले तो राज्य सरकार ने कोशिश की कि इन विस्थापितों को राज्य में टिकने ही न दिया जाये। भारत सरकार पर दबाव डाला गया कि इनको देश के दूसरे हिस्सों में बसाया जाये । हज़ारों विस्थापितों को ट्रकों में लाद लाद कर पंजाब और दिल्ली की ओर रवाना कर दिया गया । यहाँ तक की मध्य प्रदेश तक में ये विस्थापित पहुँचा दिये गये। इस प्रकार लगभग दो लाख विस्थापितों को राज्य सरकार किसी तरीके से राज्य से भगाने में कामयाब हो गई। लेकिन दस लाख अब भी राज्य में ही है ।  विस्थापितों ने राज्य सरकार पर विश्वास कर वहाँ रहना भी स्वीकार किया ।
  लेकिन सरकार ने इनको तकनीकी कारणों से शरणार्थी मानने से इंकार कर दिया । सरकार का तर्क है कि यदि इन विस्थापितों को शरणार्थी स्वीकार कर लिया जाये तो अप्रत्यक्ष रुप से इसका अर्थ होगा कि पाकिस्तान के क़ब्ज़े में गये जम्मू कश्मीर के हिस्से को अलग देश मान लिया गया है । लेकिन इसके बाद न तो सरकार ने पाकिस्तान के कब्जे में गये उस भू भाग को खाली करवाने का कोई प्रयास किया और न ही इन विस्थापितों को इन की उस पीछे छूट गई सम्पत्ति का कोई मुआवज़ा दिया । सरकार का अपना तर्क ह। मुआवज़ा शरणार्थी के लिये हो सकता है , विस्थापित के लिये कैसा मुआवज़ा ? इनसे भी सरकार ज़मीनों का किराया वसूलती है । इनको भी राज्य सरकार के पुनर्वास विधेयक की आग में झुलसना पड़ रहा है। पाकिस्तान चले गये मुसलमानों के जिन मकानों में ये रह रहे हैं , सरकार अपने रिकार्ड में अभी भी उन मकानों का मालिक उन मुसलमानों को ही मानती है और हथेली पर दाना रख कर रट लगाती रहती है - आ कौआ दाना चुग । पता सरकार को भी है कि उस पार से कौआ दाना चुकने कभी नहीं आयेगा लेकिन सरकार के इस तमाशे से विस्थापित भटकने को मजबूर हो रहे हैं ।
   एक बार दिखावे के लिये ही सही , सरकार ने इन विस्थापित परिवारों की गिनती का काम शुरु किया था । लेकिन जब गिनती करने वाले अधिकारियों ने एक के बाद सीधा दस गिनना शुरु कर दिया तो बीच के परिवारों ने पूछना ही था कि हमारा परिवार क्यों छोड़ा जा रहा है ? सरकार का उत्तर अख़बारों के हास्य सामग्री कालम में छप सकता है लेकिन सरकार को इससे क्या लेना देना । परिवार का मुखिया साथ था तो ठीक नहीं तो चलो हटो परे। और आज तक राज्य सरकार कुल मिलाकर सभी सत्रह लाख विस्थापितों/शरणार्थियों को चलो हटो परे के डंडों से ही हाँक रही है ।
(ख) युद्ध के कारण विस्थापित-- विस्थापितों की दूसरी श्रेणी उन क्षेत्रों से है , जो क्षेत्र नियंत्रण रेखा पर है और जहाँ से 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध के कारण , इनको अपने घर बार छोड़ कर जम्मू आना पड़ा । इन की संख्या भी लगभग दो लाख है ।
(ग) कश्मीर घाटी से विस्थापित- कश्मीर घाटी में जब 1990 में वहाँ के कट्टर पाकिस्तान समर्थक दलों ने निज़ाम-ए-मुस्तफ़ा की योजना पाकिस्तान की सक्रिय सहायता से लागू की तो कश्मीर के हिन्दुओं के सामने उन्होंने दो विकल्प रखे । या तो मुसलमान बन जाओ या फिर अपनी औरतों को घाटी में छोड़ कर यहाँ से चले जाओ । मुस्लिम वोट बैंक के नाराज़ होने के डर से देश की तथाकथित पंथनिरपेक्ष पार्टियों ने कट्टर पंथियों की इस योजना का सक्रिय विरोध नहीं किया । इसके विपरीत इस योजना का विरोध कर रहे वहां के राज्यपाल जगमोहन को राजीव गान्धी की जि़द के कारण हटा दिया । इसके कारण घाटी में से तीन लाख से भी ज़्यादा हिन्दुओं को ेअपना घर छोड़ कर जम्मू में शरण लेनी पड़ी ।  शरणार्थियों/विस्थापितों को खदेड़ते घेरते  राज्य सरकार ने इतना ध्यान ज़रुर रखा कि कहीं कोई विस्थापित या शरणार्थी कश्मीर घाटी की ओर न रुख़ कर ले । जहाँ तक कि राज्य सरकार ने मुज्जफराबाद के विस्थापितों को भी घाटी का रुख़ नहीं करने दिया। उन्हें भी जम्मू की ओर धकेला।  पिछले दिनों केन्द्र सरकार की ओर से तीन लोग वार्ताकार के रुप में प्रदेश भर में सैर सपाटा करते रहे और सरकारी मेहमानवाज़ी हलाल करते रहे लेकिन उनकी इतनी हिम्मत नहीं हुई कि केवल इतना भर लिख दें कि इन शरणार्थियों को राज्य के स्थायी निवासी का प्रमाण पत्र दिया जाना चाहिये। इससे उमर अब्दुल्ला नाराज़ हो सकते थे , हुर्रियत कान्फ्रेंस नाराज़ हो सकती थी। सरकार को आतंकवादियों के मानवाधिकारों की चिन्ता है , पत्थर फेंकने वालों को पुलिस में भर्ती करने की चिन्ता है , पाकिस्तान से मुसलमानों को लाकर राज्य में बसाने की चिन्ता है , म्यांमार के रहंगिया मुसलमानों को घाटी में बसाने की चिन्ता है । चिन्ता नहीं है तो केवल राज्य के इन सत्रह लाख वाशिन्दों की , क्योंकि वे हिन्दु सिक्ख हैं ।इनको आशा थी कि इस बार अपना ही एक विस्थापित/शरणार्थी भाई देश का प्रधानमंत्री बना है । उसके अपने पैरों की विआई फटी थी , इसलिये वह इनकी पीर भी समझेगा , लेकिन उसे भी हुर्रियत से आगे  कुछ दिखाई नहीं देता । शायद सत्ता की तासीर ही ऐसी होती हो।
आमीन ।

Special Zone

खबर भड़ास डाट काम पर यदि आप कोर्इ खबर, भड़ास, सूचना प्रेषित करना चाहते है, तो स्वागत है आपकी खबर, भड़ास तथ्यात्मक हो, खबर के साथ संबंधित संस्था, व्यकित जिसके बारे में खबर भेजी गर्इ है उसका भी पक्ष भेजे तो बेहतर होगा आप हमें khabarbhadas.com पर जानकारी मेल के जरिए भेज सकते है।

Email Id :-

j.joshijournalist@gmail.com

Quick Contact

नई पुरानी खबरें

Advertise-with-us

Contact us- 104, बड़जात्या चेम्बर एम.वाय.हासिपटल के सामने, इंदौर |
 
Call: 9977693658 || 9827096073 

For rajasthan
Call:9928614443||9602744447
Contact us- C-104,Kumbha nagar opp. watertank,chittorgarh(Raj.)