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जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला   देश की सुरक्षा की दृष्टी से बनी कंपनी मेटल मेटल कॉरपोरेशन ऑफ  इण्डिया (हिदुस्तान जिंक) के विनिवेश के मामले में सीबीआई कार्यालय जोधप... Read more
सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो   चित्तौडग़ढ़। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पेंशन योजनाओं में जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है या नहीं यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर ... Read more
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक गुजरात में ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्य करते हुए, साथ में सहसंयोजक श्री गनी कुरैशी जी भी है। Read more
 ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें? ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें?     मनमोहन सिंह क्यों मौन रहे चीन के सामनें?   पिछले दिनों हमारें प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने डरबन में ब्रिक्स शिखर... Read more
सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं  लद्दाख में चीन की जन मुक्ति सेना की घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र के बीस किलोमीटर ( पहले सूचना यह थी कि दस किलोमीटर के अन्दर) अन्दर आकर अपनी चौकिय... Read more
अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी   4 से 7 अप्रैल तक उज्जैन की कालिदास वीथिका में उज्जैनवासी देख सकेंगे माता-पिता, बुज़ुर्गों पर केन्द्रित मार्मिक कविता पोस्टर प्... Read more
एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप... Read more
 नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें   वर्तमान में चल रहे लोकसभा चुनाव पिछले सभी आम चुनावों से कई दृष्टियों से भिन्न भी हैं Read more
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ओडीशा में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की साज़िश भारत सरकार का एक अल्पसंख्यक आयोग है । भारत सरकार का मानना है कि इस देश में अल्पसंख्यक सदा ख़तरे से घिरे रहते हैं । इस देश के लोग अल्पसंख्यकों को नष... Read more
जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जून और जुलाई का महीना भारत के राष्ट्रवादी आन्दोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । २३ जून १९५३ को डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर की ज... Read more
 रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान का पवित्र महीना शुरु हो गया है । यह महीना हिजरी सम्वत का नौवाँ मास है और ईस्वी सम्वत के हिसाब से नौ जुलाई को शुरु हुआ है । इस महीने में मुसल... Read more
भारतीय भाषाओं का मोर्चा:गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा १०५ और १०७ के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले २२५ दिनों से स... Read more
खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले मुंबई। आठ वर्षों से रोजी रोटी के संकट से झुझ रही बार बालाओं के 'डांस बारÓ को लेकर उच्चन्यायालय के फैसले ने बार बालाओं की चमक लौटा दी ... Read more
पिता के बाद पुत्र का कारनामा पिता के बाद पुत्र का कारनामा पीडि़त महिला फरियाद लेकर पहुंची पुलिस की शरण में इंदौर। आसाराम के बाद अब उनका लड़का नारायण सांई के खिलाफ भी एक परिवाद पेश किया जा रहा है। यह पर... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ जिसने सहयोग किया उसी की पीठ पर छूरा घोपा संजय ने नकली बाबा के कारनामों से लोगों में भारी रोष औंकारेश्वर। मां नर्मदा बने एक आश्रम में बने चौ... Read more
आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी राधेश्याम सोलंकी,भरत ठाकुर, जयंत जोशी,अशोक पाटीदार,हेमंत चतुर्वेदी,मनीष जैन कर रहे हैं एसटीएफ को  गुमराह भोपाल। ईवमिरेकल ज्वेलर्स कंपनी... Read more
क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास  क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास जगदीश जोशी 'प्रचंड  ' नई दिल्ली। काला धन स्वीस बैंक में जमा होने व नेताओं को घेरने की बात पर आंदोलन खड़ा कर 'आप ' के सर्वेसर... Read more
दो लाख करोड़ का खनन घोटाला दो लाख करोड़ का खनन घोटाला देवास जिले में रेत माफिया का राज भोपाल। शिवराज के राज में माइनिंग माफिया ने बेल्लारी की लूट के रिकार्ड भी तोड़ दिए हैं। बीते 10 साल में मप्र... Read more
कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में भोपाल। इस बार के चुनाव में मध्यप्रदेश पर कांग्रेस आलाकमान की विशेष निगाह है Read more
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। Read more
जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा   पीडि़त सुरतानसिंह राजेस पयासी (वकील) यदि ऐसा मा... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 करोड़ों की जमीन से आया रुपया ब्याजखोरी में लगाया औंकारेश्वर। लाखों रुपया एठने वाले औंकारेश्वर के कथित Read more
देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल ठगौरों का महानगर बनते जा रहे इंदौर में प्रशासन कोई खास कार्यवाही नहीं कर पाया अलबत्ता Read more
देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर आखिर यह भरत ठाकुर,बाबूलाल जयंत,मनीष कौन है? राधेश्याम सोलंकी,         Read more
मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... उत्कृष्ट को सजा और... निकृष्ट को  आशीर्वाद की छाया   -सेवानिवृत को भी बना  दिया संकुल प्रभारी  ... Read more
हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी अमिताभ,मुलायमसिंह और सोनिया के पास है क़्वींटल सोना! आप पार्टी के सर्वे सर्वा अरविन्द केजरीवाल व योग गुरु बाबा रामदेव पर अपनी-अपनी दुकान चमकाने... Read more
सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार निर्धारित किराए से अधिक वसूली होती है निजी बसों में (रतलाम कार्यालय) रतलाम । एक दशक पहले प्रदेश में सड़क परिवहन निगम की बसें बंद होने के बाद ... Read more
सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना राधेश्याम सोलंकी, भरत, जयंत जोशी  मनीष जैन एसटीएफ के निशाने पर..   जगदीश जोशी 'प्रचंड ' भोपाल। आम आदमी को फटाफट अम... Read more
मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत युवक से अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर ले रहा था पांच हजार की रिश्वत, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त भी संदेह के घेरे ... Read more
कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार  कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार बड़े नेताओं का अभाव दूसरा पंक्ति में नेताओं की कतार रतलाम से अनिल पांचाल विधानसभा चुनाव सिर पर है... Read more
पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण जम्मू कश्मीर में पुँछ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच और छह अगस्त की मध्य रात्रि को नियंत्रण रेखा के भीतर गश्त लगा रही भारतीय सैनिक टुकड़ी पर... Read more
कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश रतलाम से अनिल कुमार रतलाम। हाल ही में जनता को लम्बे समय के बाद दर्शन देकर लौटे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लगभग शहर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बि... Read more
आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी 67 वां स्वाधीनता दिवस स्वतंत्रता दिवस की क्रमवार गिनती में एक और वर्ष का इजाफा,सबकुछ भुलकर जश्न मनाने का एक और भारतीय दिन...लेकिन क्या सही म... Read more
तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन कभी समाप्त नहीं हुआ। कभी प्रत्यक्ष और कभी प्रच्छन्न उसकी तपश बीजिंग तक पहुंचती ही रही। 2009 में स्वतंत्रता के लिए सं... Read more
तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली स्थित दीन दयाल शोंध संस्थान में आयोजित हुई जिसमें 19 प्रांतों क... Read more
तिब्बतःएक अवलोकन तिब्बतःएक अवलोकन क्षेत्रफल : २५ लाख वर्ग कि० मी० जो वर्तमान चीन के कुल क्षेत्रफल का २६.०४ प्रतिशत हैं। राजधानी : ल्हासा जनसंख्या : ६० ला... Read more
आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं    'आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं' भोपाल। आरएसएस अथवा किसी ऐसे दलको अयोध्या में भगवान राम का... Read more
चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव नई दिल्ली । आगामी लोकसभा चुनाव में सत्त्ता सुख भोगने का सपना सजाए बैठी भाजपा की राह में रोडे अटकाने वालों की कमी नहीं है। भाजपा का अंतरकलह पार... Read more
पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब वर्तमान में पत्रकारिता हाशिये पर है और मीडिया शब्द चलन में है.पत्रकारिता के गूढ़ अर्थ और मीडिया की व्यापकता को रेखांकित करता मध्यप्रदेश क... Read more
राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में देखने, सुनने और बतियाने के बाद किसी भी एंगल से वे राजनेता नहीं लगते। कपाल पर बड़ा सा सिंदूरी टीका, सिर और दाड़ी के रंगे हुए सुनहरी काले गहरे ब... Read more
कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना धार :बगैरअनुमति कालोनी विकास करने वालों कालोनाईजरों पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की गाज लगातार गिर रही है। इसी कड़ी में धार शहर में बगैर विक... Read more
जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! नई दिल्ली: धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देना आज के समय में काफी आसान है, क्योंकि हम देशवासी दिमाग से नहीं बल्कि दिल से धर्म को जोड़कर रखते है... Read more
ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है   इंदौर।मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया प्रदेष कांग्रेस में जान फंकने में लगे है लेकिन प्रदेष के कई पदाधिकारियों... Read more
अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसलाएत पंचमी के दिन धार जिले की भोजशाला में हंगामे और उपद्रव के बीच पूजा के साथ नमाज अता फरमाने की रस्म पूरी हो जाने पर म... Read more
बोले तो आसाराम बोले तो आसाराम 90 के दशक में धर्मप्रेमी जनता के लिए आशा की किरण बन कर उभरे आसाराम बापू एक दशक बाद ही बदनामी के दाग अपनी आभा पर लगवा चुके हैं। आश्रम में बच्चो... Read more
बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज मंदसौर।(धर्मवीर रत्नावत) जिस तरह देश में मंदसौर अफीम उत्पादन, तस्करी के लिए मशहूर है, उसी तरह नीमच, मंदसौर, रतलाम के कुछ खास इलाके भी बाछ... Read more

जम्मू कश्मीर के रामबन ज़िला के धर्म-गूल-संगलदान क्षेत्र में पिछले दिनों १७ जुलाई को सीमा सुरक्षा बल और स्थानीय लोगों का टकराव हुआ ,

 जिसमें चार लोगों की मृत्यु हो गई और कुछ लोग घायल हुये । इस स्थानीय विवाद के आधार पर पूरी कश्मीर घाटी में कर्फ़्यू लगाना पड़ा और अनेक स्थानों पर दंगा फ़साद हुआ । अमरनाथ की यात्रा रोक देनी पड़ी और तीर्थ यात्रियों की बसों पर पथराव हुआ । सीमा सुरक्षा बल के जवानों पर आरोप था कि उन्होंने मुसलमानों के मज़हबी ग्रन्थ क़ुरान शरीफ़ का अपमान किया है ।  अब धीरे धीरे इस पूरे कांड के पीछे का षड्यंत्र सामने आ रहा है , लेकिन षड्यंत्रकारी अभी भी पर्दे के पीछे सुरक्षित हैं और सरकार की इच्छा भी उन्हें बेनक़ाब करने की नहीं लगती । पूरे कांड को समझने के लिये यहाँ के भूगोल को समझना होगा । रामबन ज़िला का गूल-धर्म-संगलदान क्षेत्र रियासी ज़िला की सीमा से लगा हुआ है । यहाँ तक का क्षेत्र मोटे तौर पर हिन्दु बहुल क्षेत्र माना जाना है । बनिहाल से कटरा तक जो रेलवे लाईन बिछाई जा रही है , उसी में यह क्षेत्र पडता है । सीमा सुरक्षा बल की ७६वीं बटालियन रामबन में तैनात है ।

 

बल का शिविर इस क्षेत्र के धर्म गाँव में है । इसी गाँव में एक मस्जिद भी है , जिसकी अच्छी खासी ज़मीन भी है । अब क्योंकि इसी क्षेत्र से रेलवे लाईन निकल रही है , इसलिये यहाँ की ज़मीन की क़ीमतें आसमान को छूने लगी हैं । उसी आसमान छूती क़ीमतों के कारण यह मस्जिद वानी और शान ,दो समुदायोंके बीच विवाद का कारण बन गई है । फ़िलहाल इस मस्जिद पर शान परिवार का नियंत्रण है । लेकिन इस इलाक़े का वानी परिवार भी इस पर नियंत्रण के लिये काफ़ी अरसे से प्रयत्नशील है । इस इलाक़े में वानियों के तीस पैंतीस परिवार हैं । लेकिन वानियों का एजाज़ अहमद पुलिस में नौकरी करता है और संयोग से इस समय संगलदान की चौकी पर ही एस एच ओ है । वानी गूल के कांग्रेसी विधायक एजाज़ अहमद खान के समर्थक हैं , जो इस समय प्रदेश सरकार में राजस्व राज्य मंत्री हैं । इसलिये मस्जिद पर नियंत्रण को लेकर वानियों का पलड़ा भारी पड़ता जा रहा था । लेकिन शान परिवार को भी हल्का नहीं माना जा सकता । यह परिवार भी इलाक़े में रसूखदार माना जाता है । यह राजनैतिक परिवार है । लेकिन इस परिवार का सम्बध नैशनल कान्फ्रेंस और मुफ़्ती मोहम्मद सैयद की पीपुल्स डैमोक्रेटिक पार्टी से है । इस क्षेत्र में एन . सी और पी. डी. पी में आपस में दल बदल होता रहता है । मंजूर अहमद शान का भाई शमशान अहमद नैशनल कान्फ्रेंस का नेता है ।

 

शान परिवार की शमशाद बानो कांग्रेस नेता एजाज़ अहमद खान के खिलाफ २००८ का चुनाव पी डी पी के टिकट पर लड़ी थी और उसे २९३७ मत मिले थे । शमशाद का भाई मंज़ूर अहमद शान भी इस क्षेत्र के प्रमुख सामाजिक - राजनैतिक रुप से अग्रणी लोगों में से था । वह अपने स्वभाव और व्यवहार के कारण इलाक़े में लोकप्रिय भी था । पढ़ा लिखा नौजवान था और राजकीय सेवा में सहायक प्रोफैसर था । ऐसी चर्चा थी कि यदि शान परिवार की ओर से वह आगामी चुनाव लड़ता है तो वर्तमान कांग्रेसी विधायक अहमद खान को कड़ी टक्कर दे सकता था । लेकिन वानियों की चिन्ता और थी । यदि मंज़ूर अहमद शान राजनीति में स्थापित हो जाता है तो वानियों के लिये भविष्य में मस्जिद पर नियंत्रण करना मुश्किल ही हो जायेगा ।

 

 जब शान और वानी परिवार मस्जिद पर नियंत्रण की योजना को लेकर अपनी अपनी रणनीति बना रहे थे , तब आतंकवादी तत्व एक अलग योजना पर काम कर रहे थे । धर्म गांव से सीमा सुरक्षा बल का शिविर कैसे हटाया जाये ? सीमा सुरक्षा बल की उपस्थिति से इलाक़े के हिन्दु आश्वस्त अनुभव करते हैं । यह तभी हो सकता है , यदि किसी बहाने सीमा सुरक्षा बल से किसी बात को लेकर स्थानीय लोगों का तक़रार हो जाये । इसके लिये जुलाई मास से बेहतर समय और क्या हो सकता है ? क्योंकि एक ओर रमजान का महीना होता है और दूसरी ओर अमरनाथ की यात्रा इसी रास्ते से गुज़रती है । ऐसे समय में चिंगारी लगाना आसान है ।
                   

इस पृष्ठभूमि में अब इस पूरे कांड को समझना आसान हो जायेगा । बुधवार की शाम को लगभग सात बजे डवाल के  मुस्तफा का बेटा , मोहम्मद अब्दुल लतीफ़ धर्म गाँव में सीमा सुरक्षा बल के शिविर के बाहर संदिग्ध अवस्था में घूम रहा था ।लतीफ़ संगलदान गाँव में एक छोटी मोटी दुकान करता था । लेकिन आजीविका के लिये रात्रि को धर्म गाँव में क़ाज़ी शबीर अहमद के मदरसे में रात्रि चौकीदार का काम भी करता है । बल के सिपाहियों ने उससे पूछताछ की तो उसने उनसे गाली गलौज करना शुरु कर दिया । बल का कहना है कि इसके बावजूद हमने उसे जाने दिया । लेकिन संभावना यही है कि बल के लोगों ने उसकी पिटाई के बाद ही उसे जाने दिया होगा । लेकिन उसके बाद के घटनाक्रम की पूरी स्क्रिपट षड्यंत्रकारियों ने शायद पहले ही लिख रखी थी ।

 

उसका पहला हिस्सा था कि लतीफ़ को अपने साथ दुर्व्यवहार की कथा को किस प्रकार सुनाना है । लतीफ़ के अनुसार वह मदरसे में अकेला था और नमाज़ अदा कर रहा था कि सीमा सुरक्षा बल के तीन चार सिपाही मदरसे में दाख़िल हुये और कहने लगे कि यहाँ आतंकवादी छिपे हुये हैं , बताओ कहाँ हैं ? लतीफ़ कथा के अनुसार उसके इस आरोप का खंडन करने के बाद सिपाही ग़ुस्से में आ गये और उन्होंने वहाँ रखे क़ुरान शरीफ़ को फाड़ दिया । उसके बाद उसकी पिटाई शुरु कर दी । लतीफ़ के चीख़ने चिल्लाने की आवाज़ सुन कर कुछ लोग आ गये और सीमा सुरक्षा बल के सिपाही वहाँ से चुपचाप चले गये ।

 

लेकिन प्रश्न यह है कि शिविर के बाहर सीमा सुरक्षा बल के साथ तू तू मैं मैं की घटना को लतीफ़ मदरसे तक खींच कर क्यों ले आया ? या फिर जिन लोगों ने पूरी कहानी में लतीफ़ को यह भूमिका दी , उन्होंने घटना तो सीमा सुरक्षा बल के शिविर के बाहर घटित करवाई और बाद में उस कथा को सुनाने के लिये मदरसा क्यों फ़िट कर दिया ? क्योंकि यदि घटना को शिविर तक ही सीमित रखा जाता तो क़ुरान शरीफ़ को फाड़ने की घटना जोड़ना सम्भव नहीं था । तब पूछा जा सकता था कि दुकान बन्द करके जब लतीफ़ मदरसे में रात को चौकीदार की ड्यूटी करने के लिये आ रहा था तो वह हाथ में क़ुरान शरीफ़ लेकर क्यों घूम रहा था ? ऐसी स्थिति में सीमा सुरक्षा बल द्वारा क़ुरान शरीफ़ फाड़ने की घटना विश्वसनीय दिखाई न देती । इसलिये घटनास्थल मदरसे में बदलना ज़रुरी हो गया होगा । यह ठीक है कि लतीफ़ की इस कहानी में भी बहुत कमज़ोर कड़ियाँ हैं । यदि सीमा सुरक्षा बल को सूचना मिलती है कि किसी स्थान पर उग्रवादी छिपे हैं तो उनको पकड़ने के लिये बल के तीन चार सिपाही जाकर दरवाज़े नहीं खटकाते । आतंकवादी कोई बकरी का बच्चा नहीं है ,

 

जिसे पकड़ने के लिये बल के सिपाही रस्सी लेकर जाते हैं और उन्हें पकड़ कर ले जाते हैं । तब सुरक्षा बल बाकायदा घेराबन्दी करते हैं । लेकिन लतीफ़ की मानें तो बल के सिपाही रस्सी लेकर ही आतंकवादियों को ढूँढ रहे थे । इस पर कोई विश्वास नहीं करेगा । यदि आतंकवादियों की तलाश की कहानी अविश्सनीय है तो सीमा सुरक्षा बल के चार सिपाही मदरसे में क्या केवल क़ुरान शरीफ़ फाड़ने के लिये गये ? इस पर कोई विश्वास नहीं करेगा ।  यह कहानी , स्क्रिप्ट लिखने वाले की दिमाग़ी हालत का संकेत ही देती है । परन्तु शायद षड्यंत्र रचने वाले जानते थे कि स्क्रिप्ट लेखक को साहित्य में नाम नहीं कमाना है , बल्कि सीमा सुरक्षा बल के खिलाफ दंगा भड़काना है । उसके लिये क़ुरान शरीफ़ फाड़ने की कथा से असरदार कथा और कोई नहीं हो सकती थी । जैसा षड्यंत्रकारियों ने सोचा वैसा हुआ भी ।
                       

लतीफ़ ने इस पूरे मामले में अपनी भूमिका का एक हिस्सा निभा दिया था । अब दूसरे हिस्से की बारी थी । उसका ख़ुलासा भी लतीफ़ ख़ुद ही करता है । उसने मदरसे में जाकर सबसे पहले संगलदान के स्टेशन हाउस आफीसर एजाज़ अहमद वानी को फ़ोन पर सूचित किया । लतीफ़ का ही कहना है कि उसने तुरन्त गाँवों के लोगों को भी बुला लिया । इतना ही नहीं लतीफ़ के अनुसार उसने गाँव की मस्जिद के इमाम को और क्षेत्र के प्रमुख लोगों को बुला लिया । मदरसे से बी एस एफ के शिविर की दूरी लगभग एक किलोमीटर है और बीच में एक नाला और पुल भी आता है ।


       लतीफ़ के प्रयासों से लगभग तीन चार सौ लोगों की भीड़ मदरसे के बाहर एकत्रित हो गई । तहसीलदार बशीरुल्ल हसन भी वहाँ पहुँच गया । एस पी जावेद मट्टू अपने दफ्तर से निरन्तर तहसीलदार के सम्पर्क में रहा । जब मामला काफी गर्म हो गया तो तहसीलदार ने एस पी से सलाह कर लोगों को कहा कि की धर्म गांव से सीमा सुरक्षा बल का शिविर दूसरे दिन हटा लिया जायेगा और लोगों को वापिस भेज दिया । प्रश्न है कि प्रशासनिक तंत्र का सबसे छोटे स्तर का एक अदना सा अधिकारी तहसीलदार आख़िर सीमा सुरक्षा बल का शिविर हटा लेने की बात किसके कहने पर कर रहा था ? लोग तो क़ुरान शरीफ़ के तथाकथित अपमान को लेकर सीमा सुरक्षा बल के तथाकथित उत्तरदायी अधिकारियों को दंडित करने की मांग कर रहे थे । सीमा सुरक्षा बल का शिविर हटाने का षडयंत्र तो आतंकवादियों का हो सकता था । लेकिन तहसीलदार ने सीमा सुरक्षा बल के शिविर को ही धर्म गाँव से हटा लेने की बात कह कर एक प्रकार से प्रदर्शनकारियों को संकेत दे दिया कि दूसरे दिन वे शिविर हटाने की मांग करें । इस पूरी बातचीत के दौरान तहसीलदार पुलिस अधीक्षक जावेद मट्टू के सम्पर्क में था ।


उधर वानी समूह के लोग भी जानते थे कि कल के प्रदर्शन में शान परिवार के लोग भी ज़रुर हिस्सा लेंगे । क्योंकि राजनैतिक रुप से सरगर्म शान परिवार इस मौक़े पर विरोध प्रदर्शन की अवहेलना कर अपनी राजनैतिक हत्या नहीं कर सकता था । और ठीक ऐसा ही हुआ ।  दूसरे दिन सुबह छह बजे ही लोग फिर घटनास्थल पर एकत्रित हो गये । तहसीलदार और एस पी के साथ वे सीमा सुरक्षा बल के शिविर स्थल पर पहुंचे । दोनों अधिकारी बातचीत करने के लिये अन्दर चले गये । लगभग दो हजार लोगों की भीड ने सीमा सुरक्षा बल के शिविर को घेरा हुआ था । इतने कम समय में इतनी ज्यादा भीड किसी सक्रिय संगठन के बिना एकत्रित नहीं हो सकती । आख़िर किन लोगों ने रातों रात लोगों को धर्म गाँव में लाने की व्यवस्था की ? संगलदान का एस.एच.ओ वानी पूरी तरह तैयार था ।पुलिस अधिकारी वानी कांग्रेस नेता और राज्य के राजस्व राज्य मंत्री एजाज़ अहमद खान के क़रीबी माने जाते हैं । भीड़ उत्तेजित हो रही थी । उसने शिविर पर पथराव शुरु कर दिया । सीमा सुरक्षा बल का वहाँ हथियारों का ज़ख़ीरा था । शान परिवार का प्रो० मंज़ूर अहमद शान लोगों को शान्त करने की कोशिश कर रहा था । मंज़ूर का आम लोगों पर प्रभाव था । वह इस क्षेत्र का भविष्य का नेता हो सकता था । उससे वानियों की सारी योजना चौपट हो जाती । उधर यदि मंज़ूर की कोशिशों से लोग शान्त हो जाते तो अहमद लतीफ़ को मोहरा बना कर बुना गया उग्रवादियों का पूरा षड्यंत्र फ़ेल हो जाता । प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ठीक उसी समय एस एच ओ एजाज़ अहमद वानी ने प्वां़यट बलैंक रेंज से गोली चला कर शान परिवार के कुल दीपक मंज़ूर अहमद शान की हत्या कर दी । गोली चलने पर भीड़ ने यही समझा कि सीमा सुरक्षा बल ने गोली चलाई ।

 

लोगों ने शिविर पर आक्रमण कर दिया । शिविर के हथियारों पर ज़रुर षड्यंत्र करने वालों ने नज़र रखी हुई होगी और वे इसी मौक़े की तलाश कर रहे होंगे । सुरक्षा बल ने भी लोगों को भगाने के लिये गोली चला दी , जिससे तीन लोग मारे गये । पुलिस अधीक्षक जावेद मट्टू का कहना है कि पुलिस ने गोली नहीं चलाई बल्कि सीमा सुरक्षा बल ने ही चलाई । यदि तर्क के लिये मान लिया जाये की जावेद सच बोल रहे हैं तो इसका सीधा अर्थ है कि एस एच ओ वानी ने मौक़े पर उपस्थित पुलिस अधीक्षक की अनुमति के बिना ही मंज़ूर अहमद शान पर गोली चला दी । लेकिन हो सकता है कि मट्टू को वानी के गोली चलाने का पता हो , लेकिन वे जानबूझकर सीमा सुरक्षा बल को बदनाम करने के लिये गलत बयानी कर रहे हों । मट्टू की ओर शक की सूई इसलिये भी जाती है क्योंकि उनका अब तक का पुलिस रिकार्ड दागदार ही रहा है । इससे पहले वे २००९ में शोपियां बलात्कार और हत्या मामले में हत्या के सबूत मिटाने के आरोपों में जेल भी जा चुके हैं । उस समय भी केन्द्रीय पुलिस बलों को बदनाम करने के लिये इन पुलिस अधिकारियों पर असली हत्यारों को बचाने के आरोप लगे थे । रामबन में तैनाती से पहले वे २०१२ में कारगिल में पुलिस अधीक्षक थे ।इन्हीं के कार्यकाल में जंसकार घाटी में २६ बौद्धों को मतान्तरित करके उन्हें मुसलमान बना लिया गया था ,जिसके विरोध में वहां जनान्दोलन हुआ था । तब भी पुलिस पर आरोप लगा था कि वह दोषियों को पकडने की बजाय मुसलमानों की नाजायज मदद कर रही है । मट्टू को रामबन में पुलिस का चार्ज संभाले अभी कुछ दिन ही गुये हैं । लेकिन आते ही उन्होंने केन्द्रीय पुलिस बलों के खिलाफ जनाक्रोश भडकाने के लिये मीडिया तक में कहना शुरु कर दिया कि यदि मेरे साथी मुझे परे न खींच लेते तो मैं भी सीमा सुरक्षा बल की गोली का शिकार हो जाता । इससे आम लोगों को शक हो रहा है कि मट्टू हत्या के आरोपी वानी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं । इसका अर्थ हुआ कि एजाज़ अहमद वानी शान परिवार के मंज़ूर अहमद को मारने के षड्यंत्र में भागीदार रहा होगा और मट्टू भी इसको जानते होंगे ।

 

               एस एच ओ एजाज़ अहमद वानी और उसके साथियों को लगता होगा कि भीड़ में जब गोली चलेगी तो सभी उसके लिये सीमा सुरक्षा बल को ही दोषी ठहरायेंगे । शान परिवार भी अपने बेटे की मृत्यु के लिये सीमा सुरक्षा बल को दोषी मान लेगा । एक बार फिर घाटी में केन्द्रीय सुरक्षा बलों के खिलाफ लोगों को भड़काया जा सकेगा और यह सिद्ध किया जा सकेगा कि केन्द्रीय सुरक्षा बल कश्मीरी मुसलमानों की हत्या कर रही है । षड्यंत्रकारी योजनानुसार घाटी में केन्द्रीय सुरक्षा बलों के खिलाफ जनभावनाओं को भड़काने में तो कामयाब रहे लेकिन शान परिवार अपने बेटे की हत्या में वानियों के षड्यंत्र को समझ गया था । मंजूर अहमद शान के चचेरे भाई और पी डी पी के नेता इम्तियाज़ हुसैन शान के अनुसार उसके भाई की हत्या वानी ने की है ।

लेकिन इसके बावजूद यह मानना पड़ेगा कि आतंकी षड्यंत्रकारी अपने कुछ उद्देश्यों में कामयाब हो गये ।
१. धर्म गाँव में केन्द्रीय सरकार ने सीमा सुरक्षा बल का शिविर हटाने का निर्णय किया ।
२. रामबन के हिन्दु ज़िलाधीश श्याम मीणा को हटा दिया गया और उनकी जगह मोहम्मद हुसैन मलिक को ज़िलाधीश बना दिया गया ।
३. आतंकवादी इस घटना की आड़ में घाटी में मुसलमानों को केन्द्रीय सुरक्षा बलों के खिलाफ भड़काने में कामयाब रहे । लेकिन इसको इस घटना से निरपेक्ष रुप से भी देखा जा सकता है । क्योंकि फ़िलहाल घाटी में स्थिति यह है कि जब आतंकवादी चाहें वे किसी भी बहाने एक  दो दिन के लिये घाटी के गिने चुने हिस्सों में बंद करवा सकते हैं ।
                       

षड्यंत्रकारी अपनी योजना के दूसरे हिस्से में असफल हुये हैं यह तब और भी अच्छी तरह स्पष्ट हो गया जब  रामबन के नये जिलाधीश मोहम्मद हुसैन मलिक ने शान्ति स्थापना के लिये क्षेत्र के लोगों की बैठक बुलाई तो वहाँ लोगों ने स्पष्ट कह दिया कि वे इस बात को मानने के लिये तैयार नहीं हैं कि सीमा सुरक्षा बल की गोलीबारी से मंज़ूर अहमद शान की मौत हुई । लोग पुलिस अधीक्षक की इस बात से भी सहमत नहीं थे कि पुलिस ने गोली नहीं चलाई । पुलिस अधीक्षक यह भी चिल्लाते रहे कि सीमा सुरक्षा बल ने अचानक गोली चलाई कि वे ख़ुद भी मरते मरते बचे । लेकिन लोग इन गप्पों पर विश्वास करने के लिये तैयार नहीं थे और स्पष्ट मांग कर रहे थे कि राज्य पुलिस ने पहले गोली चलाई और इसके लिये एस एच ओ एजाज़ अहमद वानी को गिरफ़्तार किया जाये । राजस्व राज्य मंत्री के समर्थक शोर मचाते हुये वानी के समर्थन में बैठक का बहिष्कार करते हुये भी निकल गये , लेकिन तब भी रामबन के लोग पुलिस के षड्यंत्र को बेनक़ाब करते हुये वानी को गिरफ़्तार करने की मांग करते रहे । लोगों कहना है कि  पुलिस अधिकारी ऐआज अहमद वानी दरअसल लम्बे समय से मंज़ूर अहमद शान से बदला लेना चाहता था । उसने ठीक मौक़ा देख कर उसे ठिकाने लगा दिया ।


लेकिन एक और प्रश्न इस पूरे षड्यंत्र में अनुत्तरित है । इस पूरे कांड में प्रदेश में मिल कर सरकार चला रही नैशनल कांग्रेस और सोनिया कांग्रेस की भूमिका क्या है ? आतंकवादी संगठनों का हित प्रदेश के लोगों को केन्द्रीय सुरक्षा बलों के खिलाफ भड़काना है ताकि पाकिस्तान की हित साधना हो । राज्य सरकार और केन्द्र सरकार ने इस पूरे कांड की जांच के अलग अलग आदेश दिये हैं । लेकिन उमर अब्दुल्ला ने न तो उस जाँच रपट के आने की चिन्ता की जो उन्होंने इस कांड की जाँच के लिये स्वयं स्थापित की थी और न ही उस जाँच की रपट आने की प्रतीक्षा की जो केन्द्रीय सरकार ने स्थापित की है । इन दोनों जाँच रपटों के आने से पहले ही उमर अब्दुल्ला ने आनन फ़ानन में अपने मंत्रिमंडल की बैठक बुला कर केन्द्रीय सुरक्षा बलों की निन्दा का कड़ा प्रस्ताव पारित किया । उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लगता है केन्द्र ने २००८ और २०१० की घटनाओं से भी कुछ नहीं सीखा । हम यह सहन नहीं करेंगे कि केन्द्रीय सुरक्षा बल निहत्थे प्रजर्शनकारियों पर गोली चलायें । लेकिन लगता है कि उमर ने २००८ और २०१० की घटनाओं से सबक सीख लिया है और पैसा लेकर सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंकने वाले लगभग नौ सौ नौजवानों को राज्य पुलिस में ही भर्ती कर लिया है ।बाकी उन्होंने सुधरे हुये आतंकवादी और बिगडैल आआतंकवादी की पहचान की कला भी सीख ली है

 

इसलिये अब वे तथाकथित सुधरे आतंकवादियों को सरकारी खर्चे पर बसा रहे हैं । यह शायद पहला अवसर है जब किसी राज्य सरकार के मंत्रिमंडल  ने केन्द्र के खिलाफ बाकायदा प्रस्ताव पारित किया हो । इस प्रस्ताव के पारित होने से उत्साहित होकर पाकिस्तान ने कश्मीर में केन्द्रीय बलों द्वारा संहार हो रहा है , ऐसे बयान जारी किये । उमर अब्दुल्ला अपने दादा के वक़्त की परम्परा से इतना तो सीख ही गये हैं कि जम्मू कश्मीर में सत्ता पर काबिज रहने के लिये , चाहे घाटी में बादल भी फटे , उसके लिये भी केन्द्रीय सुरक्षा बलों और सेना को उत्तरदायी ठहराना है । उससे दोनों काम आसान हो जाते हैं । केन्द्र सरकार नैशनल कान्फ्रेंस से डरी रहती है और इधर राज्य में सत्ता बनी रहती है । नैशनल कान्फ्रेंस यही व्यवहार रामबन कांड के सिलसिले में कर रही है ।

              नैशनल कान्फ्रेंस का यह व्यवहार फिर भी समझा जा सकता है , क्योंकि कुछ दिन पहले ही जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जम्मू कश्मीर में आये थे , तब उमर अब्दुल्ला ने उनकी हाज़िरी में ही स्पष्ट कर दिया कि कश्मीर घाटी में नौजवान केन्द्र से कोई आर्थिक पैकेज पाने के लिये बन्दूक़ नहीं उठा रहे , बल्कि उनके सवाल बड़े हैं । इन बड़े सवालों में उमर पाकिस्तान को भी शामिल करना चाहते हैं । आने वाले चुनावों में कश्मीर घाटी में उमर की नैशनल कान्फ्रेंस का मुक़ाबला मुफ़्ती मोहम्मद सैयद की पी डी पी से होने वाला है । शायद इसीलिये वे बन्दूक़ उठाने वाले नौजवानों के बड़े सवालों से अपने आप को जोड़ रहे हैं और उसमें पाकिस्तान को भी शामिल करना चाहते हैं । जम्मू कश्मीर में बड़े सवालों से जुड़ने की पहली शर्त यही है कि केन्द्रीय सुरक्षा बलों और सेना को खलनायक के तौर पर पेश किया जाये । वही उमर अब्दुल्ला कर रहे हैं ।


                    लेकिन सोनिया कांग्रेस का व्यवहार इस पूरे कांड में समझ से परे है । केन्द्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिन्दे के बयानों से लगता है कि वे भी सीमा सुरक्षा बल को राज्य में खलनायक ही मानते हैं । जब रामबन के लोग गोली कांड के लिये राज्य पुलिस को उत्तरदायी मान कर , वानी की गिरफ्तारी की मांग कर इस पूरे षडयंत्र को असफल बनाने में लगे हैं , उस समय शिन्दे धर्म गांव से सीमा सुरक्षा बल का शिविर हटा कर ,आतंकवादियों  के षड्यंत्र को कामयाब कर रहे हैं । राज्य मंत्रिमंडल की हिस्सेदारी में सोनिया कांग्रेस भी है और वही मंत्रिमंडल केन्द्रीय सुरक्षा बलों को खलनायक बताता हुआ प्रस्ताव पारित कर रहा है । सोनिया कांग्रेस इतना तो जानती है कि ऐसे खेल खेल कर नैशनल कान्फ्रेंस और पी डी पी तो वोटें हासिल कर सकती हैं , लेकिन कांग्रेस के हाथ इससे कुछ लगने वाला नहीं है । अलबत्ता जम्मू में उसे नुक़सान ज़रुर हो सकता है । फिर आख़िर सोनिया कांग्रेस राज्य में यह ख़तरनाक खेल किसके इशारे पर खेल रही है और उसका उद्देश्य क्या है ? जब किसी दिन देश में आतंकवाद के रहस्यों की गहराई से जाँच होगी तो ऐसे अनेक रहस्य खुलेंगे । लेकिन फ़िलहाल रामबन कांड में पांच प्रश्नों की जाँच करना ज़रुरी है ।


१ क़ुरान शरीफ़ के अपमान के तथाकथित आरोप के नाम पर लोगों को भड़काने वाला मोहम्मद अब्दुल लतीफ़ कौन है और उसके पीछे किन लोगों का हाथ है ।
२ लतीफ़ ने सीमा सुरक्षा बलों के जवानों से तू तू मैं मैं करने से पहले और उसके तुरन्त बाद किन किन लोगों से सम्पर्क किया ?
३ वीरवार , १८ जुलाई को प्रात: चार बजे से लेकर सात बजे तक कौन लोग थे जो इस पूरे क्षेत्र में भीड़ को लाने की व्यवस्था में जुटे थे ?
४ पुलिस अधीक्षक जावेद मट्टू का इस कांड से कुछ दिन पहले ही कारगिल से रामबन में तबादला किस के कहने पर किया गया ?
५ संगलदान के स्टेशन हाउस आफीसर एजाज़ अहमद वानी ने बुधवार रात्रि ग्यारह बजे से लेकर वीरवार सुबह नौ बजे तक किन किन से बातचीत की ?

 

 रामबन कांड के षड्यंत्र की तह तक जाने के लिये इन प्रश्नों के उत्तर खोजना ज़रुरी है , लेकिन रामबन के लोगों को डर है कि सरकारी जाँच इसी बात पर ख़त्म हो जायेगी कि सीमा सुरक्षा बल ने गोली क्यों चलाई । अलबत्ता लाशों पर राजनीति की रोटियाँ सेंकने का काम शुरु हो गया है । वह ज़रुर देर तक चलता रहेगा ।

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