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जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला   देश की सुरक्षा की दृष्टी से बनी कंपनी मेटल मेटल कॉरपोरेशन ऑफ  इण्डिया (हिदुस्तान जिंक) के विनिवेश के मामले में सीबीआई कार्यालय जोधप... Read more
सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो   चित्तौडग़ढ़। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पेंशन योजनाओं में जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है या नहीं यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर ... Read more
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक गुजरात में ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्य करते हुए, साथ में सहसंयोजक श्री गनी कुरैशी जी भी है। Read more
 ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें? ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें?     मनमोहन सिंह क्यों मौन रहे चीन के सामनें?   पिछले दिनों हमारें प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने डरबन में ब्रिक्स शिखर... Read more
सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं  लद्दाख में चीन की जन मुक्ति सेना की घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र के बीस किलोमीटर ( पहले सूचना यह थी कि दस किलोमीटर के अन्दर) अन्दर आकर अपनी चौकिय... Read more
अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी   4 से 7 अप्रैल तक उज्जैन की कालिदास वीथिका में उज्जैनवासी देख सकेंगे माता-पिता, बुज़ुर्गों पर केन्द्रित मार्मिक कविता पोस्टर प्... Read more
एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप... Read more
 नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें   वर्तमान में चल रहे लोकसभा चुनाव पिछले सभी आम चुनावों से कई दृष्टियों से भिन्न भी हैं Read more
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ओडीशा में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की साज़िश भारत सरकार का एक अल्पसंख्यक आयोग है । भारत सरकार का मानना है कि इस देश में अल्पसंख्यक सदा ख़तरे से घिरे रहते हैं । इस देश के लोग अल्पसंख्यकों को नष... Read more
जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जून और जुलाई का महीना भारत के राष्ट्रवादी आन्दोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । २३ जून १९५३ को डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर की ज... Read more
 रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान का पवित्र महीना शुरु हो गया है । यह महीना हिजरी सम्वत का नौवाँ मास है और ईस्वी सम्वत के हिसाब से नौ जुलाई को शुरु हुआ है । इस महीने में मुसल... Read more
भारतीय भाषाओं का मोर्चा:गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा १०५ और १०७ के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले २२५ दिनों से स... Read more
खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले मुंबई। आठ वर्षों से रोजी रोटी के संकट से झुझ रही बार बालाओं के 'डांस बारÓ को लेकर उच्चन्यायालय के फैसले ने बार बालाओं की चमक लौटा दी ... Read more
पिता के बाद पुत्र का कारनामा पिता के बाद पुत्र का कारनामा पीडि़त महिला फरियाद लेकर पहुंची पुलिस की शरण में इंदौर। आसाराम के बाद अब उनका लड़का नारायण सांई के खिलाफ भी एक परिवाद पेश किया जा रहा है। यह पर... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ जिसने सहयोग किया उसी की पीठ पर छूरा घोपा संजय ने नकली बाबा के कारनामों से लोगों में भारी रोष औंकारेश्वर। मां नर्मदा बने एक आश्रम में बने चौ... Read more
आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी राधेश्याम सोलंकी,भरत ठाकुर, जयंत जोशी,अशोक पाटीदार,हेमंत चतुर्वेदी,मनीष जैन कर रहे हैं एसटीएफ को  गुमराह भोपाल। ईवमिरेकल ज्वेलर्स कंपनी... Read more
क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास  क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास जगदीश जोशी 'प्रचंड  ' नई दिल्ली। काला धन स्वीस बैंक में जमा होने व नेताओं को घेरने की बात पर आंदोलन खड़ा कर 'आप ' के सर्वेसर... Read more
दो लाख करोड़ का खनन घोटाला दो लाख करोड़ का खनन घोटाला देवास जिले में रेत माफिया का राज भोपाल। शिवराज के राज में माइनिंग माफिया ने बेल्लारी की लूट के रिकार्ड भी तोड़ दिए हैं। बीते 10 साल में मप्र... Read more
कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में भोपाल। इस बार के चुनाव में मध्यप्रदेश पर कांग्रेस आलाकमान की विशेष निगाह है Read more
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। Read more
जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा   पीडि़त सुरतानसिंह राजेस पयासी (वकील) यदि ऐसा मा... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 करोड़ों की जमीन से आया रुपया ब्याजखोरी में लगाया औंकारेश्वर। लाखों रुपया एठने वाले औंकारेश्वर के कथित Read more
देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल ठगौरों का महानगर बनते जा रहे इंदौर में प्रशासन कोई खास कार्यवाही नहीं कर पाया अलबत्ता Read more
देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर आखिर यह भरत ठाकुर,बाबूलाल जयंत,मनीष कौन है? राधेश्याम सोलंकी,         Read more
मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... उत्कृष्ट को सजा और... निकृष्ट को  आशीर्वाद की छाया   -सेवानिवृत को भी बना  दिया संकुल प्रभारी  ... Read more
हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी अमिताभ,मुलायमसिंह और सोनिया के पास है क़्वींटल सोना! आप पार्टी के सर्वे सर्वा अरविन्द केजरीवाल व योग गुरु बाबा रामदेव पर अपनी-अपनी दुकान चमकाने... Read more
सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार निर्धारित किराए से अधिक वसूली होती है निजी बसों में (रतलाम कार्यालय) रतलाम । एक दशक पहले प्रदेश में सड़क परिवहन निगम की बसें बंद होने के बाद ... Read more
सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना राधेश्याम सोलंकी, भरत, जयंत जोशी  मनीष जैन एसटीएफ के निशाने पर..   जगदीश जोशी 'प्रचंड ' भोपाल। आम आदमी को फटाफट अम... Read more
मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत युवक से अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर ले रहा था पांच हजार की रिश्वत, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त भी संदेह के घेरे ... Read more
कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार  कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार बड़े नेताओं का अभाव दूसरा पंक्ति में नेताओं की कतार रतलाम से अनिल पांचाल विधानसभा चुनाव सिर पर है... Read more
पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण जम्मू कश्मीर में पुँछ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच और छह अगस्त की मध्य रात्रि को नियंत्रण रेखा के भीतर गश्त लगा रही भारतीय सैनिक टुकड़ी पर... Read more
कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश रतलाम से अनिल कुमार रतलाम। हाल ही में जनता को लम्बे समय के बाद दर्शन देकर लौटे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लगभग शहर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बि... Read more
आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी 67 वां स्वाधीनता दिवस स्वतंत्रता दिवस की क्रमवार गिनती में एक और वर्ष का इजाफा,सबकुछ भुलकर जश्न मनाने का एक और भारतीय दिन...लेकिन क्या सही म... Read more
तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन कभी समाप्त नहीं हुआ। कभी प्रत्यक्ष और कभी प्रच्छन्न उसकी तपश बीजिंग तक पहुंचती ही रही। 2009 में स्वतंत्रता के लिए सं... Read more
तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली स्थित दीन दयाल शोंध संस्थान में आयोजित हुई जिसमें 19 प्रांतों क... Read more
तिब्बतःएक अवलोकन तिब्बतःएक अवलोकन क्षेत्रफल : २५ लाख वर्ग कि० मी० जो वर्तमान चीन के कुल क्षेत्रफल का २६.०४ प्रतिशत हैं। राजधानी : ल्हासा जनसंख्या : ६० ला... Read more
आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं    'आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं' भोपाल। आरएसएस अथवा किसी ऐसे दलको अयोध्या में भगवान राम का... Read more
चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव नई दिल्ली । आगामी लोकसभा चुनाव में सत्त्ता सुख भोगने का सपना सजाए बैठी भाजपा की राह में रोडे अटकाने वालों की कमी नहीं है। भाजपा का अंतरकलह पार... Read more
पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब वर्तमान में पत्रकारिता हाशिये पर है और मीडिया शब्द चलन में है.पत्रकारिता के गूढ़ अर्थ और मीडिया की व्यापकता को रेखांकित करता मध्यप्रदेश क... Read more
राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में देखने, सुनने और बतियाने के बाद किसी भी एंगल से वे राजनेता नहीं लगते। कपाल पर बड़ा सा सिंदूरी टीका, सिर और दाड़ी के रंगे हुए सुनहरी काले गहरे ब... Read more
कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना धार :बगैरअनुमति कालोनी विकास करने वालों कालोनाईजरों पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की गाज लगातार गिर रही है। इसी कड़ी में धार शहर में बगैर विक... Read more
जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! नई दिल्ली: धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देना आज के समय में काफी आसान है, क्योंकि हम देशवासी दिमाग से नहीं बल्कि दिल से धर्म को जोड़कर रखते है... Read more
ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है   इंदौर।मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया प्रदेष कांग्रेस में जान फंकने में लगे है लेकिन प्रदेष के कई पदाधिकारियों... Read more
अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसलाएत पंचमी के दिन धार जिले की भोजशाला में हंगामे और उपद्रव के बीच पूजा के साथ नमाज अता फरमाने की रस्म पूरी हो जाने पर म... Read more
बोले तो आसाराम बोले तो आसाराम 90 के दशक में धर्मप्रेमी जनता के लिए आशा की किरण बन कर उभरे आसाराम बापू एक दशक बाद ही बदनामी के दाग अपनी आभा पर लगवा चुके हैं। आश्रम में बच्चो... Read more
बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज मंदसौर।(धर्मवीर रत्नावत) जिस तरह देश में मंदसौर अफीम उत्पादन, तस्करी के लिए मशहूर है, उसी तरह नीमच, मंदसौर, रतलाम के कुछ खास इलाके भी बाछ... Read more

अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा १०५ और १०७ के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले २२५ दिनों से सोनिया गान्धी के दिल्ली स्थित भारतीय घर के आगे धरना दे रहे थे ।पाठक की मांग है कि उच्चतम न्यायालय समेत देश के सभी उच्च न्यायालयों में भारतीय भाषाओं में भी बहस करने की अनुमति दी जाये । फ़िलहाल कुछ उच्च न्यायालयों को छोड़कर शेष सभी में अंग्रेज़ी में ही बोलने की अनुमति है और इस नियम का सख़्ती से पालन किया जाता है ।

              

श्याम रुद्र पाठक के मौजूदा अभियान के बारे में बातचीत करने से पहले उनके बारे में कुछ जान लेना ज़रुरी है । पाठक १९८० में दिल्ली आई.आई.टी के छात्र थे । प्रवेश परीक्षा में उन्होंने अव्वल दर्जा हासिल किया था । एम.टेक की पढ़ाई ठीक ठाक चल रही थी कि अन्तिम वर्ष में अडंगा लग गया । पाठक ने अपने प्रकल्प की रपट हिन्दी में लिख कर जमा करवा दी । शायद तब चेतन भगत के उपन्यास पर थ्री इडियट्स फ़िल्म नहीं बनी थी । संस्थान ने पाठक को डिग्री देने से इंकार कर दिया । मामला संसद तक पहुँचा , तब जाकर पाठक को डिग्री मिली । उन्होंने रपट को अंग्रेज़ी में लिखने से इंकार कर दिया , लेकिन इसके साथ ही अन्याय से लड़ने के लिये उन्होंने सांसारिक एषणाओं से भी मुक्ति  प्राप्त कर ली । १९८५ में उन्होंने मोर्चा जमा दिया कि आई .आई.टी प्रवेश परीक्षा भारतीय भाषाओं में भी होनी चाहिये । यह मोर्चा लम्बा चला । १९९० में जाकर भारत सरकार भारतीय भाषाओं के पक्ष में झुकी और पाठक की जीत हुई ।


                          अबकी बार पाठक जी का मोर्चा न्याय की भाषा बदलवाने के लिये है । अपने देश में बडी कचहरी की भाषा अंग्रेज़ी निश्चित की गई है । पाठक चाहते हैं कि यहाँ का न्याय भी भारतीय भाषाओं में बोले । संविधान बनाने वालों को भी इसका अंदेशा रहा होगा कि भविष्य में लोग न्याय को भारतीय भाषा में बोलने के लिये विवश कर सकते हैं , इसलिये उन्होंने भी पक्की व्यवस्था संविधान में ही कर दी कि उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय की भाषा अंग्रेज़ी , केवल अंग्रेज़ी ही रहेगी । अपने देश में नागिरक को न्याय की रक्षा करते हुये फांसी प्राप्त करने का अधिकार है , लेकिन फांसी पर लटकने से पहले अपनी भाषा में यह जानने का अधिकार नहीं है , कि उसे फांसी किस लिये दी जा रही है । न्याय अंधा होता है , यह तो विश्व प्रसिद्ध है , लेकिन भारत में न्याय गूंगा भी है , क्योंकि वह इस देश की भाषा में नहीं बोलता । राम मनोहर लोहिया के शब्दों में कहना हो तो वह जादूगर की भाषा में बोलता है ।

 

जादूगर की भाषा दर्शकों के मन में आतंक तो पैदा कर सकती है , लेकिन समझ पैदा नहीं कर सकती । अंग्रेज़ों को तो , इस देश के लोगों के मन में न्यायिक आतंक पैदा करने की ज़रुरत थी , लेकिन लोक मत से चुनी सरकार न्याय के नाम से आतंक क्यों पैदा करना चाहती है , यह किसी की समझ से भी परे है । कई साल पुरानी एक घटना ध्यान में आ रही है ।मैंने नई नई वकालत शुरु की थी । धारा १०७/१५१ में पुलिस ने एक जाट को गिरफ़्तार किया था । गाँव में जब दो फरीकों में कोई मामूली सा झगड़ा भी होता है , तो आम तौर पर पुलिस लोगों को इसी धारा में पकड़ती है । इसमें पुलिस को भी सुविधा रहती है , क्योंकि अभियुक्त को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की कचहरी में ही पेश करना होता है । इस केस में जमानत लगभग निश्चित होती है और केस की उम्र ही छह महीने होती है ।वकील को भी इस प्रकार के मुकद्दमों में ज्यादा बोलने की जरुरत नहीं होती , केवल जमानत के कागज ही भरने होते हैं । मैं जब एस.डी.एम के कार्यालय में जाने लगा तो एक वरिष्ठ वकील ने मुझे इशारे से बुलाया और पूछा कि इस केस में कितनी फीस ली है ? मैंने बता दिया ।

 

तब उसने अपने अनुभव के आधार पर सलाह दी । उसने कहा , अन्दर जाकर पंजाबी में बोलना शुरु न कर देना । चार पांच मिनट कुछ न कुछ अंग्रेजी में जरुर बोलते रहना ।मैंने कहा , बाऊ जी (पंजाब में कचहरी में वक़ील को बाऊ जी कहा जाता है) १०७/१५१ के केस में भला बोलना ही क्या होता है । वही चार बातें होती हैं , पंजाबी में भी कह दूँगा तो क्या फ़र्क़ पड़ेगा ? उन्होंने कहा कि तुम्हें तो नहीं पड़ेगा , पर जाटों को पड़ जायेगा । उनको पता चल जायेगा कि इन मुक़द्दमों में केस के बारे में वे चार बातें तो वे स्वयं ही पंजाबी में कह सकते हैं । फिर हमें कोई फीस क्यों देगा ? इसलिये कुछ न कुछ अंग्रेजी में बोलना बहुत जरुरी है ताकि सायल को आतंकित कर उससे मोटे पैसे बसूले जा सकें ।

 

मुझे तुरन्त अंग्रेजी का महत्व समझ में आ गया । अंग्रेजी कचहरी में सायल को डराने के काम आती है । उससे कानून और न्याय का रौब बरकरार रहता है ।मैंने अपने सायल से फ़ीस के पाँच सौ रुपये लिये थे , जो उन दिनों के हिसाब से भी और केस की धाराओं के हिसाब से भी ज़्यादा थे । अब इस फ़ीस का औचित्य सिद्ध करने के लिये मुझे कुछ न कुछ ऊटपटांग अंग्रेज़ी में बोलना ही था । न्याय और सायल के बीच में से यदि अंग्रेज़ी का पर्दा हट गया तो न जाने किन किन का मायावी संसार मिट्टी में मिल जायेगा ।
             

  अब पाठक जी उसी पर्दे को हटाने की जिद पकड कर बैठ गये हैं । लेकिन पाठक की एक दिक़्क़त है ।वे सीधे न्यायपालिका से बात नहीं कर सकते । क्योंकि उनका संकल्प है कि वे भारत की भाषा में बात करेंगे , जिसका इन्दराज संविधान की आठवीं सूची में दर्ज है और उधर न्यायपालिका भी अपने सम्मान को बचाने के लिये पूरी तरह मोर्चाबन्दी किये हुये है । उसका सम्मान अंग्रेज़ी से ही होता है । भारतीय भाषाओं का छींटा भी पड़ जाने से वह सम्मान उसी प्रकार फट जाता है जिस प्रकार दूध में दही का छींटा पड़ जाने से वह फट जाता है ।न्यायपालिका ने अपने सम्मान और रुआब की ख़ातिर सारे देश को गूँगा बना दिया है । न्याय मंदिर में जाते ही देश के आम नागरिक के मुँह पर ताला लग जाता है । भारतीय भाषाओं को सुनने से न्याय मंदिर की पवित्रता नष्ट होती है । लेकिन पाठक ज़िद्दी ठहरे । जिस तरह कभी महात्मा गान्धी ने दलितों के मंदिर प्रवेश के लिये आन्दोलन चलाया था उसी तरह पाठक भारत माता के न्याय मंदिर में भारतीय भाषाओं के प्रवेश के लिये हठ कर रहे हैं ।


 तर्क दूसरे पक्ष का भी मज़बूत है । कम्पनी बहादुर और बाद में अंग्रेज़ बहादुर तो विवशता में इस देश को छोड़ कर चले गये । अब इस देश में जो उनके वारिस हैं , उनके पास उन पूर्वजों की कितनी चीज़ें बची हैं ? हमने तो लार्ड माऊंटबेटन को भी देश में संभाल कर रखने की कोशिश की थी । उन्हीं को अपना गवर्नर जनरल भी बना लिया था ।लेकिन कितने दिन रख पाये ? दिल पर पत्थर रख कर लंदन भेजना पड़ा । फिर नागार्जुन बाबा के शब्दों में हमने आज़ाद भारत में भी इंग्लैंड की महारानी की पालकी ढोई , क्योंकि नागार्जुन के ही शब्दों में,'आज्ञा भई जवाहर लाल की' । लेकिन वह भी कितनी बार ढो पाते ? अब ले देकर उनकी याद , यह  एक न्याय व्यवस्था बची है । क्या इसको भी गँवा दें ? इतने कृतघन तो हम नहीं हैं । इस न्याय व्यवस्था की भारत में रहने की एक ही शर्त है कि यह अंग्रेज़ी में बोलती है , अंग्रेज़ी में ही सुनती है और अंग्रेज़ी में फाँसी पर लटकाने का आदेश देती है । इस व्यवस्था के आगे पूरा राष्ट्र गूँगा हो जाता है । लेकिन उससे क्या ? इस देश का गूँगा रहना ही ठीक है । लोकमान्य तिलक , महात्मा गान्धी , डा० हेडगेवार ने इसे अपनी भाषा में बोलने का साहस बँधा दिया था तो इसने अंग्रेज़ बहादुर को ही सात समुद्र पार पहुँचा दिया । इस लिये इस का चुप रहना ही हितकर है । जब यह बोलता है तो सिंहासन हिल जाता है । सत्ताधीश धूल चाटते हैं । इस लिये इस देश को अंग्रेज़ी के भाषायी आतंक से डरा कर चुप रखना ही शासक वर्ग के हित में है । शायद इसीलिये पूरा शासक वर्ग रुद्र के खिलाफ मोर्चा लगा कर बैठा है । देश के आम आदमी को उसकी औक़ात में रखना ही श्रेयस्कर है । आज न्याय व्यवस्था को भारतीय भाषाएँ बोलने के लिये कह रहा है , कल आभिजात्य शासक वर्ग को भी भारतीय भाषा लिखने बोलने को कह सकता है । इस लिये पूरा तंत्र पाठक को पहले मोर्चे पर ही शिकस्त देने के लिये आमादा है ।

 

पाठक चार नबम्वर २०१२ से सत्याग्रह पर बैठे हैं । राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक सभी को चिट्ठी लिख चुके हैं । लेकिन ज़रुर चिट्ठी हिन्दी में लिखते होंगे और वहाँ मोर्चा हिज मैजस्टीज गवर्नमैंट ने संभाला हुआ है । थू ! वर्नक्यूलर में चिट्ठी ? इसे तो छूने से भी सरकार की शान को बट्टा लगता है । अपने प्रधानमंत्री तो आक्सफोर्ड/कैम्ब्रिज तक जाकर गोरे महाप्रभुओं का धन्यवाद करके आयें हैं कि उन्होंने भारत को बहुत कुछ दिया है । अज्ञान के तम से निकाल कर ज्ञान की ज्योति में पहुँचा दिया है । जो उन गोरे शासकों ने दिया है , उनमें से सबसे बड़ी सौग़ात तो अंग्रेज़ी ही है । अब उसको कैसे छोड़ दें ? पुराने मालिकों का छोड़ा हुआ अंग्रेजी ओवरकोट भरी गर्मी में भी पहन कर पूरा शासक वर्ग अपनी पीठ थपथपा रहा है । लेकिन इसके बावजूद श्याम रुद्र पाठक ने भारतीय भाषाओं का अपना मोर्चा संभालने से पहले सोनिया गान्धी के सिपाहसलारों से बाकायदा बातचीत की । आस्कर फ़र्नांडीस से पांच दौर की बातचीत गुई । उन्होंने सारी बात सुन कर और जितनी उनको समझ में आई ,उतनी समझ कर  उसके अनुसार अपनी रपट सोनिया गान्धी को दी । फिर उन्होंने उस समय के विधि मंत्री सलमान खुर्शीद को अपनी रपट दी । आख़िर मामला न्याय व्यवस्था से जुड़ा था , इसलिये सलमान खुर्शीद के पास जाना ज़रुरी था । लेकिन जैसा कि रहीम जी ने कहा है--
                     कर लै, सूंघी , सराही कै , सभी रह गयौ मौन
                       रे गंधी , मति अंध तू , गँवई गाहक कौन ?


लेकिन यहाँ बस एक ही अन्तर है । पाठक गाँव के लोगों की भाषा की लडाई लड रहे हैं । इस लिये वहाँ तो भारतीय भाषाएं बोलने वाले करोंडों नागरिक इस लड़ाई के साथ है , लेकिन जहां सत्ता सिमटी हुई है , वहाँ सभी मौन हैं । वहाँ श्याम रुद्र पाठक के प्रयास की प्रशंसा और सराहना तो सभी ने की , लेकिन उस के बाद मौन हो गये ।न सोनिया गान्धी कुछ बोलीं , न आस्कर फ़र्नांडीस और न ही सलमान खुर्शीद । सभी मौन हैं । वे भी जो भारतीय भाषाओं के नाम पर राजनीति करते हैं । किसी को नहीं  लगा कि भारतीय भाषाओं की यह लड़ाई भारत की अस्मिता और पहचान की लड़ाई है । इसमें हरावल दस्ता बनकर मातृभाषा का रिन उतारना चाहिये । इस सन्नाटे में ही अंत में ठीक मौक़ा देख कर शासक वर्ग ने पाठक को तिहाड़ में पहुँचा दिया । भारतीय भाषाओं का स्थान इस देश में जेल ही हो सकता है । वहीं पाठक बैठे हैं । बाहर अंग्रेज़ी का मज़बूत सुरक्षा दस्ता पहरा दे रहा है । भारत सरकार ने देश में भाषायी आतंक फैलाने वाली अंग्रेज़ी को जैड सिक्योरिटी प्रदान की हुई है । यह ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार सरकार जम्मू कश्मीर में अलगाव का झंडा उठाये आतंकवादियों को जैड सिक्योरिटी प्रदान करती है । सरकार की नीति का प्रश्न है । आतंकवाद के सुरक्षा देने में वह भेदभाव नहीं करता । फिर आतंक चाहे अंग्रेज़ी का हो या लश्कर-ए-तैयबा का ।


लेकिन एक प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है । श्याम रुद्र पाठक या यों करिये कि भारतीय भाषाओं ने अपने अधिकार की मांग के लिये सोनिया गान्धी के भारतीय घर के आगे ही धरना क्यों दिया ? दूसरे हिस्से का उत्तर तो आसान है । कोई भी दे सकता है । सोनिया गान्धी का इटली वाला घर बहुत दूर है । वहाँ जाने के लिये भारतीयों को वीज़ा लेना पड़ता है । इसलिये वहाँ जाकर सत्याग्रह करना संभव नहीं था । इसी कारण से उनके भारत के घर का चयन किया गया होगा । लेकिन सोनिया गान्धी के घर के आगे ही क्यों ? हो सकता हो कि भारतीय भाषाओं के समर्थकों को लगता हो कि गोरी नस्ल के पुराने हाकिमों की विरासत असल में अभी भी भारत में गोरी नस्ल ने ही हिफाज़त से सम्भाली हुई है । अपने घरेलू लोग तो उस समय भी दरबारियों की भूमिका में ही थे और आज लगभग सात दशक बाद भी उसी भूमिका में सिर पर मोर पंख लगाये खीसें निपोर रहे हैं । लेकिन आम आदमी तो इतने साल में जान ही गया है कि भारत की नई हर मैजिस्टी का निवास कहाँ है । तो एक बार फिर लड़ाई वहीं से क्यों न शुरु की जाये । देखना है कि अंग्रेज़ी द्वारा गूँगा बना दिया राष्ट्र क्या एक बार फिर बोलना शुरु करेगा ।

 

इतिहास गवाह है जब लोग अपनी भाषा में बोलना शुरु कर देते हैं तो हिज मैजिस्टी हो या हर मैजिस्टी , सभी के तम्बू एक झटके से उखड़ जाते हैं । लेकिन फ़िलहाल तो श्याम रुद्र पाठक जेल में है और आचार्य रघुवीर व राम मनोहर लोहिया की विरासत को संभालने का दावा करने वाले मौन हैं ।लेकिन पाठक तिहाड में भी मुखर हैं ।उनका कहना है कि अंग्रेजी हमारे ऊपर शासन करने वाले विदेशियों की भाषा है। अभिजात्य वर्ग की इस भाषा को खत्म करने के लिए उनका सत्याग्रह चलता रहेगा । यह सत्याग्रह केवल पाठक का नहीं है , बल्कि भारतीय अस्मिता व पहचान का है । पाठक तो इसके माध्यम बने हैं ।

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