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जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला   देश की सुरक्षा की दृष्टी से बनी कंपनी मेटल मेटल कॉरपोरेशन ऑफ  इण्डिया (हिदुस्तान जिंक) के विनिवेश के मामले में सीबीआई कार्यालय जोधप... Read more
सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो   चित्तौडग़ढ़। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पेंशन योजनाओं में जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है या नहीं यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर ... Read more
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक गुजरात में ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्य करते हुए, साथ में सहसंयोजक श्री गनी कुरैशी जी भी है। Read more
 ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें? ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें?     मनमोहन सिंह क्यों मौन रहे चीन के सामनें?   पिछले दिनों हमारें प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने डरबन में ब्रिक्स शिखर... Read more
सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं  लद्दाख में चीन की जन मुक्ति सेना की घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र के बीस किलोमीटर ( पहले सूचना यह थी कि दस किलोमीटर के अन्दर) अन्दर आकर अपनी चौकिय... Read more
अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी   4 से 7 अप्रैल तक उज्जैन की कालिदास वीथिका में उज्जैनवासी देख सकेंगे माता-पिता, बुज़ुर्गों पर केन्द्रित मार्मिक कविता पोस्टर प्... Read more
एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप... Read more
 नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें   वर्तमान में चल रहे लोकसभा चुनाव पिछले सभी आम चुनावों से कई दृष्टियों से भिन्न भी हैं Read more
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ओडीशा में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की साज़िश भारत सरकार का एक अल्पसंख्यक आयोग है । भारत सरकार का मानना है कि इस देश में अल्पसंख्यक सदा ख़तरे से घिरे रहते हैं । इस देश के लोग अल्पसंख्यकों को नष... Read more
जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जून और जुलाई का महीना भारत के राष्ट्रवादी आन्दोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । २३ जून १९५३ को डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर की ज... Read more
 रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान का पवित्र महीना शुरु हो गया है । यह महीना हिजरी सम्वत का नौवाँ मास है और ईस्वी सम्वत के हिसाब से नौ जुलाई को शुरु हुआ है । इस महीने में मुसल... Read more
भारतीय भाषाओं का मोर्चा:गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा १०५ और १०७ के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले २२५ दिनों से स... Read more
खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले मुंबई। आठ वर्षों से रोजी रोटी के संकट से झुझ रही बार बालाओं के 'डांस बारÓ को लेकर उच्चन्यायालय के फैसले ने बार बालाओं की चमक लौटा दी ... Read more
पिता के बाद पुत्र का कारनामा पिता के बाद पुत्र का कारनामा पीडि़त महिला फरियाद लेकर पहुंची पुलिस की शरण में इंदौर। आसाराम के बाद अब उनका लड़का नारायण सांई के खिलाफ भी एक परिवाद पेश किया जा रहा है। यह पर... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ जिसने सहयोग किया उसी की पीठ पर छूरा घोपा संजय ने नकली बाबा के कारनामों से लोगों में भारी रोष औंकारेश्वर। मां नर्मदा बने एक आश्रम में बने चौ... Read more
आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी राधेश्याम सोलंकी,भरत ठाकुर, जयंत जोशी,अशोक पाटीदार,हेमंत चतुर्वेदी,मनीष जैन कर रहे हैं एसटीएफ को  गुमराह भोपाल। ईवमिरेकल ज्वेलर्स कंपनी... Read more
क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास  क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास जगदीश जोशी 'प्रचंड  ' नई दिल्ली। काला धन स्वीस बैंक में जमा होने व नेताओं को घेरने की बात पर आंदोलन खड़ा कर 'आप ' के सर्वेसर... Read more
दो लाख करोड़ का खनन घोटाला दो लाख करोड़ का खनन घोटाला देवास जिले में रेत माफिया का राज भोपाल। शिवराज के राज में माइनिंग माफिया ने बेल्लारी की लूट के रिकार्ड भी तोड़ दिए हैं। बीते 10 साल में मप्र... Read more
कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में भोपाल। इस बार के चुनाव में मध्यप्रदेश पर कांग्रेस आलाकमान की विशेष निगाह है Read more
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। Read more
जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा   पीडि़त सुरतानसिंह राजेस पयासी (वकील) यदि ऐसा मा... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 करोड़ों की जमीन से आया रुपया ब्याजखोरी में लगाया औंकारेश्वर। लाखों रुपया एठने वाले औंकारेश्वर के कथित Read more
देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल ठगौरों का महानगर बनते जा रहे इंदौर में प्रशासन कोई खास कार्यवाही नहीं कर पाया अलबत्ता Read more
देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर आखिर यह भरत ठाकुर,बाबूलाल जयंत,मनीष कौन है? राधेश्याम सोलंकी,         Read more
मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... उत्कृष्ट को सजा और... निकृष्ट को  आशीर्वाद की छाया   -सेवानिवृत को भी बना  दिया संकुल प्रभारी  ... Read more
हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी अमिताभ,मुलायमसिंह और सोनिया के पास है क़्वींटल सोना! आप पार्टी के सर्वे सर्वा अरविन्द केजरीवाल व योग गुरु बाबा रामदेव पर अपनी-अपनी दुकान चमकाने... Read more
सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार निर्धारित किराए से अधिक वसूली होती है निजी बसों में (रतलाम कार्यालय) रतलाम । एक दशक पहले प्रदेश में सड़क परिवहन निगम की बसें बंद होने के बाद ... Read more
सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना राधेश्याम सोलंकी, भरत, जयंत जोशी  मनीष जैन एसटीएफ के निशाने पर..   जगदीश जोशी 'प्रचंड ' भोपाल। आम आदमी को फटाफट अम... Read more
मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत युवक से अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर ले रहा था पांच हजार की रिश्वत, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त भी संदेह के घेरे ... Read more
कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार  कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार बड़े नेताओं का अभाव दूसरा पंक्ति में नेताओं की कतार रतलाम से अनिल पांचाल विधानसभा चुनाव सिर पर है... Read more
पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण जम्मू कश्मीर में पुँछ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच और छह अगस्त की मध्य रात्रि को नियंत्रण रेखा के भीतर गश्त लगा रही भारतीय सैनिक टुकड़ी पर... Read more
कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश रतलाम से अनिल कुमार रतलाम। हाल ही में जनता को लम्बे समय के बाद दर्शन देकर लौटे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लगभग शहर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बि... Read more
आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी 67 वां स्वाधीनता दिवस स्वतंत्रता दिवस की क्रमवार गिनती में एक और वर्ष का इजाफा,सबकुछ भुलकर जश्न मनाने का एक और भारतीय दिन...लेकिन क्या सही म... Read more
तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन कभी समाप्त नहीं हुआ। कभी प्रत्यक्ष और कभी प्रच्छन्न उसकी तपश बीजिंग तक पहुंचती ही रही। 2009 में स्वतंत्रता के लिए सं... Read more
तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली स्थित दीन दयाल शोंध संस्थान में आयोजित हुई जिसमें 19 प्रांतों क... Read more
तिब्बतःएक अवलोकन तिब्बतःएक अवलोकन क्षेत्रफल : २५ लाख वर्ग कि० मी० जो वर्तमान चीन के कुल क्षेत्रफल का २६.०४ प्रतिशत हैं। राजधानी : ल्हासा जनसंख्या : ६० ला... Read more
आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं    'आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं' भोपाल। आरएसएस अथवा किसी ऐसे दलको अयोध्या में भगवान राम का... Read more
चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव नई दिल्ली । आगामी लोकसभा चुनाव में सत्त्ता सुख भोगने का सपना सजाए बैठी भाजपा की राह में रोडे अटकाने वालों की कमी नहीं है। भाजपा का अंतरकलह पार... Read more
पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब वर्तमान में पत्रकारिता हाशिये पर है और मीडिया शब्द चलन में है.पत्रकारिता के गूढ़ अर्थ और मीडिया की व्यापकता को रेखांकित करता मध्यप्रदेश क... Read more
राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में देखने, सुनने और बतियाने के बाद किसी भी एंगल से वे राजनेता नहीं लगते। कपाल पर बड़ा सा सिंदूरी टीका, सिर और दाड़ी के रंगे हुए सुनहरी काले गहरे ब... Read more
कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना धार :बगैरअनुमति कालोनी विकास करने वालों कालोनाईजरों पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की गाज लगातार गिर रही है। इसी कड़ी में धार शहर में बगैर विक... Read more
जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! नई दिल्ली: धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देना आज के समय में काफी आसान है, क्योंकि हम देशवासी दिमाग से नहीं बल्कि दिल से धर्म को जोड़कर रखते है... Read more
ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है   इंदौर।मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया प्रदेष कांग्रेस में जान फंकने में लगे है लेकिन प्रदेष के कई पदाधिकारियों... Read more
अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसलाएत पंचमी के दिन धार जिले की भोजशाला में हंगामे और उपद्रव के बीच पूजा के साथ नमाज अता फरमाने की रस्म पूरी हो जाने पर म... Read more
बोले तो आसाराम बोले तो आसाराम 90 के दशक में धर्मप्रेमी जनता के लिए आशा की किरण बन कर उभरे आसाराम बापू एक दशक बाद ही बदनामी के दाग अपनी आभा पर लगवा चुके हैं। आश्रम में बच्चो... Read more
बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज मंदसौर।(धर्मवीर रत्नावत) जिस तरह देश में मंदसौर अफीम उत्पादन, तस्करी के लिए मशहूर है, उसी तरह नीमच, मंदसौर, रतलाम के कुछ खास इलाके भी बाछ... Read more

"न मैं जीता, न तुम हारे"

आडवाणी  की  हठधर्मिता के बावजूद यदि मोदी की चली तो देश के बागडोर उनके हाथ आये,

 न आये पर नबम्बर में मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में रोचक समीकरण बनेंगे (पूरे परिदृश्य को किसी अन्य लेख में बताऊंगा पर फिलहाल) यह कयास लगा सकता हूँ कि यदि शिवराज तिकड़ी मारने में कामयाब रहे भी तो अगले मुख्यमंत्री नहीं बनाये जायेंगे और उस स्थिति में मोदी के नजदीकी रहे (वर्तमान राज्यसभा सांसद और संघ से गहरा संपर्क रखने वाले विचारक) अनिल माधव दवे की किस्मत का नया द्वार खुल सकता है। ऐसा ही वे अन्य प्रान्तों में भी करेंगे क्योंकि "पीएम" बनने हेतु उन्हें अपने "वफादारों" को सत्ता/ अधिकार सौंपने ही होंगे। अब वे कितनी जल्दी और कितनी सफल पॉलिटिकल सर्जरी करते हैं यह आने वाला वक़्त ही बतायेगा।

 

 

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नरेंद्र मोदी ‘पब्लिसिटी ऑफिसर’, न कि "पीएम" पद का घोषित प्रत्याशी। 

मैंने अपनी पोस्ट में sunday/ 9 June को ही लिखा था कि गोवा में नरेंद्र मोदी को महज एक राजनैतिक पार्टी, जो 2014 में ‘पीएम’ की कुर्सी पाने का ख्बाव फिर से संजोए 
हुए है, का ‘पब्लिसिटी ऑफिसर’ बनाया है, न कि "पीएम" पद का घोषित प्रत्याशी। ‘हम बनेंगे प्रधानमंत्री’ शीर्षक से निर्माणाधीन भाजपा की फिल्म में पहले से ही अनेक सितारे साइन किए जा चुके हैं और एक और ‘स्टार’ प्रचार अधिकारी के किरदार में आ गया। क्षोभजनक तो यह है कि प्रिंट/ इलेक्ट्रानिक मीडिया के पुरोधाओं-पंडितों तक ने मोदी की इस जिम्मेदारी को ऐसा रूप दे दिया मानो वे ही इकलौते प्रधानमंत्री के प्रत्याशी चुन लिए गए हों। आडवाणी द्वारा खेल नाटक "त्यागपत्र" के एकल शो और उसकी
जबरदस्त कामयाबी से प्रफुल्लित हो तथाकथित "भीष्म पितामह" ने उसके और शोज न करने का, फ़िलहाल, फैसला लिया है। अब बीजेपी के ज्यादातर नेता यही तर्क देते फिर रहे हैं कि गोवा में तो मोदी केवल एक समिति के जिम्मेदार बनाये गए थे न की प्रधानमंत्री पद के पार्टी प्रत्याशी 

 

 
--अभिनव तैलंग

चाहें तो एक बार मेरा पुराना आंकलन पढ़ लें :----------------------------------------------------------
 ‘सुर्खियों में’/ ‘मोदी का बढ़ा कद, आडवाणीजी के पेट में बढ़ने लगी पीड़ा’


यहां यह तथ्य भी गौरतलब है कि संविधान में किसी भी स्थिति में प्रधानमंत्री को पहले से चुना/ घोषित करने का प्रावधान नहीं है। देश के कानूनानुसार प्रधानमंत्री को पार्लियामेंट्री बोर्ड में बहुमतप्राप्त दल के निर्वाचित सांसदों द्वारा ही चुना जाता है। नेता प्रतिपक्ष तक मुख्य विपक्षी दल के सदस्य संसदीय बोर्ड की बैठक आहूत कर चुनते हैं। पर कुछ बरसों से ऐसी बेसब्री नजर आने लगी है कि अति महत्वाकांक्षी दल अथवा नेता भविष्य में ‘पीएम’ बने, न बने ‘प्रतीक्षारत प्रधानमंत्री’ अथवा ‘पीएम इनवेटिंग’ बनने की लालसा को सड़कों पर ला बैठा है। कहो, जल्द ही वह नजारा भी दिख जाए जिसमें ऐसे अति-वरिष्ठ और बुढ़ा चुके बेसब्र नेताओं के बंगले पर लगीतख्तियों में‘प्रतीक्षारत वरिष्ठतम 
प्रधानमंत्री’ अथवा ‘सबसे दमदार पीएम प्रत्याशी’ लिखा हो// 

 

 
 

//भाजपा के पुरोधा अटलबिहारी वाजपेयी तीन बार प्रधानमंत्री बनने का सौभाग्य पा चुके हैं, पर आडवाणीजी को सिर्फ ‘पीएम इन वेटिंग’ विशेषण से ही संतोष करना 
पड़ा था और तब से शायद आज तक उन्हें सुप्तावस्था और जाग्रत अवस्था में भी दिल्ली स्थित पीएमओ (प्राइमिनिस्टर आफिस) नजर आता होगा। यही वजह रही कि जब शाश्वत अधिकार वाली उनकी उस ‘कुर्सी’ पर किसी और, भले वह उनकी ही पार्टी का नेता (नरेंद्र मोदी) क्यों न हो, उनका ‘पेट’ खराब हो गया, Loose motions भी होने लगे। मतलब यह कि यह खबर आते ही कि भाजपा के वर्तमान अध्यक्ष राजनाथ सिंह, और नागपुर स्थित संघ के पुरोधा भी मोदी के नाम पर सहमत हो गएआडवाणीजी गोवा पहुंचने में अक्षम हो गए। फजीहत होने के बावजूद यह सच भी हो सकता है, आखिर पाकिस्तान के कराची में 8 नवम्बर 1927 को जन्मे लालकृष्ण 86वें वर्ष में चल रहे हैं यानी रिटायर्ड होने की सरकारी उम्र (60) वे 26 साल पहले ही पार करचुके थे//

 
 
 
 
मोदी, नरेंद्र दामोदरदास फिर सुर्खियों में हैं। उनके खाते में गुजरात का चार बार मुखिया, मुख्यमंत्री बनने की रिकॉर्डतोड़ उपलब्धि है। और अब, यदि किस्मत ने ....और सहयोगी दलों सहित खुद उनकी ही पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, के कतारबद्ध खड़े अति-महत्वाकांक्षी नेताओं -लालकृष्ण आडवाणी से सुषमा स्वराज तक ने सोते-जागते ख्वाब देखने को तिलंजलि दे दी तो संभवतः वे 2014 के लोकसभा चुनाव के उपरांत देश के 21वें (व्यक्ति के रूप में तेरहवें) प्रधानमंत्री बन जाएं। कुछ विश्लेषक यह कहने से भी नहीं चूक रहे कि ‘मोदी’ की आड़ में राजनाथ सिंह ने आडवाणी को ‘वानप्रस्थ’ होने विवश कर दिया है। यूं भाजपा के पुरोधा अटलबिहारी वाजपेयी तीन बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं, पर आडवाणीजी को सिर्फ ‘पीएम इन वेटिंग’ विशेषण से ही संतोष करना पड़ा था और तब से शायद आज तक उन्हें सुप्तावस्था और जाग्रत अवस्था में भी दिल्ली स्थित पीएमओ (प्राइमिनिस्टर आफिस) नजर आता होगा। यही वजह रही कि जब उनकी उस ‘कुर्सी’ पर किसी और, भले वह उनकी ही पार्टी का नेता (नरेंद्र मोदी) क्यों न हो, उनका ‘पेट’ खराब हो गया, Loose motions भी होने लगे । मतलब यह कि यह खबर आते ही कि भाजपा के वर्तमानअध्यक्षराजनाथ सिंह, और नागपुर स्थित संघ के पुरोधा भी मोदी के नाम पर सहमत हो गए आडवाणीजी गोवा पहुंचने में अक्षम हो गए। फजीहत होने के बावजूद यह सच भी हो सकता है,
 
 
 

 

आखिर पाकिस्तान के कराची में 8 नवम्बर 1927 को जन्मे लालकृष्ण 86वें वर्ष में चल रहे हैं यानी रिटायर्ड होने की सरकारी उम्र (60) वे 26 साल पहले ही पार कर चुके थे। और मोदी, प्रधानमंत्री के दावेदार विपक्षी नेताओं में युवा हैं, ऊर्जावान हैं और सर्वाधिक सुर्खियां बटोरनेवाले शख्स भी हैं। 9 जून 1970 को जन्मे यानि वर्तमान में करीब 43 बरस के "युवराज", कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तरह ही वे आजाद भारत में जन्मे। मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को तत्कालीन बंबई प्रांत (वर्तमानगुजरात) के मेहसाणा जिले के वदनगर (Vadanager) में हुआ था। वे छह भाई-बहनों में तीसरे थे। नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने किशोर उम्र में परिवार के जीवनयापन हेतु अपने भाई के साथ बस अड्डे पर चाय की दुकान चलाई और स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद गुजरात स्टेट रोड कर्पोरेशन की केंटीन में नौकरी करने लगे। उन्होंने 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में रेलवे स्टेशन जा-जाकर सैनिकों की सेवा की थी। साथ ही भ्रष्टाचार विरोधी नव निर्माण आन्दोलन में भी सक्रिय रहे थे।
 
 

 

 
 वे बचपन से ही एक अच्छे, तेजस्वी वक्ता/ विचारक थे और युवावस्था में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्णकालिक "प्रचारक" बनने के बाद अविवाहित रहने की शपथ ले बैठे। अतएव, उनके पक्षधर यह भी तर्क देते हैं कि चूंकि उनकी कोई पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं है, पत्नी-बच्चे नहीं हैं इसलिए वे अपेक्षाकृत अधिक ईमानदार और
बेहतरप्रधानमंत्री साबित होंगे। इस तर्क की काट में वरिष्ठ कांग्रेसी और "किचन कैबिनेट" के अभिन्न अंग दिग्विजय सिंह जैसे नेता भी राहुल गांधी के अब तक अविवाहित रहने और संभवतः आगे भी शादी न करने की बात करते हैं। सार्वजनिक रूप से भी राहुल यह कबूल कर चुके हैं कि देश उनके लिए सर्वोपरि है,
 
 
यानि प्रधानमंत्री (हालांकि उन्होंने इस पद को पाने का प्रलोभन/ लालसा कभी नहीं जताई) बनने के लिए उन्हें ‘त्याग’ करना ही होगा। यह अलग बात है कि उनकी मां पारिवारिक और इतनी बड़ी पार्टी की जिम्मेदारियां निभाते हुए भी प्रधानमंत्री पद का त्याग कर चुकी थीं और उनके त्याग के
परिणामस्वरूप ही डॉ. मनमोहन सिंह को दो-दो बार प्रधानमंत्री बनने का मौका मिल गया। पर यहां बात नरेंद्र मोदी की हो रही है जो चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही सुर्खियों में रह रहे हैं। तब भी भारी भीड़ ने उनसे कहा था ‘दिल्ली चलो’, पर तब शपथ लेने के बाद उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा था कि ‘हां, मैं दिल्ली जाऊंगा पर दो-तीन दिनों के लिए ही’। इसके बावजूद मोदी के मुरीद उन्हें कम से कम पांच साल के लिए दिल्ली पहुंचाने की जिद पाल बैठे हैं। 

 

अब मोदी चाहे, न चाहें लोग-बाग धकियाकर उन्हें दिल्ली पहुंचा कर ही चैन लेते दिख रहे हैं। भाजपा की गोवा में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी यह अहम् फैसला लिया गया और उसकी घोषणा की देश बेसब्री से प्रतीक्षा करने लगा था। क्यों न करे, ‘बायब्रेंट गुजरात’ के वे सर्वाधिक चमकीले सितारे हैं। पूरे देश 
की निगाहें उन पर टिकी हैं। मोदी ने गोवा में पार्टी के पितृ पुरुषों को याद करने के साथ ही एक ऐसा विचार देशवासियों को दे दिया, जिसकी भूरि-भूरि प्रशंसा चहुंओर होने लगी है। मोदी चाहते हैं कि न्यूयार्क की विख्यात ‘स्टेच्यू आफ लिबर्टी’ से कम-से-कम दुगनी ऊंची एक प्रतिमा ‘यूनिटी’ यानी एकता की बनाई जाए। यही नहीं, उन्होंने देश के उप-प्रधानमंत्री रह चुके लौह (महा)पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की गगनचुंबी प्रतिमा बनाने का आग्रह भी किया। इसी के साथ, मोदी ने कांग्रेस को लगातार कोसते हुए अपील की कि ‘देश को कांग्रेस मुक्त’ करना होगा।

 

 
 
देश का आशातीत विकास कांग्रेस के बेदखल होने से ही होगा, ऐसी मोदीजी की राय है और यकीनन भाजपा के ज्यादातर नेता/ कार्यकर्ता इस पर सौ फीसदी भरोसा करते हैं इसीलिए पणजी तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी थी। संघ से आशीर्वाद प्राप्त मोदी ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ के प्रमुख भी बनाए गए। इससे बरसों पूर्व, 26 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के दरम्यान आपात्काल में वे सरकार विरोधी पर्चे बांटने के कारण धर लिए गए थे। वे संघ के बड़े नेताओं वसंत गजेन्द्रगड़कर और नाथालाल जाघड़ा के खासमखास बन गए। 1987 में उन्हें बीजेपी में भेज दिया गया। मुरलीमनोहर जोशी की एकता यात्रा में बेहद सक्रिय रहे। गुजरात के केशुभाई पटेल, शंकर बाघेला जैसे शीर्ष नेताओं के साथ उनका शुमार होने लगा। 1995 में मोदी की अनथक कोशिशों के फलस्वरूप राज्य में बीजेपी गवर्मेंट बन गई। उन्हें पार्टी का महासचिव बनाकर दिल्ली भेज दिया गया। हरियाणा और हिमाचल प्रदेश का दायित्व सौंपा तो वहां भी करिश्मा कर दिखाया।
 
 
 
और इन्ही सब ‘कारनामों’ की बदौलत वे सीढि़यां चढ़ते-चढ़ते ऊपर पहुंचते गए। उधर 1995 में लोकसभा चुनाव हारते ही बाघेला का मोहभंग हो गया और बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ा श्रेयस्कर समझा। 1998 में मोदी को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बना दिया गया। उसी बरस राज्य में भाजपा जीत गई जिसे मोदी का कारनामा कहा गया। कुछ ही बरसों में केशुभाई पटेल का भी ‘डाउन फाल’ होने लगा तो विकल्प के रूप में मोदी परिदृश्य पर चमकने लगे। 1995 और 1998 में गुजरात चुनावों में बेहद सक्रिय/ समर्पित/ शक्तिशाली और सफल रहे मोदी पहली बार 7 अक्टूबर 2001 को गांधीनगर स्थित मुख्यमंत्री आवास में रहने पहुंचे और जनता के स्नेह-प्यार के चलते अब तक हुए विधानसभा चुनावों में जीतते रहने की वजह से टिके हुए हैं। 

 

 
 
गुजरात में हुए तेज़ विकास कार्यों की बदौलत उन्हें "विकास पुरुष" की संज्ञा मिली है। उन्होंने गुजरात में अनेक कल्याणकारी योजनायें शुरू कीं जिनमें नवजात शिशु की मृत्युदर नियंत्रित करने हेतु "चिरंजीवी योजना", महिला साक्षरता व शिक्षा को बढावा देने हेतु "कन्या कलावाणी योजना", निर्धन छात्रों को विद्यालय में दोपहर का भोजन करने की "बालभोग योजना," माँ-शिशु के स्वास्थ्य हेतु "मातृ-वन्दना योजना", भ्रूण हत्या रोकने व लिंगानुपात को बढाने हेतु "बेटी बचाओ योजना", एकीकृत विकास हेतु "पंचायामी योजना"/ "पंचामृत योजना", हर गाँव में बिजली पहुँचाने हेतु "ज्योतिग्राम योजना", जल स्रोतों का भरपूर और उचित उपयोग हेतु " सुजलाम् सुफलाम् योजना" सराहनीय और सार्थक सिद्ध हो रही हैं।लंबी कशमकश के बाद नरेंद्र मोदी को 2014 के लिए गठित लोकसभा चुनाव प्रचार समिति की कमान थमा दी गई।

 

 
 
इस घोषणा के अगले पल से ही भाजपा में मोदी युग का पदार्पण हो गया और उसी के मुताबिक समीकरण बनने प्रारंभ हो गए। यह भी सुर्खियाँ बना कि बीते पांच दशकों में पहली बार आडवाणीजी कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं हुए। हालाँकि इस बेरुखी को दूर करने के लिए मोदी ने बरसक प्रयास किये पर शायद वे व्यर्थ ही जाएँ। यदि मोदी के चली तो मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में रोचक समीकरण बनेंगे (पूरे परिदृश्य को किसी अन्य लेख में बताऊंगा पर फिलहाल) यह कयास लगा सकता हूँ कि यदि शिवराज तिकड़ी मारने में कामयाब रहे भी तो अगले मुख्यमंत्री नहीं बनाये जायेंगे और उस स्थिति में मोदी के नजदीकी रहे (वर्तमान राज्यसभा सांसद और संघ से गहरा संपर्क रखने वाले विचारक) अनिल माधव दवे की किस्मत का नया द्वार खुल सकता है। ऐसा ही वे अन्य प्रान्तों में भी करेंगे क्योंकि "पीएम" बनने हेतु उन्हें अपने "वफादारों" को सत्ता/ अधिकार सौंपने ही होंगे। अब वे कितनी जल्दी और कितनी सफल पॉलिटिकल सर्जरी करते हैं यह आने वाला वक़्त ही बतायेगा। बहरहाल,मोदी के लिये दिल्ली तक रेडकार्पेट बिछाने की कवायद शुरू हो चुकी है।

 

 
 
पर एनडीए के पुराने साथी -शरद यादव, चंद्रबाबू नायडू, अजित सिंह, ओमप्रकाश चौटाला, उद्धव (पहले बाल) ठाकरे, प्रकाश सिंह बादल, नवीन पटनायक, जयललिता, ममता बनर्जी, रामविलास पासवान, फाऱुख अब्दुल्ला, शिबू सोरेन, करुणानिधि, नीतीश कुमार आदि उनके सहयोगीसमर्थक बनेंगे कि नहीं ! यूं गोवा अधिवेशन में आडवाणी के आलावा यशवंत सिन्हा/ उमा भारती/ जसवंत सिंह/ शत्रुघ्न सिन्हा/ बीसी खंडूरी जैसे कद्दावर नेतागण का न पहुँचना कानाफूसी का सबब बन गया था। हालाँकि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर का खुलकर मोदी की हिमायत करना पाजिटिव संकेत रहा।पर आडवाणी तब भी मोदी की प्रतिभा पर संदेह करते थे और उनसे बहुत आशान्वित न थे। एलके आडवाणी ने तब मोदी को प्रशासन में मदद करने हेतु केशुभाई पटेल द्वारा अनुशंसित एक ‘डिप्टी सीएम’ बनाने को कहा, पर विश्वास से लबरेज मोदी ने साफ इंकार कर दिया और कहा ‘आई एम फुली रिसपान्सिबल फॉर गुजरात’। साथ ही उन्होंने दिसंबर 2002 में होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए भी कड़ी मेहनत करना प्रारंभ कर दिया। मोदी की इस हेकड़ी को आडवाणी कभी भूले नहीं और उनकी राह में रोड़े अटकाने की जुगत भिड़ाते रहे। पर किस्मत मोदी के पक्ष में हमेशा बनी रही।जनता ने उन्हें इतना बहुमत दिया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव, जो अब 2017 में होंगे,तक आवास की समस्या से पूर्णतः मुक्त हो गए हैं। उल्लेखनीय है कि वे भाजपा के पूर्व वरिष्ठ नेता केशुभाई पटेल के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री बनाए गए थे। 
 

 

 
भूकंप के कारण लातूर में जो तबाही हुई, उसका पुननिर्माण/ विस्थापितों की मदद और जनकल्याणकारी कार्यों में त्वरित फैसले भी तारीफ की वजह बने। पर 27 फरवरी 2002 में गोधरा में साबरमति एक्सप्रेस की एक बोगी जला दी गई जिसमें 25 महिलाएं तथा 15 बच्चों सहित न्यूनतम 58 हिंदू जिंदा जला दिए गए और जो ज्यादातर अयोध्या से लौट रहे ‘कारसेवक’ थे तो उसकी प्रतिक्रियास्वरूप गुजरात को शर्मसार कर देने वाला ‘गोधरा कांड’’ हुआ। उसमें सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 790 मुसलमान और 254 हिंदु मारे गए तथा करीबन 223 अन्य व्यक्ति लापता बताए गए। इन दंगों की चपेट में तब राज्य के 25 जिलों में लगभग 16 आ गए जिनके 151 शहरों और 993 गांवों में जून मध्य तक हिंसात्मक वारदातें होती रहीं और आरोपों-प्रत्यारोपों के मुताबिक ज्यादातर मुसलमान ही मारे/ सताए/ लूटे और विस्थापित हुए तो लगा था कि मोदी आगामी विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएंगे, न उनकी भारतीय जनता पार्टी। कांग्रेसी मोदी को नफरत, हिंसा और आक्रामकता का बदनुमा चेहरा बताने से गुरेज नहीं करते पर मतदाताओं ने 2002 ही नहीं 2007 में भी मोदी और भाजपा पर भरोसा जताया। यह विश्वास गत विधानसभा चुनाव यानी 2012 में भी बरकरार रहा, नतीजतन नरेंद्र मोदी लगातार चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 
 
 
पर भाइयों, अब मोदी की दिल्ली दौड़ शुरु होने से पहले ही भाजपा के खैवनहारे आडवाणीजी के पेट का दर्द शुरु हो गया। ईश्वर, दूसरे नेताओं को भी विभिन्न किस्म की दुःख-तकलीफों, दर्दो-सितम और मुसीबत-परेशानियों से बचाए। वे बगैर किसी बाधा-रुकावट के जब मोदी की ताजपोशी में पहुंचेंगे तभी वे अधिक आसानी से दिल्ली के तख्त पर आसीन होने का दावा भविष्य में साकार/ सार्थक कर सकते हैं।मोदी राजनैतिक विज्ञान में मास्टर डिग्रीधारी नेता हैं और आरएसएस के प्रचारक रहते हुए गुजरात सहित देश के चप्पे-चप्पे से भली-भांति वाकिफ भी। देश और देशवासियों की नब्ज के वे गहरे और प्रमाणिक जानकार हैं। कहना नहीं होगा कि उनकी दावेदारी कांग्रेस और उसके युवराज के लिए अब ‘लोहे के चने चबाने’ जैसी होगी। राहुल भैया को अपने सिपसलारों के साथ और अधिक परिश्रम करना होगा। हाल के चुनावों में कांग्रेस की पराजय और मोदी का सिक्का फिर-फिर जम जाना जताता है कि ‘मोदी बनाम राहुल’ की जंग बड़ी रोमांचक, रोचक और अप्रत्याशित नतीजे वाली होगी।
 
 
 
मोदी पर तथाकथित रूप से सिर्फ ‘गोधरा’ का दाग ही चस्पां है और उनकी छवि कट्टर/ उग्र हिंदूवादी नेता की है। कांग्रेस तथा यूपीए के घटक दल और अन्य गैर भाजपाईनेता मोदी पर 2002 का ही ‘कीचड़’ मलने की फिराक में रहेंगे। यदि मोदी यह साबित कर सके और अल्पसंख्यकों, खासकर देशभर के मुसलमान मतदाताओं को यह यकीन दिला सके कि उनके प्रधानमंत्री बनने पर कोई पक्षपात/ भेदभाव और अत्याचार-अनाचार नहीं किया जाएगा और वे समभावपूर्वक देश की बागडोर संभालेंगे तभी उनका ‘ग्राफ’ ऊपर की ओर बढ़ता जाएगा। यूं भी लोकसभा चुनाव होने में समय है। कांग्रेस के सामने इसी वर्ष मध्यप्रदेश/ छत्तीसगढ़/ राजस्थान/ दिल्ली सहित 6 विधानसभा चुनाव की चुनौती है। कुछ राज्यों में उसे अपना लंबा संन्यास खत्म करना है और दिल्ली/ राजस्थान जैसे राज्यों में अपनी स्थिति न सिर्फ बरकरार रखना है बल्कि उसे और मजबूत बनाना है ताकि आम चुनाव में उसका फायदा मिल सके। लोकसभा की अधिकाधिक सीटे कांग्रेस अपने गठबंधन दलों के सहयोग से झटक सके।

 

 
 
मोदी से जूझते हुए कांग्रेस को वह कहावत याद रखनी होगी जिसमें ‘ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता ही गया’ कहा गया है। मोदी पर उलटवार करते-करते कहीं उनका कद, लोकप्रियता और स्वीकार्यता बढ़ती न जाए, कांग्रेस को ऐसी रणनीति अब बनानी और उस पर अमल भी करना, करवाना होगा। यूं भी 2002 के बाद से ही कांग्रेस लगातार मोदी को गुजरात दंगों का दोषी बताने को उतारु रही है, पर मतदाताओं ने उन आरोपों पर नहीं, गुजरात के विकास में जुटे मोदी पर ही भरोसा किया और बार-बार मुख्यमंत्री बनने की राह प्रशस्त की। एक बात और, गोधरा कांड से उपजे साम्प्रदायिक दंगों के बाद गुजरात में कोई कम्युनल वारदात नहीं हुई। ऐसे में अब लकीर पीटने की नाकाम कोशिशों से कांग्रेस को तौबा कर लेना चाहिए। वर्ष 2014 के आम चुनाव हेतु गठित प्रचारसमिति के अध्यक्ष बनने के उपरांत नरेंद्र मोदी को मन/ बेमन से अन्य वरिष्ठ-कनिष्ठ नेताओं ने बधाइयां/ शुभाकामनाएं और तन-मन-धन से साथ खड़े रहने, समर्थन-सहयोग देने का उपक्रम (ढोंग) शुरु कर दिया है। मोदी ने भी यह बताने से परहेज नहीं किया कि ‘आडवाणी जी का अशीर्वाद मुझे मिल गया है। वे बड़े दिल के हमारे वरिष्ठतम नेता हैं।’ 
 
(Modi tweeted, "Spoke to Advaniji on the phone. He gave me his blessings. 
Honoured and extremely grateful to receive his blessings")
 
 

 

इसी के साथ यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या मोदी पार्टी से बड़े नेता बन गए हैं, क्या अब वे भाजपा का मुख्य चेहरा बन गए हैं, क्या उन्हें एनडीए के सभी दलों का समर्थन-सहयोग मिलने लगेगा और यह भी कि क्या नितीश कुमार जैसे सहयोगी जो मोदी की उम्मीदवारी पर नाक-भौं सिकोड़ते रहे थे, अब गलबहियां फैलाने लगेंगे ? सवाल कई हैं, शंकाएं भी ढेर सारी हैं जिनका जबाव खुद मोदी को ही देना होगा। अब बाजी मतदाताओं के हाथ में है, उनकी मुहर जिस पर लगेगी वही देश का सिरमौर बनेगा, किसी पार्टी, चाहे वह कांग्रेस हो अथवा भाजपा या अन्य कोई दल के चाहने-स्वीकारने और घोषित करने से कुछ नहीं होगा, जनता जिसे चाहेगी वही बनेगा हमारा प्रधानमंत्री। आखिर, अब देश का मतदाता बहुत समझदार और जागरूक जो हो गया 
है।
 

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