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जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला   देश की सुरक्षा की दृष्टी से बनी कंपनी मेटल मेटल कॉरपोरेशन ऑफ  इण्डिया (हिदुस्तान जिंक) के विनिवेश के मामले में सीबीआई कार्यालय जोधप... Read more
सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो   चित्तौडग़ढ़। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पेंशन योजनाओं में जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है या नहीं यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर ... Read more
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक गुजरात में ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्य करते हुए, साथ में सहसंयोजक श्री गनी कुरैशी जी भी है। Read more
 ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें? ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें?     मनमोहन सिंह क्यों मौन रहे चीन के सामनें?   पिछले दिनों हमारें प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने डरबन में ब्रिक्स शिखर... Read more
सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं  लद्दाख में चीन की जन मुक्ति सेना की घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र के बीस किलोमीटर ( पहले सूचना यह थी कि दस किलोमीटर के अन्दर) अन्दर आकर अपनी चौकिय... Read more
अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी   4 से 7 अप्रैल तक उज्जैन की कालिदास वीथिका में उज्जैनवासी देख सकेंगे माता-पिता, बुज़ुर्गों पर केन्द्रित मार्मिक कविता पोस्टर प्... Read more
एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप... Read more
 नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें   वर्तमान में चल रहे लोकसभा चुनाव पिछले सभी आम चुनावों से कई दृष्टियों से भिन्न भी हैं Read more
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ओडीशा में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की साज़िश भारत सरकार का एक अल्पसंख्यक आयोग है । भारत सरकार का मानना है कि इस देश में अल्पसंख्यक सदा ख़तरे से घिरे रहते हैं । इस देश के लोग अल्पसंख्यकों को नष... Read more
जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जून और जुलाई का महीना भारत के राष्ट्रवादी आन्दोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । २३ जून १९५३ को डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर की ज... Read more
 रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान का पवित्र महीना शुरु हो गया है । यह महीना हिजरी सम्वत का नौवाँ मास है और ईस्वी सम्वत के हिसाब से नौ जुलाई को शुरु हुआ है । इस महीने में मुसल... Read more
भारतीय भाषाओं का मोर्चा:गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा १०५ और १०७ के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले २२५ दिनों से स... Read more
खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले मुंबई। आठ वर्षों से रोजी रोटी के संकट से झुझ रही बार बालाओं के 'डांस बारÓ को लेकर उच्चन्यायालय के फैसले ने बार बालाओं की चमक लौटा दी ... Read more
पिता के बाद पुत्र का कारनामा पिता के बाद पुत्र का कारनामा पीडि़त महिला फरियाद लेकर पहुंची पुलिस की शरण में इंदौर। आसाराम के बाद अब उनका लड़का नारायण सांई के खिलाफ भी एक परिवाद पेश किया जा रहा है। यह पर... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ जिसने सहयोग किया उसी की पीठ पर छूरा घोपा संजय ने नकली बाबा के कारनामों से लोगों में भारी रोष औंकारेश्वर। मां नर्मदा बने एक आश्रम में बने चौ... Read more
आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी राधेश्याम सोलंकी,भरत ठाकुर, जयंत जोशी,अशोक पाटीदार,हेमंत चतुर्वेदी,मनीष जैन कर रहे हैं एसटीएफ को  गुमराह भोपाल। ईवमिरेकल ज्वेलर्स कंपनी... Read more
क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास  क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास जगदीश जोशी 'प्रचंड  ' नई दिल्ली। काला धन स्वीस बैंक में जमा होने व नेताओं को घेरने की बात पर आंदोलन खड़ा कर 'आप ' के सर्वेसर... Read more
दो लाख करोड़ का खनन घोटाला दो लाख करोड़ का खनन घोटाला देवास जिले में रेत माफिया का राज भोपाल। शिवराज के राज में माइनिंग माफिया ने बेल्लारी की लूट के रिकार्ड भी तोड़ दिए हैं। बीते 10 साल में मप्र... Read more
कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में भोपाल। इस बार के चुनाव में मध्यप्रदेश पर कांग्रेस आलाकमान की विशेष निगाह है Read more
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। Read more
जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा   पीडि़त सुरतानसिंह राजेस पयासी (वकील) यदि ऐसा मा... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 करोड़ों की जमीन से आया रुपया ब्याजखोरी में लगाया औंकारेश्वर। लाखों रुपया एठने वाले औंकारेश्वर के कथित Read more
देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल ठगौरों का महानगर बनते जा रहे इंदौर में प्रशासन कोई खास कार्यवाही नहीं कर पाया अलबत्ता Read more
देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर आखिर यह भरत ठाकुर,बाबूलाल जयंत,मनीष कौन है? राधेश्याम सोलंकी,         Read more
मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... उत्कृष्ट को सजा और... निकृष्ट को  आशीर्वाद की छाया   -सेवानिवृत को भी बना  दिया संकुल प्रभारी  ... Read more
हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी अमिताभ,मुलायमसिंह और सोनिया के पास है क़्वींटल सोना! आप पार्टी के सर्वे सर्वा अरविन्द केजरीवाल व योग गुरु बाबा रामदेव पर अपनी-अपनी दुकान चमकाने... Read more
सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार निर्धारित किराए से अधिक वसूली होती है निजी बसों में (रतलाम कार्यालय) रतलाम । एक दशक पहले प्रदेश में सड़क परिवहन निगम की बसें बंद होने के बाद ... Read more
सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना राधेश्याम सोलंकी, भरत, जयंत जोशी  मनीष जैन एसटीएफ के निशाने पर..   जगदीश जोशी 'प्रचंड ' भोपाल। आम आदमी को फटाफट अम... Read more
मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत युवक से अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर ले रहा था पांच हजार की रिश्वत, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त भी संदेह के घेरे ... Read more
कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार  कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार बड़े नेताओं का अभाव दूसरा पंक्ति में नेताओं की कतार रतलाम से अनिल पांचाल विधानसभा चुनाव सिर पर है... Read more
पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण जम्मू कश्मीर में पुँछ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच और छह अगस्त की मध्य रात्रि को नियंत्रण रेखा के भीतर गश्त लगा रही भारतीय सैनिक टुकड़ी पर... Read more
कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश रतलाम से अनिल कुमार रतलाम। हाल ही में जनता को लम्बे समय के बाद दर्शन देकर लौटे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लगभग शहर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बि... Read more
आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी 67 वां स्वाधीनता दिवस स्वतंत्रता दिवस की क्रमवार गिनती में एक और वर्ष का इजाफा,सबकुछ भुलकर जश्न मनाने का एक और भारतीय दिन...लेकिन क्या सही म... Read more
तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन कभी समाप्त नहीं हुआ। कभी प्रत्यक्ष और कभी प्रच्छन्न उसकी तपश बीजिंग तक पहुंचती ही रही। 2009 में स्वतंत्रता के लिए सं... Read more
तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली स्थित दीन दयाल शोंध संस्थान में आयोजित हुई जिसमें 19 प्रांतों क... Read more
तिब्बतःएक अवलोकन तिब्बतःएक अवलोकन क्षेत्रफल : २५ लाख वर्ग कि० मी० जो वर्तमान चीन के कुल क्षेत्रफल का २६.०४ प्रतिशत हैं। राजधानी : ल्हासा जनसंख्या : ६० ला... Read more
आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं    'आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं' भोपाल। आरएसएस अथवा किसी ऐसे दलको अयोध्या में भगवान राम का... Read more
चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव नई दिल्ली । आगामी लोकसभा चुनाव में सत्त्ता सुख भोगने का सपना सजाए बैठी भाजपा की राह में रोडे अटकाने वालों की कमी नहीं है। भाजपा का अंतरकलह पार... Read more
पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब वर्तमान में पत्रकारिता हाशिये पर है और मीडिया शब्द चलन में है.पत्रकारिता के गूढ़ अर्थ और मीडिया की व्यापकता को रेखांकित करता मध्यप्रदेश क... Read more
राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में देखने, सुनने और बतियाने के बाद किसी भी एंगल से वे राजनेता नहीं लगते। कपाल पर बड़ा सा सिंदूरी टीका, सिर और दाड़ी के रंगे हुए सुनहरी काले गहरे ब... Read more
कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना धार :बगैरअनुमति कालोनी विकास करने वालों कालोनाईजरों पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की गाज लगातार गिर रही है। इसी कड़ी में धार शहर में बगैर विक... Read more
जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! नई दिल्ली: धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देना आज के समय में काफी आसान है, क्योंकि हम देशवासी दिमाग से नहीं बल्कि दिल से धर्म को जोड़कर रखते है... Read more
ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है   इंदौर।मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया प्रदेष कांग्रेस में जान फंकने में लगे है लेकिन प्रदेष के कई पदाधिकारियों... Read more
अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसलाएत पंचमी के दिन धार जिले की भोजशाला में हंगामे और उपद्रव के बीच पूजा के साथ नमाज अता फरमाने की रस्म पूरी हो जाने पर म... Read more
बोले तो आसाराम बोले तो आसाराम 90 के दशक में धर्मप्रेमी जनता के लिए आशा की किरण बन कर उभरे आसाराम बापू एक दशक बाद ही बदनामी के दाग अपनी आभा पर लगवा चुके हैं। आश्रम में बच्चो... Read more
बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज मंदसौर।(धर्मवीर रत्नावत) जिस तरह देश में मंदसौर अफीम उत्पादन, तस्करी के लिए मशहूर है, उसी तरह नीमच, मंदसौर, रतलाम के कुछ खास इलाके भी बाछ... Read more

छत्तीसगढ़ में सोनिया कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा चल रही थी। कांग्रेस इस यात्रा से प्रदेश में सत्ता का परिवर्तन करना चाहती थी।

 लेकिन मंच का दृश्य संकेत दे रहा था कि यात्रा के साथ–साथ पार्टी के भीतर ही परिवर्तन की आंधी चल रही है। केन्द्र सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री और सोनिया गांधी के खास-उल-खास जयराम रमेश मंच से सम्बोधन कर रहे थे। श्रोताओं में अधिकांश जन जाति समाज के ही लोग थे। महेंद्र कर्मा मंच पर बैठे थे। जनजाति समाज के लोग महेन्द्र कर्मा को बस्तर का शेर कहते हैं। लेकिन उसी शेर की स्थिति मंच पर दयनीय हो रही थी जब जयराम रमेश ने व्यंग्य किया कि महेन्द्र कर्मा कभी बस्तर के शेर कहलाते थे लेकिन अब ये शेर बूढ़ा हो गया है। जयराम रमेश ने सुस्त शब्द का प्रयोग किया था। उनकी नजर में बस्तर के लोगों का शेर अब सुस्त हो गया था। मंच पर बैठे महेन्द्र कर्मा के चेहरे पर अनेक प्रकार के भाव आ जा रहे थे। लेकिन जयराम रमेश के संकेत स्पष्ट थे। वे क्या कहना चाहते थे यह तो वही जानें, संकेत यही था कि परिवर्तन की इच्छुक पार्टी में बूढ़े और सुस्त शेरों की कोई जरुरत नहीं है।

 


​लेकिन दण्ड़कारण्य पर कब्जा जमाए बैठे नक्सलवादी जानते थे कि महेन्द्र कर्मा न तो सुस्त शेर है और न ही बूढ़ा शेर। वह उसी प्रकार का फुर्तीला शेर है जिस प्रकार आज से दस साल पहले था। दरअसल, बस्तर के नक्सलवादियों को सोनिया गांधी के सेनापति अजीत जोगी से कोई खतरा नहीं है। नक्सलवादी जानते है कि यदि अजीत जोगी सत्ता में आते है तो दण्डकारण्य उनके लिए और भी सुरक्षित हो जाएगा जयराम रमेश जैसे लोगों से भी उन्हें खतरा नहीं है क्योंकि उनकी विकास यात्रा दिल्ली में संसद भवन से शुरु होकर 10 जनपथ पर जाकर समाप्त हो जाती है। नक्सलवादियों को असली खतरा परिवर्तन यात्रा के ठीक बीच में चल रहे महेन्द्र कर्मा से था। इसे बस्तर की त्रासदी ही कहना चाहिए कि महेन्द्र कर्मा को लेकर छत्तीसगढ़ में सोनिया गांधी के सेनापति अजीत जोगी भी असहज हो रहे थे और बस्तर के जंगलों में तान्डव नृत्य करते नक्सलवादी भी भयभीत हो रहे थे।

 

सोनिया कांग्रेस को महेन्द्र कर्मा नहीं चाहिए था और छत्तीसगढ़ के नक्सलवादियों को महेन्द्र कर्मा हर हालत में चाहिए था। २५ मई २०१३ को परिवर्तन यात्रा रेली के समाप्त होते ही अजीत जोगी, नवीन जिन्दल के एक मित्र के हेलीकॉप्टर में उड़ लिये और रायपुर पहंच गए और महेन्द्र कर्मा नक्सलवादियों के अड्डे दरबा घाटी में धर लिए गए। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट बताती है कि नक्सलवादियों ने महेन्द्र कर्मा  पर केवल 65 गोलियां ही नहीं चलाईं बल्कि उनके शरीर पर तेज धारदार हथियारों से 65 से भी अधिक बार वार किया। महेन्द्र कर्मा को मारने के बाद नक्सलवादी उनकी लाश पर नाचते रहे और पैशाचिक अट्टहास करते रहे। अपने साथियों को मरते देख महेन्द्र कर्मा खुद नक्सलवादियों के सामने यह कहते हुए आ गए थे कि मैं महेन्द्र कर्मा हूं। उनको लगा होगा इससे कम से कम उनके साथी तो बचेंगे। महेन्द्र कर्मा की यह बहादुरी जान लेने के बाद, अब तो जयराम रमेश को शायद पता चल ही गया होगा कि महेन्द्र कर्मा बूढ़े औऱ सुस्त शेर नहीं थे, बल्कि असली शेर थे जिन्होंने मरते समय भी शेर जैसा व्यवहार ही किया। जयराम रमेश को शायद यह भी अहसास हो गया होगा कि दिल्ली में चिड़ियाघर के शेर होते है, महेन्द्र कर्मा जैसे असली शेर बस्तर के जंगलों में ही पाए जाते है। महेन्द्र कर्मा की मृत्यु पर अजीत जोगी का चेहरा देखकर तरस ज्यादा आता था, गुस्सा कम। अजीत जोगी, महेन्द्र कर्मा की लाश को आगे करके छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति राज की संभावनाएं तलाश रहे थे।

 

इसके लिए नया नामकरण करना होगा शमशान घाट की राजनीति। शायद इसी प्रवृत्ति को सूंघ कर कई साल पहले २१ अगस्त २००८ को कर्मा ने रायपुर के प्रैस क्लब में कहा था -- सरकार तो आती जाती रहती है । सरकार के अलावा भी कोई चीज़ होती है सोचने के लिये । जहाँ मौत नाचती हो वहाँ राजनीति नहीं करनी चाहिये । लाशों पर राजनीति करने वालों को शर्म आनी चाहिये ।इस भाषण पर टिप्पणी करते हुये एक पत्रकार ने लिखा था कि हालाँकि उन्होंने अजीत जोगी का नाम तो नहीं लिया लेकिन जो कहा उसे सारे लोग समझ गये । लेकिन तब शायद महेन्द्र कर्मा को भी अन्दाज़ा नहीं होगा कि एक दिन अजीत जोगी उन्हीं की लाश पर राजनीति करना शुरु कर देंगे । पंजाबी में एक कहावत है कि अढाई घर तो डायन भी छोड़ देती है । लेकिन राजनीति की डायन तो शमशानघाट भी नहीं छोड़ती ।

 


​ महेन्द्र कर्मा की तलाश नक्सलवादी एक लम्बे अरसे से कर रहे थे। उन पर अनेक बार आक्रमण हुआ। चौथी बार हमला 2012 में हुआ था। वे बच गए थे औऱ उन्होंने अंग्रेजी भाषा के एक पत्रकार शुभ बागची को हंसते हुए बताया था कि मैं इतनी जल्दी समाप्त होने वाला नहीं हूं। मैं फिर वापस आऊंगा। वापस आने से उनका अभिप्राय कांग्रेस पार्टी में अपने विरोधियों को परे हटाते हुए मुख्य भूमिका में आने से था। ऐसा चमत्कार वे पहले भी कर चुके थे। शुभ बागची के ही शब्दों में 2003 में वे सोनिया कांग्रेस के भीतर अंग्रेजी में चीं चीं करने वाली लॉबी को धता बताकर विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने गए थे। दरअसल, महेन्द्र कर्मा दिल्ली की राजनीति की अंग्रेजी भाषा नहीं जानते थे। वे तो बस्तर की भाषाओं के खिलाड़ी थे। इसलिए बस्तर के लोग उन्हें घर का आदमी मानते थे।
         

 

ध्यान रहे अजीत जोगी के समर्थकों ने महेन्द्र कर्मा पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के एजेंट होने के आरोप लगाने शुरु कर दिये थे। महेन्द्र कर्मा का कांग्रेस में विरोध सलवा जुडम को लेकर था। दरअसल, जिन दिनों अजीत जोगी नक्सलवादियों को भटके युवा कह कर उनसे मेल-मिलाप की राजनीति कर रहे थे और मेल-मिलाप की उस धरती पर राजनैतिक वोटों की फसल काटने की कूटनीतिक चालें चल रहे थे, उन्हीं दिनों महेन्द्र कर्मा ने सलवा जुडम आंदोलन चलाया था। छत्तीसगढ़ में जो नक्सलवादी आंदोलन के इतिहास और उसके विकास से परिचित हैं, वे जानते है कि बस्तर की स्थानीय जनजातियों के लोग इस आंदोलन में कहीं नहीं हैं। आंदोलन का नियंत्रण, उसकी रणनीति आंध्रप्रदेश के तेलुगु भाषी नक्सलवादी नेता बनाते हैं और इस लड़ाई में बस्तर के निरीह जनजाति लोगों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। पूरी नक्सलवादी रणनीति की तीन शांखाएं हैं।

 

पहली शाखा भूमिगत रहकर सशस्त्र आक्रमण करती है। दूसरा शाखा संगम कहलाती है और इसके सदस्य प्रकट रुप से कार्य करती है और लोगों को भर्ती करके पहले भाग के हवाले कर देते हैं। तीसरी शाखा ऐसे लोगों की है जो दिल्ली में बैठकर नक्सलवादियों द्वारा की गई हत्याओं को वैचारिक आवरण पहनाते हैं और इस पूरी लड़ाई को वैचारिक आंदोलन सिद्ध करने का प्रयास करते हैं। यह शाखा नक्सलवादी गुरिल्ला लोगों के मानवाधिकार के लिए मीडिया के माध्यम से या कानून के माध्यम से लड़ाई लड़ती है। विनायक सेन जैसे लोग इस तीसरी शाखा का परोक्ष हिस्सा कहे जा सकते हैं । वे इन्हीं आरोपों के चलते कई साल तक जेल में रहे और अब सोनिया कांग्रेस ने उन्हें योजना आयोग का सलाहकार बनाकर आभा मंड़ित किया है। यह कथा योजना आयोग  के सलाहकार डा. विनायक सेन से होती हुई रायपुर में अजीत जोगी तक पहुंचती है और वहां से बस्तर के जंगल में छिपे नक्सलवादियों तक जाती है। लेकिन वहां ठीक दंतेश्वरी के पास महेन्द्र कर्मा खड़े हैं। महेन्द्र कर्मा जनजाति समाज के अधिकारों के लिए सलवा जुडम बना कर लड़ रहे है और योजना आयोग के सलाहकार बने बैठे विनायक सेन नक्सलवादी गुरिल्लाओं के मानवाधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।

 

ऐसे गुरिल्ला जो आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र से आकर बस्तर के जनजाति समाज को अपनी क्रांति में बकरे की तरह झोंक रहे हैं। अंतर केवल इतना ही है कि विनायक सेन और अजीत जोगी के पास अपनी लड़ाई लड़ने के लिए दिल्ली में वकीलों की फौज है जबकि बस्तर में खड़े महेन्द्र कर्मा के पास लड़ने के जज्बे के सिवा और कुछ नहीं है। महेन्द्र कर्मा कहा करते थे कि नक्सलवादियों की ताक़त उनकी बन्दूक़ में नहीं है बल्किउनकी नेटवर्किंग में है और यह ज़माना नेटवर्किंग का है । जिस नेता की नेटवर्किंग जितनी अच्छी ,वह उतना ही बड़ा नेता । सलवा जुड़े नक्सलियों की यही नेटवर्किंग तोड़ने की कोशिश कर रहा था ।कर्मा नक्सलियों की ताक़त के रहस्य को तो समझ गये थे , लेकिन जब वे उसको तोड़ने की कोशिश कर रहे थे तो उनकी अपनी ही पार्टी ने धोखा दे दिया ।
​माओ ने एक बार कहा था गुरिल्ला उस मछली की तरह है जो स्थानीय सहयोग के पानी में रहती है। यदि स्थानीय सहयोग समाप्त हो जाए तो मछली मर जाती है। माओ के सूत्र वाक्य को जयराम रमेश, चिदम्बरम, मनमोहन सिंह कितना समझ सके, यह कहा नहीं जा सकता लेकिन नक्सलवादी नेतृत्व और महेन्द्र कर्मा इस सूत्र को अच्छी तरह जान गए थे ।

 

आंध्रप्रदेश के नक्सलवादी, बस्तर के जनजाति समाज को ऐसा पानी बनाना चाहते हैं जिसमें वे आसानी से तैर सकें और विधि द्वारा स्थापित सत्ता को चुनौती दे सकें। कांग्रेस के भीतर बैठे दिग्विजय सिंह, जनार्दन द्विवेदी, मनमोहन सिंह, जयराम रमेश , पी. चिदम्बरम और न जाने और कितने तथाकथित बुद्धिजीवी इन मछलियों को अपने ही भटके हुए भाई बंधु कह कर इनको मुख्य धारा में लाने के प्रयासों को ही नक्सलवादी समस्या का समाधान बताते रहे अभी भी बता रहे है। उनके इन प्रयासों के चलते ही ये मछलियां धीरे-धीरे मगरमच्छ बन गईं। अजीत जोगी ने तो दूसरी ही राह पकड़ी। इन मगरमच्छों से अपने विरोधियों और आम जनता को डराने का धंधा शुरू कर दिया। इसे इतिहास का दुर्योग ही कहना चाहिए कि देश में जहां-जहां भी आतंकवाद पनपा, चाहे वह उत्तर-पूर्व हो या पंजाब या फिर असम का उल्फा , कांग्रेस ने इस आतंकवाद का इस्तेमाल सत्ता प्राप्ति के लिए हथियार के तौर पर किया। लेकिन महेन्द्र कर्मा बस्तर के धरती पुत्र थे। वे समझ गए थे कि जब तक बस्तर के जनजाति समाज रुपी पानी को इतना गर्म नहीं कर दिया जाता कि इन मगरमच्छों का वहां रहना मुश्किल हो जाए या फिर वे उस गर्म पानी में दम तोड़ दें, तब तक नक्सलवादी समस्या का समाधान नहीं हो सकता और न ही बस्तर पड़ोसी राज्य के मगरमच्छों के नियंत्रण से मुक्त हो पाएगा।

 

जब तक पानी गर्म नहीं होगा तब तक ये मगरमच्छ बस्तर के जन जाति समाज को प्रदूषित ही नहीं करते रहेंगे बल्कि इस जनजाति समाज की स्वतंत्र चेता छोटी-छोटी मछलियों को भी निगलते रहेंगे। महेन्द्र कर्मा का सलवा जुडम आंदोलन बस्तर के भीतर जनजाति समाज रुपी पानी को गर्म करने का आंदोलन था, ताकि नक्सलवादी मगरमच्छों को मारा जा सके। सलवा जुडम को बस्तर के लोग तो समझते थे लेकिन दिल्ली में समझने के लिए कोई तैयार नहीं था । महेन्द्र कर्मा ने कभी तल्ख़ लहजे में कहा था," लोगों ने बस्तर देखा तक नहीं, वे जानते तक नहीं हैं सलवा जुडूम क्या है ? वे जनजातियों को पहचानते तक नहीं हैं और ऐसे लोग बात करते हैं बस्तर की नक्सल समस्या पर। उन्होंने कहा बस्तर का जनजाति समाज त्रस्त हो चुका है और वो कह रहा है नक्सलियों से कि बहुत हो चुका चले जाईए, हमें हमारे हाल पर छोड़ दीजिए।"

 


उन्होंने सलवा जुडूम को स्पष्ट करते हुये कहा ,"सलवा जुडूम आदिवासियों की अपनी मर्जी से जीने की अपील है। छोटा-मोटा आंदोलन होता है तो सारे देश और दुनिया में हंगामा होता है लेकिन इतना बड़ा आंदोलन जनजाति समाज का चल रहा है और वे अकेले हैं। देश क्यों नहीं खड़ा होता उनके साथ। आखिर क्या गलत कर रहे हैं वो। हिंसा के खिलाफ बस्तर का अनपढ़ जनजाति समाज तनकर खड़ा है तो वो अपने दम पर। उसे किसी की मदद मिले या न मिले वो लड़ता रहेगा नक्सलियों से। आखिर ये उनके अस्तित्व की लड़ाई है। अगर वो हार गए तो हिंसा के सामने अहिंसा हार जाएगी, सारा देश हार जाएगा ।" लेकिन न तो महेन्द्र कर्मा को सोनिया कांग्रेस समझ सकी और न ही दिल्ली । सोनिया कांग्रेस को तो सत्ता चाहिये और उस सत्ता प्राप्ति में नक्सली सहायक हैं या अवरोध ? इसी के आधार पर विश्लेषण होता है । रहा प्रश्न दिल्ली का ,दिल्ली अंग्रेजी भाषा समझती है और वहां पानी गर्म करने के लिए भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। जबकि महेन्द्र कर्मा बस्तर में, स्थानीय जन जाति भाषा में, जंगल से ही बटोरे गए पत्तों और ईंधन से, पानी को गर्म करने में लगे हुए थे। जाहिर है जनजाति वेशभूषा में जनजाति समाज के एक व्यक्ति को बस्तर के जंगलों में आग जलाते देख कर दिल्ली में खलनायक समझ लिया गया। मौके का लाभ उठाकर नक्सलवादियों की तीसरी शाखा ने दिल्ली में विदेशी भाषा और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके सलवा जुडम की बीच चौराहे हत्या कर दी।

 


उपर रायपुर के प्रैस क्लब में दिये गये महेन्द्र कर्मा के जिस भाषण का उल्लेख है , उसी में उन्होंने कहा था,"नक्सलवाद आतंकवाद का दूसरा चेहरा है । आप इसे सामाजिक आर्थिक शोषण के नजरिये से नहीं बल्कि प्रजातंत्र के खिलाफ हिंसा के नज़रिए से देखिए। इसे तत्काल राष्ट्रीय समस्या घोषित किया जाना चाहिए। ये रमन सिंह या महेन्द्र कर्मा के अकेले के बस की समस्या नहीं है। नक्सलवाद के नाम पर लूट-खसौट और हिंसा का दौर समाप्त होना चाहिए। इसके लिए सबको राजनीतिक संकीर्णता को छोड़ एक साथ खड़ा होना होगा और जिस दिन सब एक साथ खड़े हो गए नक्सलवाद घंटों में नहीं मिनटों में मिट जाएगा ।"लेकिन इसे देश का दुर्भाग्य कहना चाहिये कि दिल्ली ने बस्तर की यह आबाज नहीं सुनी बल्कि दिग्विजय सिंह अभी भी नक्सलियों को केजरीवाल का रास्ता सुझा कर समस्या का समाधान खोज रहे हैं । वैसे तो जिस दिन दिल्ली में सलवा जुडूम की हत्या हुई उसी दिन स्पष्ट हो गया था कि दिल्ली जीत गई है और बस्तर हार गया है। इस हत्या से बस्तर में बैठे महेन्द्र कर्मा मानो शस्त्र विहीन हो गए हों।

 

पार्टी के भीतर के घातो प्रतिघातों से घायल, एक प्रकार से परित्यक्त, महेन्द्र कर्मा को दरबा घाटी में घेर कर मारना अब नक्सलवादियों के लिए कठिन काम नहीं था। लेकिन महेन्द्र कर्मा ने मौत का सामना एक बहादुर सेनापित की तरह किया और नक्सलवादियों ने अपनी परम्परा के अनुसार ही पेशेवर हत्यारों की तरह उनकी हत्या की। इसे क्या कहा जाए जो डा. रमन सिंह महेन्द्र कर्मा के सलवा जुडम आंदोलन का ड़टकर समर्थन कर रहे थे, कुछ लोग उन्हीं पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने महेन्द्र कर्मा को उचित सुरक्षा प्रदान नहीं की। महेन्द्र कर्मा की सुरक्षा तो सोनिया कांग्रेस ने उसी दिन छीन ली थी जिस दिन दिल्ली में सलवा जुडम की हत्या का जश्न मनाया जा रहा था। सलवा जुडम महेन्द्र कर्मा का भी सुरक्षा कवच था और बस्तर का भी। जब वह कवच हट गया तो महेन्द्र कर्मा कितने दिन तक बच सकते थे।


कोई इस भले मानुष अजीत जोगी की तो सुनो, जो महेन्द्र कर्मा की लाश का सौदा राष्ट्रपति राज से करने की कोशिश कर रहे हैं। जोगी से भी ज्यादा पहुंचे हुए एक और कांग्रेसी सज्जन हैं, जिन्होंने कहा महेन्द्र कर्मा को सच्ची श्रद्धांजलि यह होगी कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार स्थापित की जाए। खुदा का शुक्र है कि उसने यह नहीं कहा कि उसका मुख्यमंत्री अजीत जोगी को बना दिया जाए ताकि स्वर्ग में भी महेन्द्र कर्मा की आत्मा को शांति मिले। महेन्द्र कर्मा के साथ इससे बड़ा विश्वासघात क्या हो सकता है? महेन्द्र कर्मा को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि बस्तर में से नक्सलवाद समाप्त किया जाए और नक्सलवादियों की दूसरी और तीसरी शाखा की शिनाख्त कर ली जाए क्योंकि उनकी पहली शाखा तो भूमिगत ही रहती है। लेकिन सोनिया कांग्रेस क्या ऐसा कर पाएगी? वैसे केंद्र सरकार ने इस आक्रमण की जांच का काम एनआईए को दिया है देखना यह है कि क्या योजना आयोग के सलाहकार की मांद में बैठे विनायक सेन से या फिर महेन्द्र कर्मा की लाश के नाम पर राष्ट्रपित राज की गुहार लगाने वाले अजीत जोगी से भी पूछताछ करने की हिम्मत जुटा पाएगी? महेन्द्र कर्मा की शहादत को शत शत नमन।

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