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जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला   देश की सुरक्षा की दृष्टी से बनी कंपनी मेटल मेटल कॉरपोरेशन ऑफ  इण्डिया (हिदुस्तान जिंक) के विनिवेश के मामले में सीबीआई कार्यालय जोधप... Read more
सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो   चित्तौडग़ढ़। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पेंशन योजनाओं में जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है या नहीं यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर ... Read more
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक गुजरात में ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्य करते हुए, साथ में सहसंयोजक श्री गनी कुरैशी जी भी है। Read more
 ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें? ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें?     मनमोहन सिंह क्यों मौन रहे चीन के सामनें?   पिछले दिनों हमारें प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने डरबन में ब्रिक्स शिखर... Read more
सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं  लद्दाख में चीन की जन मुक्ति सेना की घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र के बीस किलोमीटर ( पहले सूचना यह थी कि दस किलोमीटर के अन्दर) अन्दर आकर अपनी चौकिय... Read more
अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी   4 से 7 अप्रैल तक उज्जैन की कालिदास वीथिका में उज्जैनवासी देख सकेंगे माता-पिता, बुज़ुर्गों पर केन्द्रित मार्मिक कविता पोस्टर प्... Read more
एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप... Read more
 नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें   वर्तमान में चल रहे लोकसभा चुनाव पिछले सभी आम चुनावों से कई दृष्टियों से भिन्न भी हैं Read more
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ओडीशा में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की साज़िश भारत सरकार का एक अल्पसंख्यक आयोग है । भारत सरकार का मानना है कि इस देश में अल्पसंख्यक सदा ख़तरे से घिरे रहते हैं । इस देश के लोग अल्पसंख्यकों को नष... Read more
जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जून और जुलाई का महीना भारत के राष्ट्रवादी आन्दोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । २३ जून १९५३ को डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर की ज... Read more
 रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान का पवित्र महीना शुरु हो गया है । यह महीना हिजरी सम्वत का नौवाँ मास है और ईस्वी सम्वत के हिसाब से नौ जुलाई को शुरु हुआ है । इस महीने में मुसल... Read more
भारतीय भाषाओं का मोर्चा:गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा १०५ और १०७ के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले २२५ दिनों से स... Read more
खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले मुंबई। आठ वर्षों से रोजी रोटी के संकट से झुझ रही बार बालाओं के 'डांस बारÓ को लेकर उच्चन्यायालय के फैसले ने बार बालाओं की चमक लौटा दी ... Read more
पिता के बाद पुत्र का कारनामा पिता के बाद पुत्र का कारनामा पीडि़त महिला फरियाद लेकर पहुंची पुलिस की शरण में इंदौर। आसाराम के बाद अब उनका लड़का नारायण सांई के खिलाफ भी एक परिवाद पेश किया जा रहा है। यह पर... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ जिसने सहयोग किया उसी की पीठ पर छूरा घोपा संजय ने नकली बाबा के कारनामों से लोगों में भारी रोष औंकारेश्वर। मां नर्मदा बने एक आश्रम में बने चौ... Read more
आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी राधेश्याम सोलंकी,भरत ठाकुर, जयंत जोशी,अशोक पाटीदार,हेमंत चतुर्वेदी,मनीष जैन कर रहे हैं एसटीएफ को  गुमराह भोपाल। ईवमिरेकल ज्वेलर्स कंपनी... Read more
क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास  क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास जगदीश जोशी 'प्रचंड  ' नई दिल्ली। काला धन स्वीस बैंक में जमा होने व नेताओं को घेरने की बात पर आंदोलन खड़ा कर 'आप ' के सर्वेसर... Read more
दो लाख करोड़ का खनन घोटाला दो लाख करोड़ का खनन घोटाला देवास जिले में रेत माफिया का राज भोपाल। शिवराज के राज में माइनिंग माफिया ने बेल्लारी की लूट के रिकार्ड भी तोड़ दिए हैं। बीते 10 साल में मप्र... Read more
कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में भोपाल। इस बार के चुनाव में मध्यप्रदेश पर कांग्रेस आलाकमान की विशेष निगाह है Read more
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। Read more
जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा   पीडि़त सुरतानसिंह राजेस पयासी (वकील) यदि ऐसा मा... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 करोड़ों की जमीन से आया रुपया ब्याजखोरी में लगाया औंकारेश्वर। लाखों रुपया एठने वाले औंकारेश्वर के कथित Read more
देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल ठगौरों का महानगर बनते जा रहे इंदौर में प्रशासन कोई खास कार्यवाही नहीं कर पाया अलबत्ता Read more
देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर आखिर यह भरत ठाकुर,बाबूलाल जयंत,मनीष कौन है? राधेश्याम सोलंकी,         Read more
मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... उत्कृष्ट को सजा और... निकृष्ट को  आशीर्वाद की छाया   -सेवानिवृत को भी बना  दिया संकुल प्रभारी  ... Read more
हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी अमिताभ,मुलायमसिंह और सोनिया के पास है क़्वींटल सोना! आप पार्टी के सर्वे सर्वा अरविन्द केजरीवाल व योग गुरु बाबा रामदेव पर अपनी-अपनी दुकान चमकाने... Read more
सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार निर्धारित किराए से अधिक वसूली होती है निजी बसों में (रतलाम कार्यालय) रतलाम । एक दशक पहले प्रदेश में सड़क परिवहन निगम की बसें बंद होने के बाद ... Read more
सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना राधेश्याम सोलंकी, भरत, जयंत जोशी  मनीष जैन एसटीएफ के निशाने पर..   जगदीश जोशी 'प्रचंड ' भोपाल। आम आदमी को फटाफट अम... Read more
मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत युवक से अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर ले रहा था पांच हजार की रिश्वत, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त भी संदेह के घेरे ... Read more
कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार  कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार बड़े नेताओं का अभाव दूसरा पंक्ति में नेताओं की कतार रतलाम से अनिल पांचाल विधानसभा चुनाव सिर पर है... Read more
पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण जम्मू कश्मीर में पुँछ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच और छह अगस्त की मध्य रात्रि को नियंत्रण रेखा के भीतर गश्त लगा रही भारतीय सैनिक टुकड़ी पर... Read more
कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश रतलाम से अनिल कुमार रतलाम। हाल ही में जनता को लम्बे समय के बाद दर्शन देकर लौटे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लगभग शहर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बि... Read more
आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी 67 वां स्वाधीनता दिवस स्वतंत्रता दिवस की क्रमवार गिनती में एक और वर्ष का इजाफा,सबकुछ भुलकर जश्न मनाने का एक और भारतीय दिन...लेकिन क्या सही म... Read more
तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन कभी समाप्त नहीं हुआ। कभी प्रत्यक्ष और कभी प्रच्छन्न उसकी तपश बीजिंग तक पहुंचती ही रही। 2009 में स्वतंत्रता के लिए सं... Read more
तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली स्थित दीन दयाल शोंध संस्थान में आयोजित हुई जिसमें 19 प्रांतों क... Read more
तिब्बतःएक अवलोकन तिब्बतःएक अवलोकन क्षेत्रफल : २५ लाख वर्ग कि० मी० जो वर्तमान चीन के कुल क्षेत्रफल का २६.०४ प्रतिशत हैं। राजधानी : ल्हासा जनसंख्या : ६० ला... Read more
आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं    'आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं' भोपाल। आरएसएस अथवा किसी ऐसे दलको अयोध्या में भगवान राम का... Read more
चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव नई दिल्ली । आगामी लोकसभा चुनाव में सत्त्ता सुख भोगने का सपना सजाए बैठी भाजपा की राह में रोडे अटकाने वालों की कमी नहीं है। भाजपा का अंतरकलह पार... Read more
पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब वर्तमान में पत्रकारिता हाशिये पर है और मीडिया शब्द चलन में है.पत्रकारिता के गूढ़ अर्थ और मीडिया की व्यापकता को रेखांकित करता मध्यप्रदेश क... Read more
राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में देखने, सुनने और बतियाने के बाद किसी भी एंगल से वे राजनेता नहीं लगते। कपाल पर बड़ा सा सिंदूरी टीका, सिर और दाड़ी के रंगे हुए सुनहरी काले गहरे ब... Read more
कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना धार :बगैरअनुमति कालोनी विकास करने वालों कालोनाईजरों पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की गाज लगातार गिर रही है। इसी कड़ी में धार शहर में बगैर विक... Read more
जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! नई दिल्ली: धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देना आज के समय में काफी आसान है, क्योंकि हम देशवासी दिमाग से नहीं बल्कि दिल से धर्म को जोड़कर रखते है... Read more
ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है   इंदौर।मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया प्रदेष कांग्रेस में जान फंकने में लगे है लेकिन प्रदेष के कई पदाधिकारियों... Read more
अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसलाएत पंचमी के दिन धार जिले की भोजशाला में हंगामे और उपद्रव के बीच पूजा के साथ नमाज अता फरमाने की रस्म पूरी हो जाने पर म... Read more
बोले तो आसाराम बोले तो आसाराम 90 के दशक में धर्मप्रेमी जनता के लिए आशा की किरण बन कर उभरे आसाराम बापू एक दशक बाद ही बदनामी के दाग अपनी आभा पर लगवा चुके हैं। आश्रम में बच्चो... Read more
बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज मंदसौर।(धर्मवीर रत्नावत) जिस तरह देश में मंदसौर अफीम उत्पादन, तस्करी के लिए मशहूर है, उसी तरह नीमच, मंदसौर, रतलाम के कुछ खास इलाके भी बाछ... Read more

असम दंगो के लिए नमो को घेरनें वाली ममता बनर्जी तब कहाँ थी जब 2012 के भयावह दंगो को गोगोई ने अस्थाई दंगे बताया था!!! देश आज भी समझ नहीं पा रहा कि “ये अस्थाई दंगे क्या होतें हैं? वर्तमान घटना क्या उसका ही परिणाम नहीं है?

 
असम में एक बार फिर संघर्ष की स्थिति बन गई है. इस संघर्ष को वर्ग संघर्ष नहीं कह सकते, जातीय या धर्म आधारित संघर्ष भी नहीं कह सकते और इस संघर्ष को दंगे तो बिलकुल ही नहीं कह सकते हैं!! हाँ इसे नागरिकों का अपराधियों से संघर्ष अवश्य ही कहा जा सकता है, और यही इस संघर्ष की सही परिभाषा है. तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेसी राज्य सरकार न जानें क्यों इस संघर्ष को इस सरल परिभाषा के अलावा कई कई प्रकार के नाम-बदनाम देती रहती है!! और यहीं से समस्या का मूल है!! असम के चिर आदिवासी जाति बोडो के लोगों का बहुधा ही यहाँ आकर बलात बस गए बांग्लादेशी मुसलमानों से संघर्ष हो जाता है. बोडो लोगों का कहना है कि ये घुसपैठिये बांग्लादेश से आकर उनकी भूमि और संपत्तियों पर पर कब्जा कर रहे हैं. लोकसभा चुनाव २०१४ में असम में इस यह मुद्दा ज्वलंत रहा और सर्वाधिक चर्चा में है. 
 
               
 स्वाभाविक ही एक राष्ट्रवादी व्यक्ति होनें के नाते और राष्ट्रीय मुद्दों पर बेबाकी और बिना पूर्वग्रह के अपनें मत को व्यक्त करनें वाले नरेन्द्र मोदी ने पिछले चुनाव अभियान के दौरान असम में कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आते हैं, तो बांग्लादेश के घुसपैठियों को "अपने बैग तैयार रखने" चाहिए!! नरेन्द्र मोदी ने बड़ी ही बेबाकी से यह कहते घुसपैठियों के वोटों का जरा सा भी मोह न रखकर अपनी स्पष्टवादिता को प्रकट किया था. नरेन्द्र मोदी भी अन्य राजनीतिज्ञों की तरह इतना सामान्य ज्ञान तो रखतें ही हैं कि असम के जनजातीय क्षेत्रों में आकर बलात बस गए इन घुसपैठियों ने बड़ी मात्रा में राशन कार्डों के माध्यम वोटिंग पावर हासिल कर लिया है और ऐसा कहनें से इन घुसपैठियों के ही नहीं बल्कि वहां इन्हें शरण दे रहे तथाकथित भारतीय मुसलमानों के वोटों से भी उन्हें हाथ धोना पड़ेगा. अवैध घुसपैठियों को बाहर जानें की चेतावनी देनें वालें नरेन्द्र मोदी को शेष राष्ट्र ने जहां शुभेक्षा और प्रशंसा प्रकट की वहीँ चिर तुष्टिकरण की लत पर जी रहे बहुत से राजनीतिज्ञों और दलों ने ने नमो को बेतरहदोषी करार देनें और दंगे भड़काने के आरोपों से घेरने का असफल प्रयास किया.
 
           
असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई हो या प.बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या इनकी जमात के अन्य छदम धर्मनिरपेक्षता वादी नेता, इन्होनें असम के हालिया दंगों के लिए नरेन्द्र मोदी के बयान को आश्चर्यजनक रूप दोषी ठहराया है!! बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रति आर एस एस और उसके भाजपा सहित सभी सम्वैचारिक संगठनों का विचार और लाइन स्पष्ट रही है और वह लाइन भारतीय संविधान की मूल आत्मा से सौ प्रतिशत सरोकार रखती है. देश प्रसन्न है यह देखकर की भाजपा और नमो ने वोटों का लालच न रखते हुए अपनें वैचारिक आग्रह को मंचों से स्पष्ट प्रकट किया किन्तु ये तथाकथित तुष्टिकरण की राजनीति के अफीमची नमो की आलोचना करनें के मोह में देश हित को भी अनदेखा करनें से नहीं चूक रहें हैं.
 
आइये जानतें हैं क्या है असम समस्या के मूल में-
 
यह तो सदा से स्पष्ट और सर्वविदित तथ्य रहा है कि असम गण परिषद के राजनैतिक वर्चस्व को समाप्त करने के लिए कांग्रेस ने असम में बांग्लादेशी घुसपेठियों की बस्तियां बसाने का खतरनाक, आत्मघाती, देशद्रोही और घिनौना खेल प्रारम्भ किया. इन स्थानीय कांग्रेसी नेताओं के दम पर ही ये परजीवी असम के स्थानीय परिवारों में कुछ समय के लिए रहकर राशनकार्ड में अपना नाम जुड़वा लेते है और फिर अलग होकर नया राशनकार्ड हासिल कर लेते है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में तीन करोड़ बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे है. कुछ जमीनी संगठन इस संख्या का वास्तविक आंकड़ा पांच करोड़ तक बतातें है और इसके समर्थन में समुचित तर्कसंगत तथ्य भी देतें हैं. वहीं आईबी की ख़ुफ़िया रिपोर्ट के मुताबिक़ अभी भारत में करीब डेढ़ करोड़ से अधिक बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं जिसमें से 80 लाख पश्चिम बंगाल में और 50 लाख के लगभग असम में मौजूद हैं. वहीं बिहार के किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया जिलों में और झारखण्ड के साहेबगंज जिले में भी लगभग 4.5 लाख बांग्लादेशी रह रहे हैं.3.75 लाख बांग्लादेशी त्रिपुरा हैं. नागालैंड और मिजोरम भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए शरणस्थली बने हुए हैं.
 
 
1991 में नागालैंड में अवैध घुसपैठियों की संख्या जहाँ 20 हज़ार थी वहीं अब यह बढ़कर ८० हज़ार से अधिक हो गई है. असम के २७ जिलों में से 8 में बांग्लादेशी मुसलमान बहुसंख्यक बन चुके हैं. 1901 से 2001 के बीच असम में मुसलामानों का अनुपात 15,03 प्रतिशत से बढ़कर 30.92 प्रतिशत हो गया है. और तो और एन केंद्र सरकार की नाक के नीचें दिल्ली में लगभग इन अवैध बांग्लादेशियों का आंकड़ा चार लाख तक पहुँच गया है. ये घुसपैठियों जहाँ भी रहते हैं वहां का प्रशासनिक और सामाजिक ताना बाना साशय ध्वस्त करनें का इन्हें प्रशिक्षण जैसा मिला होता है, और ये उस काम को बड़ी होशियारी से करते हैं.
 
               
असम में 42 से अधिक विधानसभा क्षेत्र ऐसे हो गए हैं जहां बांग्लादेशी घुसपैठिये राजनैतिक रूप से निर्णायक हो गए है. लूट, हत्या, बोडो लड़कियां भगाकर जबरन धर्मांतरण और बोडो जनजातियों की जमीन पर अतिक्रमण करना इनका रोजमर्रा का काम हो गया है जिसके कारण सम्पूर्ण असम का सामाजिक ताना बाना ध्वस्त होने के कगार पर आ रहा है. ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर बोडो क्षेत्र है, जहां 1975 के आंदोलन के बाद बोडो स्वायत्तशासी परिषद् की स्थापना हुई, जिससे कोकराझार, बक्सा, चिरांग और उदालगुड़ी प्रभावित रहे है. बोडो बंधू लगातार बांग्लादेशी घुसपैठियों के हमलों का शिकार होते आए हैं. घुसपैठियों द्वारा सतत की जा रही धर्म आधारित हिंसा को क्षेत्र के विद्रोही आतंकवादी संगठन मुस्लिम यूनाईटेड लिबरेशन टाईगर्स ऑफ असम (मुलटा) से समर्थन मिलता है और मुस्लिमों की भावनाएं भड़काने में ऑल माईनोरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (आमसू) का भी हाथ रहता है. उल्लेखनीय है कि आमसू प्रदेश सरकार से समय समय पर प्रत्यक्ष रूप से पोषित और कृतार्थ होती रही है. शासन के इस तुष्टिकरण वाले आचरण के कारण भी इस क्षेत्र में बांग्लादेशी मुस्लिमों और हिंदु समय समय आमने सामने की मुद्रा में आते रहे है. प्रश्न यह है कि प्रदेश सरकार ने तब के अनेकों मौको पर इस आसन्न संकट को जो कि प्रत्यक्षतः दिख रहा था; क्यों नहीं पहचाना!!
 
         
असम की गोगोई सरकार घुसपैठियों को प्राथमिकता और तुष्ट करनें के प्रयास में बोडोलैण्ड स्वायत्तशासी परिषद् को मात्र 300 करोड़ रुपये की बजट सहायता दे रही है है जबकि हुए समझौते के अनुसार आबादी के अनुपात से उन्हें 1500 करोड़ रुपये की सहायता मिलनी चाहिए थी. केंद्रीय सहायता के लिए भी बोडो स्वायत्तशासी परिषद को प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र को आवेदन भेजना पड़ता है जिसे प्रदेश सरकार विलंब से भेजती है और केंद्र में सुनवाई नहीं होती. इसके अलावा बोडो जनजातियों को असम के ही दो इलाकों में मान्यता नहीं दी गयी है. कारबीआंगलोंग तथा नार्थ कछार हिल में बोडो को जनजातीय नहीं माना जाता और न ही असम के मैदानी क्षेत्रों में. जबकि बोडो जनजातियों के लिए असम में स्वायत्त परिषद् बनी और बाकी देश में बोडो अनुसूचित जनजाति की सूची में है. 10 फरवरी, 2003 को एक बड़े आंदोलन के बाद असम और केंद्र सरकार ने माना था कि यह विसंगति दूर की जाएगी लेकिन इस बीच अन्य जनजातियों जैसे- हाजोंग, गारो, दिमासा, लालुंग आदि को असम के सभी क्षेत्रों में समान रूप से अनुसूचित जनजाति की सूची में डाल दिया गया सिवाय बोडो लोगों के. जनजातीय समीकरणों का यह पूरा का पूरा आकलन शुद्ध राजनीति आधारित है और कांग्रेस ने वोटों के सेट अप को अपनें अनुसार जमानें और सत्ता में बनें रहनें के लिए इस हेतु सत्ता का भरपुर दुरुपयोग किया. 
 
जुलाई 2012 के भयावह दंगो को गोगोई ने अस्थाई दंगे बताया था!! देश आज भी हैरान है कि ये अस्थायी दंगे क्या होतें हैं??!!
 
स्पष्ट है कि जुलाई 2012 के भयानक और विनाशकारी दंगों को लेकर गोगोई सरकार का रूख बेहद लचर और तदर्थता वादी रहा. तब घुसपैठिये बांग्लादेशियों ने बड़े पैमानें पर जनजातीय लोगों की नृशंस हत्याओं और पाशविक अत्याचार कर ओन्ताईबाड़ी, गोसाईंगांव नामक इलाके में बोडो जनजातीय समाज के अत्यंत प्राचीन और प्रतिष्ठित ब्रह्मा मंदिर को जला कर सामाजिक समरसता और शांति भंग करने का साशय प्रयास किया गया था; इसकी बोडो समाज में स्वाभाविक तौर पर गगुस्साई प्रतिक्रिया होनी ही थी. यद्दपि बोडो स्वायतशासी क्षेत्र के चार जिलों धुबरी, बोंगाईगांव, उदालगुड़ी और कोकराझार में बोडो बड़ी संख्या में हैं तथापि उनसे सटे धुबरी जिले की अधिकांश जनसंख्या बांग्लादेशी मुस्लिमों की है. वहां कोकराझार की प्रतिक्रिया में हिंदू छात्रों के एक होस्टल को जला दिया गया और 24 जुलाई को इनकी एक भीड़ ने राजधानी एक्सप्रेस पर हमला कर दिया था.
 
जुलाई 2012 में इस बांग्लादेशी मुस्लिमों की हिंसा 400 गांवों तक फैल चुकी थी और भारत के देशभक्त और मूल जनजातीय नागरिक अपने ही देश में विदेशी घुसपैठियों के हमलों से डर कर शरणार्थी बनने पर मजबूर हो गए थे. घोर आश्चर्य ही था कि असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई इन भयानकतम दंगो को अस्थायी दंगे या हिंसा बता रहे थे. देश के बुद्धिजीवी दंगो के सम्बन्ध में इस नए शब्द या टर्म का अर्थ तब भी खोज रहे थे और आज भी खोज रहें हैं अब स्वयं गोगोई ही बताएं कि वर्ष 2012 के अस्थाई दंगे क्या थे? देश के तथाकथित बुद्धिजीवी और प्रगतिशील लोग इस अनोखे किन्तु घृणित, भावनाशून्य, पैशाचिक शब्द का अर्थ न खोज सके तो इसका उच्चारण करने वाले व्यक्ति से पूछे!! गोगोई के सामनें समूचे राष्ट्र का यह यक्ष प्रश्न खड़ा है कि असम में हाल ही में हुए दंगे उन अस्थाई दंगों का स्थाई संस्करण है या उनकी अकर्मण्यता या फिर केवल सत्ता में बनें रहनें के घृणित खेल-खिलवाड़ की अगली क़िस्त!!

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