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जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला   देश की सुरक्षा की दृष्टी से बनी कंपनी मेटल मेटल कॉरपोरेशन ऑफ  इण्डिया (हिदुस्तान जिंक) के विनिवेश के मामले में सीबीआई कार्यालय जोधप... Read more
सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो   चित्तौडग़ढ़। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पेंशन योजनाओं में जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है या नहीं यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर ... Read more
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक गुजरात में ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्य करते हुए, साथ में सहसंयोजक श्री गनी कुरैशी जी भी है। Read more
 ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें? ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें?     मनमोहन सिंह क्यों मौन रहे चीन के सामनें?   पिछले दिनों हमारें प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने डरबन में ब्रिक्स शिखर... Read more
सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं  लद्दाख में चीन की जन मुक्ति सेना की घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र के बीस किलोमीटर ( पहले सूचना यह थी कि दस किलोमीटर के अन्दर) अन्दर आकर अपनी चौकिय... Read more
अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी   4 से 7 अप्रैल तक उज्जैन की कालिदास वीथिका में उज्जैनवासी देख सकेंगे माता-पिता, बुज़ुर्गों पर केन्द्रित मार्मिक कविता पोस्टर प्... Read more
एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप... Read more
 नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें   वर्तमान में चल रहे लोकसभा चुनाव पिछले सभी आम चुनावों से कई दृष्टियों से भिन्न भी हैं Read more
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ओडीशा में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की साज़िश भारत सरकार का एक अल्पसंख्यक आयोग है । भारत सरकार का मानना है कि इस देश में अल्पसंख्यक सदा ख़तरे से घिरे रहते हैं । इस देश के लोग अल्पसंख्यकों को नष... Read more
जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जून और जुलाई का महीना भारत के राष्ट्रवादी आन्दोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । २३ जून १९५३ को डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर की ज... Read more
 रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान का पवित्र महीना शुरु हो गया है । यह महीना हिजरी सम्वत का नौवाँ मास है और ईस्वी सम्वत के हिसाब से नौ जुलाई को शुरु हुआ है । इस महीने में मुसल... Read more
भारतीय भाषाओं का मोर्चा:गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा १०५ और १०७ के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले २२५ दिनों से स... Read more
खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले मुंबई। आठ वर्षों से रोजी रोटी के संकट से झुझ रही बार बालाओं के 'डांस बारÓ को लेकर उच्चन्यायालय के फैसले ने बार बालाओं की चमक लौटा दी ... Read more
पिता के बाद पुत्र का कारनामा पिता के बाद पुत्र का कारनामा पीडि़त महिला फरियाद लेकर पहुंची पुलिस की शरण में इंदौर। आसाराम के बाद अब उनका लड़का नारायण सांई के खिलाफ भी एक परिवाद पेश किया जा रहा है। यह पर... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ जिसने सहयोग किया उसी की पीठ पर छूरा घोपा संजय ने नकली बाबा के कारनामों से लोगों में भारी रोष औंकारेश्वर। मां नर्मदा बने एक आश्रम में बने चौ... Read more
आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी राधेश्याम सोलंकी,भरत ठाकुर, जयंत जोशी,अशोक पाटीदार,हेमंत चतुर्वेदी,मनीष जैन कर रहे हैं एसटीएफ को  गुमराह भोपाल। ईवमिरेकल ज्वेलर्स कंपनी... Read more
क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास  क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास जगदीश जोशी 'प्रचंड  ' नई दिल्ली। काला धन स्वीस बैंक में जमा होने व नेताओं को घेरने की बात पर आंदोलन खड़ा कर 'आप ' के सर्वेसर... Read more
दो लाख करोड़ का खनन घोटाला दो लाख करोड़ का खनन घोटाला देवास जिले में रेत माफिया का राज भोपाल। शिवराज के राज में माइनिंग माफिया ने बेल्लारी की लूट के रिकार्ड भी तोड़ दिए हैं। बीते 10 साल में मप्र... Read more
कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में भोपाल। इस बार के चुनाव में मध्यप्रदेश पर कांग्रेस आलाकमान की विशेष निगाह है Read more
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। Read more
जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा   पीडि़त सुरतानसिंह राजेस पयासी (वकील) यदि ऐसा मा... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 करोड़ों की जमीन से आया रुपया ब्याजखोरी में लगाया औंकारेश्वर। लाखों रुपया एठने वाले औंकारेश्वर के कथित Read more
देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल ठगौरों का महानगर बनते जा रहे इंदौर में प्रशासन कोई खास कार्यवाही नहीं कर पाया अलबत्ता Read more
देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर आखिर यह भरत ठाकुर,बाबूलाल जयंत,मनीष कौन है? राधेश्याम सोलंकी,         Read more
मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... उत्कृष्ट को सजा और... निकृष्ट को  आशीर्वाद की छाया   -सेवानिवृत को भी बना  दिया संकुल प्रभारी  ... Read more
हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी अमिताभ,मुलायमसिंह और सोनिया के पास है क़्वींटल सोना! आप पार्टी के सर्वे सर्वा अरविन्द केजरीवाल व योग गुरु बाबा रामदेव पर अपनी-अपनी दुकान चमकाने... Read more
सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार निर्धारित किराए से अधिक वसूली होती है निजी बसों में (रतलाम कार्यालय) रतलाम । एक दशक पहले प्रदेश में सड़क परिवहन निगम की बसें बंद होने के बाद ... Read more
सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना राधेश्याम सोलंकी, भरत, जयंत जोशी  मनीष जैन एसटीएफ के निशाने पर..   जगदीश जोशी 'प्रचंड ' भोपाल। आम आदमी को फटाफट अम... Read more
मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत युवक से अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर ले रहा था पांच हजार की रिश्वत, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त भी संदेह के घेरे ... Read more
कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार  कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार बड़े नेताओं का अभाव दूसरा पंक्ति में नेताओं की कतार रतलाम से अनिल पांचाल विधानसभा चुनाव सिर पर है... Read more
पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण जम्मू कश्मीर में पुँछ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच और छह अगस्त की मध्य रात्रि को नियंत्रण रेखा के भीतर गश्त लगा रही भारतीय सैनिक टुकड़ी पर... Read more
कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश रतलाम से अनिल कुमार रतलाम। हाल ही में जनता को लम्बे समय के बाद दर्शन देकर लौटे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लगभग शहर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बि... Read more
आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी 67 वां स्वाधीनता दिवस स्वतंत्रता दिवस की क्रमवार गिनती में एक और वर्ष का इजाफा,सबकुछ भुलकर जश्न मनाने का एक और भारतीय दिन...लेकिन क्या सही म... Read more
तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन कभी समाप्त नहीं हुआ। कभी प्रत्यक्ष और कभी प्रच्छन्न उसकी तपश बीजिंग तक पहुंचती ही रही। 2009 में स्वतंत्रता के लिए सं... Read more
तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली स्थित दीन दयाल शोंध संस्थान में आयोजित हुई जिसमें 19 प्रांतों क... Read more
तिब्बतःएक अवलोकन तिब्बतःएक अवलोकन क्षेत्रफल : २५ लाख वर्ग कि० मी० जो वर्तमान चीन के कुल क्षेत्रफल का २६.०४ प्रतिशत हैं। राजधानी : ल्हासा जनसंख्या : ६० ला... Read more
आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं    'आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं' भोपाल। आरएसएस अथवा किसी ऐसे दलको अयोध्या में भगवान राम का... Read more
चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव नई दिल्ली । आगामी लोकसभा चुनाव में सत्त्ता सुख भोगने का सपना सजाए बैठी भाजपा की राह में रोडे अटकाने वालों की कमी नहीं है। भाजपा का अंतरकलह पार... Read more
पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब वर्तमान में पत्रकारिता हाशिये पर है और मीडिया शब्द चलन में है.पत्रकारिता के गूढ़ अर्थ और मीडिया की व्यापकता को रेखांकित करता मध्यप्रदेश क... Read more
राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में देखने, सुनने और बतियाने के बाद किसी भी एंगल से वे राजनेता नहीं लगते। कपाल पर बड़ा सा सिंदूरी टीका, सिर और दाड़ी के रंगे हुए सुनहरी काले गहरे ब... Read more
कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना धार :बगैरअनुमति कालोनी विकास करने वालों कालोनाईजरों पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की गाज लगातार गिर रही है। इसी कड़ी में धार शहर में बगैर विक... Read more
जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! नई दिल्ली: धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देना आज के समय में काफी आसान है, क्योंकि हम देशवासी दिमाग से नहीं बल्कि दिल से धर्म को जोड़कर रखते है... Read more
ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है   इंदौर।मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया प्रदेष कांग्रेस में जान फंकने में लगे है लेकिन प्रदेष के कई पदाधिकारियों... Read more
अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसलाएत पंचमी के दिन धार जिले की भोजशाला में हंगामे और उपद्रव के बीच पूजा के साथ नमाज अता फरमाने की रस्म पूरी हो जाने पर म... Read more
बोले तो आसाराम बोले तो आसाराम 90 के दशक में धर्मप्रेमी जनता के लिए आशा की किरण बन कर उभरे आसाराम बापू एक दशक बाद ही बदनामी के दाग अपनी आभा पर लगवा चुके हैं। आश्रम में बच्चो... Read more
बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज मंदसौर।(धर्मवीर रत्नावत) जिस तरह देश में मंदसौर अफीम उत्पादन, तस्करी के लिए मशहूर है, उसी तरह नीमच, मंदसौर, रतलाम के कुछ खास इलाके भी बाछ... Read more

-मनोज कुमार
वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया विष्लेषक, भोपाल

पेडन्यूज को लेकर लंबे समय से मीडिया कटघरे में है। उसके लाख जतन करने बाद भी वह आरोपों से बरी नहीं हो पाया है। कानून बन गया, जांच समिति बन गयी लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। हाल में जिंदल और जी के बीच जो कुछ हुआ, वह मीडिया के के लिए लज्जाजनक है। इस हालात पर गौर करें तो पेडन्यूज कर्इ मायनों में इससे बेहतर जान पड़ता है।
 पेडन्यूज में नैतिक नहीं है लेकिन पेडन्यूज और ब्लेकमैलिंग के बीच का फर्क जानना और समझना होगा। पेड न्यूज का सामान्य सा अर्थ न्यूज छापने के लिए भुगतान करना। अपनी तारीफ की खबर छपवाने अथवा अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए भांड या मिरासी की तर्ज पर खबर लिखने के लिए भुगतान करने की पेडन्यूज की श्रेणी में रखा जाता है। पेडन्यूज प्रकि्रया में कोर्इ पक्ष दबाव में नहीं होता है। पैसा पाने वाला इस बात से खुष होता है कि उसकी मर्जी के अनुरूप भुगतान मिल रहा है और पैसा देने वाला इस बात से प्रसन्न रहता है कि उसने पैसा देकर मीडिया को खरीद लिया है। पेडन्यूज आपसी समन्वय का मामला भी माना जा सकता है। इस पूरी प्रकि्रया में किसी को नुकसान होता है तो वह है पाठक। पाठक किसी अखबार अथवा टेलीविजन की सेवा लेने के लिए भुगतान करता है और इसके बदले में वह निष्पक्ष एवं तटस्थ सूचना, खबर चाहता है किंतु पेडन्यूज के चलते यह संभव नहीं हो पाता है।
पेडन्यूज को मीडिया ने कभी नैतिक नहीं माना और इसी के चलते लगातार पेडन्यूज के खिलाफ माहौल बना हुआ है। जांच कमेटियां बन गयी और पेडन्यूज को रोकने के लिए व्यापक कार्यवाही की जाने लगी। जिंदल एवं जी के बीच जो कुछ घटा वह पेडन्यूज का मामला नहीं है अपितु यह पेडन्यूज से आगे की कहानी है जिसे ब्लेकमेलिंग कहा जाता है। जिंदल के पक्ष को मानें तो जी ने सौ करोड़ जैसी बड़ी रकम की मांग खबर न चलाने के लिए मांगी। जी का इससे इंकार करना एक औपचारिकता है क्योंकि बाद के घटनाक्रम में जी के संपादकों की गिरफ्तारी पहली नजर में जी को दोषी ठहराने के लिए काफी है। जी की यह करतूत मीडिया को षर्मसार करने के लिए काफी है। हालांकि यह भी सच है कि जो पकड़ में आया, वह चोर, बाकि सब साहूकार। इस पूरे मामले में जिंदल को क्लीनचिट देना भी उचित नहीं है।
सवाल यह है कि यह लेन-देन का मामला बन ही क्यों ? क्यों बात खबर छिपाने तक पहुंची ? क्या इसके पहले भी ऐसा कुछ हुआ था जिसमें कोर्इ छिपा सौदा था ? कुछ न कुछ तो ऐसा हुआ ही है जिसने जी का हौसला बढ़ाया। हो सकता है तब मामला बिजनेस पार्टनषिप का रहा हो। कुछ समय तक सब ठीक रहा हो लेकिन अब जब सौदा बिगड़ गया या बिगड़ता दिखा हो तो जिंदल सड़क पर आकर जी से दो दो हाथ करने के लिए मजबूर हुआ हो। यहां गौर करने लायक बात यह है कि ऐसा क्या हुआ कि जिंदल जी से बात करने पहुंचा, वह भी पूरी सावधानी और सर्तकता के साथ।
जब जी ब्लेकमेल कर रहा था, पैसा नहीं दिये जाने पर खबर दिखाये जाने की धमकी दे रहा था, तब जिंदल ने क्यों मीडिया के सामने सच नहीं बोला ? क्यों वह जी से बात करने पहुंच गया ? मामला इतना सस्ता और सीधा नहीं है बलिक इसके पेंच बहुत कसे हुये हैं। जी दोषी है, यह तो साफ होता दिख रहा है लेकिन जिंदल पाक-साफ है, यह तय होना बाकि है।
बहरहाल, इस पूरे मामले ने एक बार फिर मीडिया को आत्मनिरीक्षण करने के लिए मजबूर कर दिया है। पेडन्यूज से ब्लेकमेलिंग तक के दाग ने मीडिया की विष्वसनीयता को कम किया है। विष्वसनीयता को कम किया है। विष्वसनीयता गंवाने का काम मीडिया लगभग तीन दषकों से निरंतर कर रहा है और गिरावट के इस क्रम को जी-जिंदल विवाद ने षीर्ष पर पहुंचा दिया है।
सामाजिक सरोकारों से परे होता मीडिया अब व्यवसाय बन गया है। जिंदल अपने लाभ के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार है तो जी भी मीडिया बिजनेस में है और वह ऐसा सौदा करने के लिए उतारू है तो इसमें गलत ही क्या है ? प्यार और व्यापार में सब जायज है क्योंकि आज व्यापार युद्ध के माफिक हो चला है। मीडिया के व्यवसाय होने की बात नकारी जाती रही है लेकिन जिस तरह से मीडिया लाभ का जरिया बनता जा रहा है, उसने मीडिया को उदयोग बनाने में कोर्इ कसर नहीं छोड़ी है।
मीडिया का यह स्याह चेहरा लगातार दिन ब दिन डरावना होता जा रहा है। यह सच है कि एक जी-जिंदल के मामले से पूरा मीडिया खराब नहीं हो जाता है लेकिन इसकी खरोंच से जख्मी तो होता ही है। मीडिया आम आदमी का सहारा है। जब उसकी कहीं कोर्इ सुनवार्इ नहीं होती है तब वह मीडिया के पास जाता है। बिना किसी गवाह और बिना किसी सबूत के वह फरियादी की सुनता है और अपने स्तर पर गवाह और सबूत इकटठे कर फरियादी के न्याय का रास्ता बनाता है। सामाजिक सरोकार का यह मामला पुराना हो चुका है। मीडिया सरोकार में भी अवसर ढूंढ़ता है और अपने फेवर में भुनाने में भी नहीं चूकता है। बलात्कार जैसे संवेदनषील मुददे पर भी वह खबरों से खेलता दिखता है। यह ठीक है कि मीडिया की सकि्रयता और सजगता के कारण इन अपराधियों को सजा दिलाने का रास्ता साफ होता है, पुलिस को भी त्वरित गति से काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है लेकिन यह भी कडुवा सच है कि ऐसे हादसों पर जो रिपोर्टिंग होती है, वह किसी परिषिष्ट से कम नहीं होता है।
नर्इ दिल्ली में गैंगरेप कांड में मीडिया का रवैया ऐसा ही रहा। देष के सबसे बड़े अखबार समूह का दावा करने वाले अखबार ने परिषिष्ट की भांति घटना को पेष किया। देषभर से छांट-छांट कर घटनाओं का संकलन किया गया। ऐसा करना किसी भी दृषिट से उचित नहीं कहा जा सकता है। मीडिया जवाबदार है तो यातायात सप्ताह की तरह किसी घटना विषेष पर केंदि्रत होने के बजाय लगातार मुहिम चलाया जाना चाहिए जो नहीं होता है। मीडिया का सूत्र वाक्य है जो दिखता है, वह बिकता है और इसी सूत्र वाक्य को मीडिया ने ब्रह्रा वाक्य मान लिया है और घटनाओं को इसी तर्ज पर प्रस्तुत करने की कोषिष कर रहा है।
भोपाल में मीरा आहूजा जो कि बिजली विभाग में काम करती थीं, को किसी अज्ञात हत्यारे ने लूट की नीयत से हमला कर मार डाला। एक पखवाड़े से ज्यादा समय होने को है लेकिन मीरा आहूजा के हत्यारे पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। मीडिया इस मामले में खबर छापने की औपचारिकता कर रहा है क्योंकि इस मामले में जितनी टीआरपी बटोरनी थी, बटोर ली। मीडिया का यह संवेदनषील व्यवहार इसी एक मामले में है जहां उसकी टीआरपी नहीं मिलने की उम्मीद होती है।
मीडिया के लिए सैक्स, फैषन और धनाडय लोगों की जीवन षैली बिकाऊ होती है और वे इसी पर केंदि्रत कार्यक्रम का निर्माण करते हैं। मीडिया की इस असंवेदनषीलता को पूर्व राष्ट्रपति डा। कलाम ने भी महसूस किया और उन्होंने पिछले दिनों भोपाल में अपने एक कार्यक्रम में कहा भी ग्रामीण पत्रकारिता पर मीडिया का फोकस होना चाहिए।
मीडिया के जद से गांव, ग्रामीण और उनकी समस्यायें तो कब की दूरी हो चुकी हैं। जिनके पास क्रय षकित न हो, मीडिया उनके पास जाये क्यों ? मीडिया पर दिखाये जाने वाले उत्पाद के लिए उन्हें बहुत धन मिलता है और यह धन तभी मिलेगा जब उसे देखने वाले खरीदने की षकित रखते हों और यह षकित ग्रामीण अंचलों में नहीं है तो वह उनसे दूर ही रहता है।
यह मीडिया की कमजोरी का ही परिणाम है कि वालमार्ट दादागिरी के साथ कहता है कि उसने लायजनिंग के लिए करोड़ रूपये खर्च कर दिये और इस देष की जनता मुंहबाये खड़ी है। सवाल यह है कि क्या यही वह मीडिया है जिसने अपनी ताकत दिखाकर अंग्रेज षासकों को भारत से बाहर का रास्ता दिखा दिया था ? फिर यह कौन सी मीडिया है जो सीना ठोंककर भारत में आने वाले विदेषी व्यापारियों को रोक पाने में अक्षम साबित हो रही है।
मीडिया पहले भी ताकतवर था और अब भी ताकतपर है लेकिन तब और अब में उसकी प्राथमिकतायें बदल गयी है। तब मीडिया की प्राथमिकता में देष था लेकिन अब उसकी प्राथमिकता में व्यापार है। वालमार्ट जैसे आएंगे तो मीडिया का राजस्व बढ़ेगा और राजस्व पाने के ऐसे रास्तों को बंद क्यों करना चाहेगा ? जी और जिंदल का मामला इससे अलग नहीं है। पूरा मामला नफा और नुकसान का हैं। जब तक दोनों अपने-अपने पक्ष में लाभ देखते रहे, कोर्इ किसी के चेहरे से नकाब खींचने की कोषिष नहीं की लेकिन जैसे ही आपसी तालमेल बिगड़ा और चेहरे से नकाब उठाने की कोषिष हुर्इ। फौरीतौर पर जी के लिए यह मामला जंजाल साबित हुआ है और इसी के साथ-साथ मीडिया का स्याह चेहरा भी सामने आया है जो दुर्भाग्यजनक हैं।
इन सारी सिथतियों के बाद भी समाज का विष्वास मीडिया पर बना रहेगा क्योंकि मीडिया ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो आम आदमी के लिए त्वरित न्याय का रास्ता सुलभ कराता है। ग्रामीण अंचलों में आज भी छोटी-छोटी समस्याओं का निदान मीडिया के माध्यम से ही हो पाता है। यह एक और सच है कि कस्बार्इ पत्रकारिता का रास्ता कंटक भरा है। ताकतवर लोग हमेषा से पत्रकारों को दबाने और डराने का काम करते रहे हैं लेकिन यह उनका ही साहस है कि वे बिना डरे और सहमे अवाम की आवाज को बलुंद करते रहे हैं। महानगरीय मीडिया का जी भले ही अगुवार्इ करे लेकिन मीडिया की आत्मा ग्रामीण और कस्बार्इ पत्रकारिता में ही जिंदा है, सुरक्षित है और सम्मानित भी।
 

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