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जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला जिंक ने किया करोड़ो रूपयों का भूमि घोटाला   देश की सुरक्षा की दृष्टी से बनी कंपनी मेटल मेटल कॉरपोरेशन ऑफ  इण्डिया (हिदुस्तान जिंक) के विनिवेश के मामले में सीबीआई कार्यालय जोधप... Read more
सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो सरकारी खजाने पर डाका, विधवा एक पेंशन दो   चित्तौडग़ढ़। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पेंशन योजनाओं में जरूरतमंदों को लाभ मिल रहा है या नहीं यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर ... Read more
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक गुजरात में ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्य करते हुए, साथ में सहसंयोजक श्री गनी कुरैशी जी भी है। Read more
 ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें? ब्रिक सम्मेलन में चीन के सामनें मनमोहन सिंह के मौन के मायनें?     मनमोहन सिंह क्यों मौन रहे चीन के सामनें?   पिछले दिनों हमारें प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने डरबन में ब्रिक्स शिखर... Read more
सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं सलमान खुर्शीद किस देश के विदेश मंत्री हैं  लद्दाख में चीन की जन मुक्ति सेना की घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र के बीस किलोमीटर ( पहले सूचना यह थी कि दस किलोमीटर के अन्दर) अन्दर आकर अपनी चौकिय... Read more
अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी अनिल गोयल की ‘माँ: भाव यात्रा’ प्रदर्षनी   4 से 7 अप्रैल तक उज्जैन की कालिदास वीथिका में उज्जैनवासी देख सकेंगे माता-पिता, बुज़ुर्गों पर केन्द्रित मार्मिक कविता पोस्टर प्... Read more
एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? एक संविधान, फिर दो विधान क्यों? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 चीख चीख कर कहता है कि भारत में सभी लोगों को कानून के समझ समान समझा जायेगा और सभी लोगों को कानून का समान संरक्षण प्राप... Read more
 नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें नमो को हिटलर कहनें वाले पहले आपातकाल का स्मरण करें   वर्तमान में चल रहे लोकसभा चुनाव पिछले सभी आम चुनावों से कई दृष्टियों से भिन्न भी हैं Read more
अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ओडीशा में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की साज़िश भारत सरकार का एक अल्पसंख्यक आयोग है । भारत सरकार का मानना है कि इस देश में अल्पसंख्यक सदा ख़तरे से घिरे रहते हैं । इस देश के लोग अल्पसंख्यकों को नष... Read more
जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जम्मू कश्मीर की अनकही कहा जून और जुलाई का महीना भारत के राष्ट्रवादी आन्दोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है । २३ जून १९५३ को डा० श्यामा प्रसाद मुखर्जी का श्रीनगर की ज... Read more
 रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान सन्देश से लेकर कुत्ते के बच्चे के बीच भटकती सोनिया कांग्रेस रमज़ान का पवित्र महीना शुरु हो गया है । यह महीना हिजरी सम्वत का नौवाँ मास है और ईस्वी सम्वत के हिसाब से नौ जुलाई को शुरु हुआ है । इस महीने में मुसल... Read more
भारतीय भाषाओं का मोर्चा:गूँगे राष्ट्र को बोलने हेतु प्रेरित करने की लड़ाई अन्ततः दिल्ली पुलिस ने श्याम रुद्र पाठक को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा १०५ और १०७ के अन्तर्गत गिरफ़्तार कर ही लिया । पाठक पिछले २२५ दिनों से स... Read more
खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले खुली आंखों में सपने रातें बीयर बार के हवाले मुंबई। आठ वर्षों से रोजी रोटी के संकट से झुझ रही बार बालाओं के 'डांस बारÓ को लेकर उच्चन्यायालय के फैसले ने बार बालाओं की चमक लौटा दी ... Read more
पिता के बाद पुत्र का कारनामा पिता के बाद पुत्र का कारनामा पीडि़त महिला फरियाद लेकर पहुंची पुलिस की शरण में इंदौर। आसाराम के बाद अब उनका लड़का नारायण सांई के खिलाफ भी एक परिवाद पेश किया जा रहा है। यह पर... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत-४ जिसने सहयोग किया उसी की पीठ पर छूरा घोपा संजय ने नकली बाबा के कारनामों से लोगों में भारी रोष औंकारेश्वर। मां नर्मदा बने एक आश्रम में बने चौ... Read more
आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी आष्टा,सिहोर,गुना के लीडरों से कड़ी पूछताछ जरुरी राधेश्याम सोलंकी,भरत ठाकुर, जयंत जोशी,अशोक पाटीदार,हेमंत चतुर्वेदी,मनीष जैन कर रहे हैं एसटीएफ को  गुमराह भोपाल। ईवमिरेकल ज्वेलर्स कंपनी... Read more
क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास  क्विंटलों व किलो से सोना है आडवाणी व आर.के.धवन के पास जगदीश जोशी 'प्रचंड  ' नई दिल्ली। काला धन स्वीस बैंक में जमा होने व नेताओं को घेरने की बात पर आंदोलन खड़ा कर 'आप ' के सर्वेसर... Read more
दो लाख करोड़ का खनन घोटाला दो लाख करोड़ का खनन घोटाला देवास जिले में रेत माफिया का राज भोपाल। शिवराज के राज में माइनिंग माफिया ने बेल्लारी की लूट के रिकार्ड भी तोड़ दिए हैं। बीते 10 साल में मप्र... Read more
कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में कांग्रेस गुटबाजी में तो भाजपा मंत्री विधायकों के आचरण और भ्रष्टाचार को लेकर कठघरे में भोपाल। इस बार के चुनाव में मध्यप्रदेश पर कांग्रेस आलाकमान की विशेष निगाह है Read more
मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। मध्यप्रदेश शासन द्वारा वरिष्ठ पत्रकारों को श्रद्धनिधि देने का कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब में संपन्न हुआ। Read more
जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा जिंदा इंसान को बनाया मुर्दा   पीडि़त सुरतानसिंह राजेस पयासी (वकील) यदि ऐसा मा... Read more
औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 औंकारेश्वर में बाबा बनाम डकैत -2 करोड़ों की जमीन से आया रुपया ब्याजखोरी में लगाया औंकारेश्वर। लाखों रुपया एठने वाले औंकारेश्वर के कथित Read more
देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल देवास में की गई शिकायत से खुल सकता है लीडरों का मायाजाल ठगौरों का महानगर बनते जा रहे इंदौर में प्रशासन कोई खास कार्यवाही नहीं कर पाया अलबत्ता Read more
देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर देवास,सिहोर पुलिस कप्तान की नजरों से ओझल दगाबाज लीडर आखिर यह भरत ठाकुर,बाबूलाल जयंत,मनीष कौन है? राधेश्याम सोलंकी,         Read more
मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... मेडम मोहिनी की माया... उत्कृष्ट को सजा और... निकृष्ट को  आशीर्वाद की छाया   -सेवानिवृत को भी बना  दिया संकुल प्रभारी  ... Read more
हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी हिन्दूस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना के पत्र से सनसनी अमिताभ,मुलायमसिंह और सोनिया के पास है क़्वींटल सोना! आप पार्टी के सर्वे सर्वा अरविन्द केजरीवाल व योग गुरु बाबा रामदेव पर अपनी-अपनी दुकान चमकाने... Read more
सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार सुविधाएं बेजार, यात्री लाचार निर्धारित किराए से अधिक वसूली होती है निजी बसों में (रतलाम कार्यालय) रतलाम । एक दशक पहले प्रदेश में सड़क परिवहन निगम की बसें बंद होने के बाद ... Read more
सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना सोने की चाह लगाने वालो नई लगाया चुना राधेश्याम सोलंकी, भरत, जयंत जोशी  मनीष जैन एसटीएफ के निशाने पर..   जगदीश जोशी 'प्रचंड ' भोपाल। आम आदमी को फटाफट अम... Read more
मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत मेंडम नें मंगाई रिश्वत युवक से अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर ले रहा था पांच हजार की रिश्वत, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त भी संदेह के घेरे ... Read more
कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार  कांग्रेस बेलगाम, दर्जनों दावेदार बड़े नेताओं का अभाव दूसरा पंक्ति में नेताओं की कतार रतलाम से अनिल पांचाल विधानसभा चुनाव सिर पर है... Read more
पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण पुँछ में पाकिस्तानी हमला और रक्षामंत्री का आचरण जम्मू कश्मीर में पुँछ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच और छह अगस्त की मध्य रात्रि को नियंत्रण रेखा के भीतर गश्त लगा रही भारतीय सैनिक टुकड़ी पर... Read more
कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश कांग्रेस और भाजपा में नम्बर वन की तलाश रतलाम से अनिल कुमार रतलाम। हाल ही में जनता को लम्बे समय के बाद दर्शन देकर लौटे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लगभग शहर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी बि... Read more
आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी आहत जनता का आक्रोश भी अब जरूरी 67 वां स्वाधीनता दिवस स्वतंत्रता दिवस की क्रमवार गिनती में एक और वर्ष का इजाफा,सबकुछ भुलकर जश्न मनाने का एक और भारतीय दिन...लेकिन क्या सही म... Read more
तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन तिब्बत के भीतर आजादी का आंदोलन कभी समाप्त नहीं हुआ। कभी प्रत्यक्ष और कभी प्रच्छन्न उसकी तपश बीजिंग तक पहुंचती ही रही। 2009 में स्वतंत्रता के लिए सं... Read more
तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा तिब्बत की आजादी में भारत की सुरक्षा नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक नई दिल्ली स्थित दीन दयाल शोंध संस्थान में आयोजित हुई जिसमें 19 प्रांतों क... Read more
तिब्बतःएक अवलोकन तिब्बतःएक अवलोकन क्षेत्रफल : २५ लाख वर्ग कि० मी० जो वर्तमान चीन के कुल क्षेत्रफल का २६.०४ प्रतिशत हैं। राजधानी : ल्हासा जनसंख्या : ६० ला... Read more
आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं    'आरएसएस को राम मंदिर बनाने का अधिकार नहीं' भोपाल। आरएसएस अथवा किसी ऐसे दलको अयोध्या में भगवान राम का... Read more
चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव चुनाव पूर्व गोविंदाचार्य खेल सकते है नया दांव नई दिल्ली । आगामी लोकसभा चुनाव में सत्त्ता सुख भोगने का सपना सजाए बैठी भाजपा की राह में रोडे अटकाने वालों की कमी नहीं है। भाजपा का अंतरकलह पार... Read more
पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब पत्रकारिता से मीडिया तक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार की नई किताब वर्तमान में पत्रकारिता हाशिये पर है और मीडिया शब्द चलन में है.पत्रकारिता के गूढ़ अर्थ और मीडिया की व्यापकता को रेखांकित करता मध्यप्रदेश क... Read more
राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में राम की मर्यादा कृष्ण का कर्म और कुसुम की खुशबु है मंत्री कुसमरिया में देखने, सुनने और बतियाने के बाद किसी भी एंगल से वे राजनेता नहीं लगते। कपाल पर बड़ा सा सिंदूरी टीका, सिर और दाड़ी के रंगे हुए सुनहरी काले गहरे ब... Read more
कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना कॉलोनाइजर पर 1.13 करोड़ का जुर्माना धार :बगैरअनुमति कालोनी विकास करने वालों कालोनाईजरों पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की गाज लगातार गिर रही है। इसी कड़ी में धार शहर में बगैर विक... Read more
जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! जब आस्था में लगे सेक्स व हुस्न के तड़के! नई दिल्ली: धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देना आज के समय में काफी आसान है, क्योंकि हम देशवासी दिमाग से नहीं बल्कि दिल से धर्म को जोड़कर रखते है... Read more
ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है ये कांग्रेस के कुंभकर्ण है   इंदौर।मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया प्रदेष कांग्रेस में जान फंकने में लगे है लेकिन प्रदेष के कई पदाधिकारियों... Read more
अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसला अब भी सुलग रहा है भोजशाला मसलाएत पंचमी के दिन धार जिले की भोजशाला में हंगामे और उपद्रव के बीच पूजा के साथ नमाज अता फरमाने की रस्म पूरी हो जाने पर म... Read more
बोले तो आसाराम बोले तो आसाराम 90 के दशक में धर्मप्रेमी जनता के लिए आशा की किरण बन कर उभरे आसाराम बापू एक दशक बाद ही बदनामी के दाग अपनी आभा पर लगवा चुके हैं। आश्रम में बच्चो... Read more
बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज बेटियों की 'देह' पर जिंदा समाज मंदसौर।(धर्मवीर रत्नावत) जिस तरह देश में मंदसौर अफीम उत्पादन, तस्करी के लिए मशहूर है, उसी तरह नीमच, मंदसौर, रतलाम के कुछ खास इलाके भी बाछ... Read more
रियल स्टेट के सबसे बड़े धोखेबाजों में नंबर वन पर इस समय डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स इंटरनेनल प्रा.लि. का नाम लिया जाना चाहिए। इस रियल स्टेट कंपनी ने तमाम नामी गिरामी बिल्डरों को मात देते हुए विगत दो सालों में ही इंदौर में नो प्रोजेक्ट पूरे करते हुए हजारों प्लाट बेचे 
और इसमें खास बात ये रही कि हर प्रोजेक्ट के प्लाट बेचते समय डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स इंटरनेनल प्रा.लि. के मालिक संतोष सिंह के पास न तो उन जमीनों का मालिकाना हक था और जमीन पर प्लाटिंग करने के लिए टाऊन एण्ड कंट्री प्लानिंग या नगर निगम आदि किसी भी सरकारी संस्था से अनुमति लेकर नक्षा पास भी नहीं करवाया गया था। यहां तक कि जिन सैकड़ों एकड़ कृषि भूमियों पर डी.एच.एल. ने प्लाट बेचे उनका डायवर्सन भी नहीं करवाया गया। बस ब्रोर छापा और अपने मन मुताबिक प्लाट काटकर धड़ाधड़ बेच डालें यानि पूर्णतः अवैध काॅलोनी बेचते रहे। ये सिलसिला इंदौर में खूब धड़ल्ले स ेचल रहा था कि डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स के तीनों डायरेक्टरों संतोष सिंह, संजीव जायसवाल, व बाम्बे हाईकोर्ट के वकील अनिरूद्ध देव के मन में लालच का तूफान उमड़ा और इन तीनों ने म.प्र. की राजधानी भोपाल में भी 102 एकड़ की काॅलोनी निर्माण करने की घोषणा करते हुए अप्रैल 2012 मंे लांचिंग कर दी। यहां भी डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स के मालिक ने ड्रीम, आॅनेस्टी और लीगेलिटी के पथ पर चलने की बजाय धोखा, हरामखोरी व लूट का खेल षुरू कर दिया। इन लोगों ने भोपाल के मानसरोवर काम्प्लेक्स में षानदार आॅफिस खोला ताकि डी.एच.एल. में काम करने वाले ऐजेंट या कहें एसोसिएट तथा प्लाट खरीदने वाला आम आदमी कभी भी कंपी की माली हालत पर क न कर सके और काफी हद तक संतोष सिंह ऐसा मायाजाल रचने में कामयाब भी हो गयो लेकिन वो षायद भूल गये कि ये राजधानी भोपाल है और भोपाली कहावत है कि यहाँ कबुतर भी एक पंख से उड़ता है और दूसरा पंख पिछवाड़े पर रखकर इजात बचाता है।
  डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स के धोखे हरामखोरी व लूट की कहानी इस कदर उलझी हुई है कि लोग सब कुछ समझकर भी नहीं समझ पाते। असल में डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स की मार्केट नेल्यू या कहें कि विष्वसनीयता एक पैसे की भी नहीं ह यह पूरी कहानी टिकी है तो सिर्फ उन ऐजेंटों के व्यक्तिगत संबंधों व गारंटी पर जो कि प्लाट खरीदने वाले हर आदमी को धन निवे करने पर मजबूर कर देता है। हम आपको उदाहरण के तौर पर डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स के बिलीनीयर्स लेण्डमार्क फेस 1-2 के प्लाट खरीददारों के बारे में बताते हैं। हुआ ये कि डी.एच.एल. ने भोपाल में आॅफिस ता ेखोला लेकिन जमीन उन्होंने सीहोर जिले की सीमा ग्राम चैन्डी में खरीदी। क्यों कि वहां जमीन पांच लाख रूपये से 10 लाख रूपये प्रति एकड़ के दाम पर सहजता से उपलब्ध थी। चूंकि भोपाल सीमा में भौरी से लगे इस क्षेत्र में कई बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट चल रहे हैं और अधिकातः निवेकों ने ही वहाँ प्लाट खरीदकर रखे हैं इसलिए डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स के ऐजेंट भी भौंरी के नाम पर ही ’बीलीनियर्स लेण्डमार्ग’ फेस-1 व फेस-2 के प्लाटों को बेचने लगे। यह भ्रम फैलाया गया कि वहाँ हर महिने प्लाटों के दाम बढ़ रहे हैं और इस भ्रम को सत्य साबित करने के लिए डी.एच.एल. के डायरेक्टर संतोष सिंह ने भोपाल में मनोज गुप्ता नाम के ख्स को वाईस प्रेसीडेंट बनाकर बैठया जो कि हर महिने षेयर बाजार की भाँति प्लाटों करो रेट बढ़ाने की घोषणा करता है और चूंकि वो वाक्चातुर्य में माहिर हैं तथा ऐजेंटों को रातों रात करोड़पति बना देने के वायदे इ तनी विष्वसनीयता के साथ करता हैं आउ लड़के लड़कियाँ अपने दोेस्तों, नातेदारों, रिष्तेदारों व परिचित लोगों को अपनी व्यक्तिगत गारंटी पर प्लाट खरीदने के लिए दबाव बनाने लगते हैं। डी.एच.एल. का हर ऐजेंट जब भी किसी करे ’बिलीनिटेयर्स लेण्डमार्क’ में प्लाट बेचने जाता है अगर वो जरा भी ना नुकूर करता दिखा तो तत्काल ऐजेंट द्वारा कहा जाता है कि ’आप तो बस मुझ पर विष्वास कीजिए डी.एच.एल. कंपनी अगर भाग भी गई तो आपके पैसे मैं ब्याज सहित वापस दूंगा’ और इस बात पर विष्वास करके सैकड़ों लोगों ने प्लाट खरीद डाले।’ 
  हद तो तब हो जाती है जब ऐजेंट से पूछा जाता है कि क्या इस काॅलोनी का नक्षा टी एण्ड सी सी से पास है ? तो खुद ऐजेंट को भी इस बात की जानकारी नहीं होती कि आखिर ये टी एण्ड सी पी होता क्या हैं? यहां हम आपको बता देना चाहते हैं कि डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स की ’बिलिनयर्स लेण्डमार्क ’ नाम की काॅलोनी का नतो टी एण्ड सी पी से नक्षा पास हुआ और न ही उनके पास नगर पंचायत चैड़ी जिला सीहोर की विकास अनुमति है। पाॅईंट मीडिया द्वारा गहराई से जांचने पर पता चला है कि सीहोर के अनुविभागीय दण्डाधिकारी श्री ह्दयेष श्रीवास्तव ने आज तक इस कृषि भूमि का डायवर्सन कर आवासीय भूमि करने के आदे नहीं दिये हैं, और तो और सीहोर के आर.आई. पटवारी श्री जगदी र्मा ने भी आज तक डी.एच.एल. की इस जमीन पर अपनी ओके रिपोर्ट नहीं लगाई है। ज्ञात रहे कि जब जमीन का डायवर्सन ही नहीं हुआ तो फिर टी एण्ड सी पी से नक्षा पास होने का सवाल नहीं उठता फिर नगर पंचायत की अनुमति तो हो ही नहीं सकती। यानि पूरी तरह से फर्जी व अवैध काॅलोनी हैं बिलीनेयर्स लैण्डमार्क। डी.एच.एल. के प्लाट बिकने के पीछे असली वजह हैं एजेंटरें को मिलने वाला 7 प्रतिषत से 17 प्रतिषत तक कमीषन, जिसके लालच में फंसकर भोपाल में काम कर रहे 250 से ज्यादा ऐजेंटों ने अपने ही लोगों को धोखा देकर ठगी का षिकार बनाया और लगभग 100 करोड़ रूपये इन एजेंटों के माध्यम से लूट लिये गये। मानना पड़ेगा कि संतोष सिंह व संजीव जायसवाल ने अपना लूट का षड़यंत्र बड़ी चतुराई से रचा क्योंकि जिन एजेंटों ने इन लोगों को करोड़ों अरबों रूपये कमाकर दिये उन्हीं ऐजेंटों के पांच करोड़ रूपये कमीषन के हड़प कर खा गये ये लोग और आज तक कोई ऐजेंट अपने कमीषन के लिए आवाज नहीं उठा सका हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि संतोष सिंह डी.एच.एल. में उन्हीं लोगों को एजेंट बनाते हैं जिन्होंने कभी प्रापर्टी डीलिंग का काम नहीं किया हो तथा इस कारोबार की जटिलता व कानूनी पेचीदगियों से पूर्णतः अनजान हो। यही वजह है कि डी.एच.एल. के फर्जी प्लाट खरीदने वाला भी उतना ही बेगुनाह है जितना कि बेचने वाला ऐजेंट।
ऐजेंट पर अपने 7 प्रतिषत कमीषन का लालच इस कदर हावी रहता है कि वो अपने दोस्तों या रिष्तेदारों के गहने भी बिकवाकर प्लाट बुकिंग अमाऊंट जमा करवाने से पीछे नहीं हटते। ऐसे ही एक ऐजेंट ने नाम न छापने की षर्त पर बताया कि डाॅ.बी.एम. त्रिपाठी के सुपुत्र डाॅ. विवेक त्रिपाठी एवं श्री अभिषेक त्रिपाठी निवासी ए-9, कस्तूरबा नगर, चेतक ब्रिज के पास दोनों का बिलीनियर्स लेण्डमार्क-फेस-2 में क्रमषः प्लाट नं. डी- 319 एवं डी - 320 (1799.41 वर्ग फुट) 340/- रूपये प्रति वर्ग फुट के रेट से 7,73,746/- (सात लाख तिहत्तर हजार सात सौ छियालिस रूपये) में बेचा गया, लेकिन एग्रीमेंट में 301 रू. प्रति वर्ग फुट के हिसाब से 5,41,622/- (पांच लाख इकतालिस हजार छः सौ बाईस रूपये कीमत दर्षाई गई तथा 77375/- (सत्त्तर हजार तीन सौ पचहत्तर रूपये) ही जमा दिखाते हुए षेष 4,64,247/- (चार लाख चैसठ हजार दो सौ सैतालिस रूपये) की 18 किलो बना दी गई। जो कि अगस्त 2012 से षुरू भी हो गइ्र्र।
अब हर महीने 25796/- (पच्चीस हजार सात सौ बानवे रूपये) की किष्ते देने वाले त्रिपाठी जी को क्या पता कि उन्होंने जिस डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स के डायरेक्टर संतोष सिंह से प्लाट खरीदने का एग्रीमेंट किया है उसका मालिकाना हक संतोष सिंह के पास है ही नहीं और तो और लगभग साढ़े पांच लाख का प्लाट बेचने पर एग्रीमेंट में प्लाट की कीमत का 1 प्रतिषत स्टाम्प ड्यूटी यानि 5588/- रू. चुकानी होती है लेकिन डी.एच.एल. ने इसी तरह मात्र 100 रूपये के स्टाम्प पर एग्रीमेंट करके सैंकड़ों प्लाट बेचते हुए 100 करोड़ रूपये के एग्रीमेंट कर डाले। ये तमाम एग्रीमेंट पूर्णतः अवैध हो जाते है तथा विवाद होने की स्थिति मे न्यायालय में प्रस्तुत किये गये तो इन एग्रीमेंटों पर 10 प्रतिषत पेनाल्टी भरते हुए 50000 (पचास हजार रूपये) की स्टाम्प ड्यूटी पहले खरीदार को ही भरनी पडे़गी उसके बाद इस एग्रीमेंट की वैधानिकता प्राप्त होगी।
अंदर की बात ये है कि इस पूरे सौदे में दो प्लाटों की कीमत 15,47,492/- (पन्द्रह लाख सैतालिस हजार चार सौ बानवे रूपये) का 30 प्रतिषत यानि 4,64,247/- (चार लाख चैसठ हजार दो सौ सैतालिस रूपये) डेवलपमेंट चार्जेस के रूप में नगर जमा करवाए गये और इसकी कोई एंट्री एग्रीमेंट में नहीं लिखी गई। मजे की बात तो ये है कि प्लाटों की कीमत का 40 प्रतिषत नगद जमा कराया गया और खुद ऐजेंट को 7 प्रतिषत कमीषन यानि 108324/- (एक लाख आठ हजार तीन सौ चैबीस रूपये) में से चवन्नी भी नसीब नहीं हुई। वाह रे संतोष सिंह मालिक होकर अपने ही नौकर की थाली से रोटी चुराकर खा जाने की की कला आपसे ही सीखी जा सकती है। इसी तरह की धोखाधड़ी करके सैकड़ों ऐजेंटों का कमीषन डकार जाने वाले संतोष सिंह व संजीव जायसवाल को लानत- मलानत भेजते हुए सैकड़ों ऐजेंटों ने डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स का काम छोड़ दिया है। इन्हीं में से एक ऐजेंट इंदौर में बेहद ईमानदारी से काम कर रहा था जिसका नाम स्वदीप है। इस एजेंट ने श्रीमती चित्रा षर्मा की डाऊन लाई में ज्वाईनिंग ली थी और उसने जब दर्जनों प्लाट बुक करवाकर अपना कमीषन मांगा तो उसके कई प्लाटों का कमीषन ये कहकर रोक दिया गया कि ’ आपके 10 प्लाटों में से चार किसी और ऐजेंट ने खरीददार को दिखाए थे इसलिए उस एजेंट ने आवेदन देकर आॅब्जेक्षन लगाया है और उन चार प्लाटों का कमीषन मामले की जाँच के बाद ही दिया जाएगा।’ जब स्वदीप ने डी.एच’.एल. प्रबंधन से जानना चाहा कि वो एजेंट कौन है जिसने मेरे दोस्तों को प्लाट दिखाए थे तो इसकी जानकारी देने से इंकार करते हुए कहा गया कि ’ये कंपनी का इंटरनल मामला’ है इसलिए हम किसी को भी इसकी जानकारी नहीं दे सकते। इसी तरह महेन्द्र गुप्ता नाम के ऐजेंट का कमीषन भी हड़प कर लिया गया।  
असल में ये लूट के माल को आपस में बाँटने के समान घटना है। ठीस उसी तरह जैसे ’राऊडी राठौर’ फिल्म में अक्षय कुमार अपने साथी ठग को लूट में मिली रकम व ज्वेलरी मे से हिस्सा देते हुए कहता है कि देख 2 जी अपने पास 35 हजार केष हैं, जिसमेें से 5000 में साईड में रख रहा हूँ ताकि राऊंड फिगर हो जाना चाहिए, 30 हजार। अब क्योंकि मैंने प्लान बनाया है इसलिए 5000 में एक्स्ट्रा लूंगा और मेरे हिसाब से ज्वेलरी होगी 15 हजार की। यानि कि 15 हजार मेरे, 15 हजार तेरे और 15 हजार किषन के।अब अक्षय कुमार का साथी पूछता है ये किषन कौन है ठगी तो हम दोनों ने की ? तो अक्षय कुमार कहता है कि ’अरे किषन भगवान को भूल गया तू। चोरी चकारी करते हैं और धरम-करम की बात आती है तो करना नहीं चाहता।’ भगवान की हजार का सोना लेने की बात करता है। अब अक्षय कुमार उसके साथी की तारीफ करते हुए कहता है कि ’तू बहुत सयाना हैं चल ठीक है।’ और 15 हजार की गुड्डी ऊपर उछालते हुए अक्षय कहता है कि ’हे किन भगवान से आपका हिस्सा है मुबारक हो....लीजिए...। और गुड्डी वापस जमीन पर गिरती है तो उठाकर कहता है कि ये आपको नहीं चाहिए, भगवान मैं रख लूं....ठीक है रख लेता हूँ......। इसके बाद अपने पन्द्रह हजार रूपये भी रख लेता हैं और जैसे ही उसका साथी अपने हिस्से के 15 हजार के सोने के गहनों पर हाथ रखता है तो अक्षय कुमार उसका हाथ पकड़ते हुए कहता है कि ’ये चोरी का माल है अगर कहीं तू बाजार में बेचने चला गया तो फंस जाएगा.....सोच।’ ....तू मेरा दोस्त हैं इसलिए मैं तुझसे ये गहने खरीद लेता हूँ लेकिन इसके 10000 रूपये ही दूंगा। साथी घबराकर बात मान लेता है अक्षय से दस हजार जैसे ही हाथों में लेता है, अक्षय उसे फिर रोककर कहता है, वो साईड में रखे 5 हजार तो तू भूल ही गया। उस पांच हजार को फिर दस हजार में मिलाकर अक्षय कहता है कि ’ये हो गये 15 हजार यानि कि इसमें से साढ़े सात तेरे साढ़े सात मेरे।’ अब फिर अक्षय कहता है प्लान किसका था मेरा’ तो 5 हजार इसमें से मेरे हुए....ला और ज्वेलरी के 10 हजार मैंने तुझे दिये वो वापस कौन देगा ? चल निकाल और अब बता कि इन 15 हजार में से मेरे हिस्से के साढ़े सात हजार कब देगा ?
इस तरह अक्षय कुमार लूट का सारा माल छल-कपट व चालाकी से खुद हड़प कर जाता है और उसके साथी के हाथ कुछ नहीं लगता।
ठीक इसी तरह संतोष सिंह व संजीव जायसवाल भी अपने इस धोखाधड़ी व ठगी के खेल से प्राप्त धन के बंटवारे के समय छल-कपट करके अपने ही साथी एजेंटों के हक के 7 प्रतित कमीन के लाखों रूपये धोखाधड़ी से हड़प कर जाते हैं। गोया कि डी.एच.एल. की ठगी में मुख्य भुमिका निभाने वाले एजेंटों द्वारा जिन लोगों को धोखा मिला उन एजेंटों को भी धोखा ही मिला। लोगों की जीवन भर की जमापूंजी को डी.एच.एल. के फर्जी प्लाटों में लगवाकर डूबा देने की ये सजा कुछ भी नहीं है क्योंकि उनकी मति तो भ्रष्ट कर दी गई है, ठीक ’एम्वे’ कंपनी के ’ब्रिट वल्र्ड वाईड’ के डिस्ट्रब्यूटरों की तरह, जो कुछ साल पहले तक महामारी की तरह घर-घर फैल गये थे। एम्वे ने दे भर में लाखों युवाओं को अर्थहीन स्वप्रीली दुनिया में जीने का आदि बना दिया था और जब इस दुखद स्वप्र का अंत हुआ तो कई परिवार बिखर चुके थे तथा जीवन में कुछ कर गुजरने की तमन्ना रखने वाले युवक युवतियों का सामाजिक जीवन पूरी तरह से बबार्द हो चुका था। आज भी लाखों लोग इस एम्वे रूपी पागलपन की चपेट में हैं और गाहे-बगाहे उन्हें स्थानीय लोकल कंपनियों के प्लान समझाते हुए व प्रोडक्ट का प्रमोन करते हुए देखा जा सकता हैं।
ऐसे लोगों को पढ़े लिखे बंद बुद्धि कहा जा सकता है और उनके दिमाग से रातों रात करोड़पति वाली सफलता का भूत उतारना उनके बा पके भी बस की बात नहीं होती। ऐसे बंद बुद्धि युवाओं व अधेड़ लालची लोगों को ही डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स में तालियों की गड़गड़ाहट से नवाजा जाता है और षाम 6 बजे के बाद टाई बांधे ये लड़के लडकियाँ ठीक एम्वे की मीटिंग में बोले जाने वाले ऊर्जावान किस्सों व रातों-रात अमीर बनने की सच्ची झूठी कहानियों को सत्संग या भागवत की तरह ही सुनते व आत्मसात करते हैं। ज्ञात रहे कि डी.एच.एल. में जो एजेंट टाई नहीं लगाता या महिने में 15 मीटिंग अटेंड नहीं करता उसका कमीन रोक दिया जाता है। आप इन मीटिंगों में जाकर साक्षात अनुभव कर सकते हैं कि ’किस तरह डी.एच.एल. जैसी कंपनी सैकड़ों युवाओं का माइंड वाॅ कर देती है और आप ये देखकर आसानी से कल्पना कर सकते हैं कि ऐसे ही ब्दों के मायाजाल में फँसाकर युवाओं को आतंकवादी बनाया जाता होगा। यह भी संभव है कि डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स ’ के मालिक संतोष सिंह व संजीव जायसवाल इस खबर के छपने के बाद अपना कारोबार समेटकर विदे भाग जाए क्योंकि इनके पासपोर्ट हाल ही में बनवाए गये हैं।
स्ंातोष सिंह ने अपने ब्रांड को प्रमोट करने के लिए तमाम हथकण्डे अपनाए हैं जिनमें से एक हैं आई एस ओ 9001-2008 कंपनी होने का प्रमाण पत्र प्र्राप्त करना और दूसरा है विभिन्न प्रकार के अवार्ड जीतने का खेल रचना तथा उद्योग मंत्री कैला विजयवर्गीय एवं राजनाथ सिंह के साथ खीचें गये फोटो को अपनी वेबसाईट पर हाईलाइट करना। इन पुरस्कारों का नाम न तो कभी किसी ने सुना न ही इस तरह के पुरस्कारों से कंपनी की विष्वसनीयता प्रमाणित होती है। खुद पुरस्कारों की भी प्रमाणिकता पर प्रष्नचिंह लगा हुआ है। डी.एच.एल. के ब्रोर में सुप्रीम केार्ट के रिटायर जस्टिस एम.एस.ए. सिद्दकी से पुरस्कार प्राप्त करता फोटो नजर आता है। यदि खुद सिद्दकी साहब को इन तीनों की धोखाधड़ी व ठगी का पता चला तो अपने फोटो का गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर मानहानि का मुकदमा कर देंगें। बहरहाल हम आज जनता को फिर चेताना चाहते है कि इस तरह की किसी भी कंपनी से प्लाट या मकान लेने से पहले पूरी तरह से जाँच लें कि उसे सभी सरकारी अनुमतियाँ प्राप्त हैं या नहीं और जब भी आप जमीन या प्लाट खरीदने का एग्रीमेंट करें तो प्लाट की कीमत पर 1 प्रतित स्टाम्प ड्यूटी चुकाकर ही एग्रीमेंट करें वरना वो एग्रीमेंट सिर्फ कागज का बेकार टुकड़ा भर रह जाएगा। डेवलपमेंट चार्ज की 30 प्रतित नगद राषि डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स में करोड़ों रूपये का कालाधन लगे होने का साफ संकेत देती है और इसकी जाँच आयकर विभाग व ई ओ डब्ल्यू को तत्काल करनी चाहिए। अगर सही तरीके से जांच हुई तो संतोष सिंह, संजीव जायसवाल व देव साहब का जेल जाना तय है।
बिल्डरों द्वारा प्री लाॅचिंग कर धन जुटाने की नई प्रथा षुरू हुई है जो कि पूर्णतः अवैध है इस तरह की काॅलोनी में प्लाट या मकान/फ्लेट आदि लेने से बचना चाहिए। आप ही सोचिए जिस जगह आकृति ग्रुप और इंडस ग्रुप बकायदा सारी सरकारी अनुमतियाँ लेने के बाद प्लाट बेच रहें हैं वहीं डी.एच.एल. ने बिना किसी परमिषन के 100 एकड़ कृषि भूमि पर सैकड़ों प्लाट काटकर पांच महिने में ही लगभग 160 करोड़ रूपये आम जनता से ठग लिए। ज्ञात रहे जिस जगह डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स का ’बिलिनीयर्स लेण्डमार्क’ बन रहा है वहां पांच से दस लाख रूपये एकड़ की कीमत में जमीने आज भी बिक रही हैं और डी.एच.एल. वहीं पर 1100 वर्ग फुट के प्लाट की पांच लाख सत्तर हजार रूपये कीमत वसूल कर रहा है। उस पर हेकड़ी ये कि रजिस्ट्रीप्लाट खरीदने वाले को करवानी होगी और यदि एग्रीमेंट किसी कारणव निरस्त होता है तो 20 प्रतित रकम काटकर खरीददार को पैसा लौटा दिया जाएगा यानि अगर डी.एच.एल. को काॅलोनी की परमीन नहीं मिलती है या जमीन बेचने वाले किसान से उसका झगड़ा हो जाता है और प्रोजेक्ट में अड़चन आ जाती है और तो भी 20 प्रतित का घाटा खरीददार को ही झेलन है। जबकि एग्रीमेंट में ये होना चाहिए कि यदि डी.एच.एल. की गलती से प्लाट नहीं मिलता तो 20 प्रतित ब्याज के साथ रकम लौटा दी जाएगी। यहां डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स के डायरेक्टर संतोष सिंह के हमजोली मित्र व कंपनी के ही डायरेक्टर अनिरूद्ध देव की वकालत पर वाकई तालियाँ बजाने या कहें कि छाती पीटने का मन कर सकता है क्योंकि इन्हीं महाय से षून्य से षिखर पहुंचने के लिए कानूनी चप्पलें अपने मित्र संतोष सिंह व संजीव जायसवाल को पहनाई और ऐसे भ्रामक षुद्ध अंग्रेजी में एग्रीमेंट की रचना की जिसने न केवल हजारों भोले-भाले लोगों की सच्चाई की झूठी परछाई दिखाई बल्कि म.प्र. सरकार को करोड़ों रूपये की स्टाम्प ड्यूटी का चूना भी लगा दिया। एक अनुमान के मुताबिक डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स द्वारा दस करोड़ रूपये की स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की जा चुकी हैं।
भोपाल के एक एजेंट जो कि खुद प्राॅपर्टी डीलर का काम करते हैं ने बताया कि ’मुझे डी.एच.एल. के भोपाल आॅफिस से ज्वाईनिंग नहीं दी गई क्योंकि मैं पहले से प्राॅपर्टी डीलर हूँ’ ये बात मैंने बता दी थी। ये कंपनी सिर्फ उन लोगों को अपना ऐसोसिएट बनाती हैं जिन्हें जमीन खरीदने बेचने का कोई नाॅलेज नहीं होता और वो डी.एच.एल. की विष्वसनीयता पर भी सवाल नहीं पूछ सकें। मैंने इंदौर से ज्वाईनिंग ली और दो महीने में ही समझ गया हूँ कि इस कंपनी के प्लाट वही खरीदे बेचे जिसे पागल कुत्ते ने काटा है। मेरे तो 1100 रूपये भी ज्वाईनिंग के नाम पर डी.एच.एल. में डूब गये, अगर मेरे पास रसीद होती तो संतोष सिंह के हलक में हाथ डालकर भी मैं अपनी मेहनत की कमाई के रूपये निकाल लाता। आज एजेंट लोग संतोष सिंह का ड्रीम पूरा कर रहे हैं, इस कंपनी में आनेस्ट्री सिर्फ एजेंट की हैं और लीगेलिटी का अता पता कोई नहीं जानता।’
आष्चर्य नहीं होगा यदि सच्चाई जानने के बाद संतोष सिंह को ऐसे क्रोध से भरे एजेंटों व धोखाधड़ी के षिकार प्लाट धारकों के गुस्से का सामना करना पड़े और डी.एच.एल. इन्फ्राबुल्स के मानसरोवर स्थित आॅफीस में बवाल मच जाये। दुख तो इस बात का है कि ऐसी ही फर्जी कंपनियों की वजह से आज बिल्डरों पर से विष्वास उठता जा रहा है तथा अच्छी नीयत से काम कर रहे बिल्डर भी अपने प्रोजेक्ट पूरे नहीं कर पा रहे। डी.एच.एल. की काॅलोनी में प्लाट खरीदने वाले आम आदमी राजकपूर की फिल्म ’श्री 420’ के उन निरीह किरदारों की याद दिलाते हैं, जो सौ रूपये में घर का सपना खरीदते हैं। एक वृद्ध महिला अपने जीवन भर की बचत के 95 रूपये जमा कराते हुए कहती है कि एक खिड़की कम लगा देना और एक जवान महिला धन के साथ अपना मंगलसूत्र भी जमा करा देती है। वो लोग कितने भोले-भाले है कि सौ रूपए में मकान के झांसे में आ गए’।
हम भारतीय अपने सपनों को हकीकत से ज्यादा जीते हैं और जरूरत पड़ने पर सपनों के लिए हकीकत की बलि भी चढ़ाने से नहीं हिचकते। डी.एच.एल. के श्री 420 संतोष सिंह, संजीव जायसवाल व वकील अनिरूद्ध देव द्वारा बेचे गये सपनों का टूटना तय है। देखना तो ये है कि इन टूटते सपनों से आम आदमी न बिखर जायें। बचने का केवल एक ही रास्ता है कि तत्काल एग्रीमेंट केंसल करके जनता अपना सारा पैसा डी.एच.एल. से वापस निकाल ले वरना तो भगवान ही मालिक हैं।
 

 

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